निर्गमन 36:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और इस्राएली जो-जो भेंट पवित्रस्‍थान की सेवकाई के काम और उसके बनाने के लिये ले आए थे, उन्हें उन पुरुषों ने मूसा के हाथ से ले लिया। तब भी लोग प्रति भोर को उसके पास भेंट अपनी इच्छा से लाते रहे;

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निर्गमन 36:3 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु

निर्गमन 36:3 यह बताता है कि परमेश्वर की उपासना के लिये दी गई दान और भीड़ की उदारता कितनी जीवंत और लगातार थी, और कि बनावट के कामों में आयोजन और स्वैच्छिक योगदानों को सुव्यवस्थित करने की आवश्यकता थी।

साहित्यिक प्रसंग

यह पद स्वर्णिम अधिवेशन की समाप्ति की ओर है जहाँ मसीहा-उपकरण और पवित्र स्थान की चीजें बनाई जा रही थीं। पिछले अध्यायों में मूसा ने लोगों से सामग्री माँगी थी और कारीगरों को जुटाया गया था। यहाँ वाक्य यह दर्शाता है कि लोगों की उदारता जारी रही—प्रति-भोर नई-नई भेंटें लाई जाती रहीं—ताकि काम न रुके। फिर मूसा और अधिकारियों ने उन सामग्रियों को ग्रहण कर ले लिया ताकि निर्माण नियंत्रित और व्यवस्थित रूप से चले।

धार्मिक और नैतिक अर्थ

1) निरंतरता और उत्साह: "प्रति भोर" शब्द यह दिखाता है कि पूजा के लिये योगदान एक तात्कालिक जोश नहीं, बल्कि निरन्तर श्रद्धा का प्रमाण था।

2) व्यवस्था का महत्व: मूसा के हाथों सामग्रियों को लेना बताता है कि धार्मिक कार्यों में व्यक्तिगत उदारता के साथ-साथ नियम और नियंत्रण आवश्यक हैं, ताकि दान का सही उपयोग हो सके।

3) समुदाय की साझेदारी: यह आयत सामूहिक उत्तरदायित्व और सहभाज्यता का प्रतीक है—हर व्यक्ति ने अपनी इच्छा से दिया, और समुदाय ने उन उपहारों को जोड़कर पवित्र सेवा को संपन्न किया।

पवित्रशास्त्र में कनेक्शन

  • निर्गमन 25—31: तम्बू, रसद और प्रभु के मंदिर के उपकरणों का प्रारंभिक निर्देश; वहाँ भी सामग्री और कारीगरों का उल्लेख है, जो यहाँ के निर्माण कार्य से जुड़ता है।
  • लैव्यव्यवस्था 8—9: व्यवस्था और नियुक्ति के संस्कार—मूसा और नेतृत्व के माध्यम से पवित्र कार्यों का आयोजिन इसी सिद्धांत को दोहराता है कि धार्मिक कार्यों में अनुशासन और प्रतिष्ठान आवश्यक है।
  • 1 कुरिन्थियों 16:2: प्रारब्धिक ईसाई प्रथा में भी दान नियमित रूप से जमा करने की आदत दिखती है; यह निरन्तर उदारता की बाइबिलिक परंपरा को प्रतिबिंबित करता है।

विचारार्थ प्रश्न

1) क्या हमारी आज की पूजा और दान की प्रथाएँ निरंतरता और सुव्यवस्था दोनों का संगम दिखाती हैं?

2) किस प्रकार व्यक्तिगत उदारता को सामूहिक जिम्मेदारी में रूपांतरित किया जा सकता है ताकि पवित्र कार्य प्रभावी ढंग से सम्पन्न हों?

मिश्रित समर्थक विचारकों की टिप्पणी (संक्षेप)

मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचारों से साम्य यह है कि वे सभी इस आयत में समुदाय की उदारता और आदेश — दोनों को महत्व देते हैं। यदि कोई संक्षिप्त शब्द उद्धरण उपलब्ध हो, तो वह इन विद्वानों के सामान्य तर्कों को पुष्ट करता है: दान न केवल श्रद्धा का फल है, बल्कि उसे उचित नेतृत्व के पास केंद्रित कर दिया जाना चाहिए ताकि परमेश्वर की सेवा का कार्य सुचारु रहे।

निष्कर्ष

निर्गमन 36:3 हमें यह सिखाता है कि धर्मिक प्रयोजन केवल व्यक्तिगत भावना पर निर्भर नहीं करते; उनमें निरन्तरता, सामूहिक हिस्सा और संरचित व्यवस्था भी अनिवार्य हैं। पवित्र कार्यों के लिये इच्छा से दिया जाना प्रशंसनीय है, पर उसे तर्कसंगत नेतृत्व और व्यवस्थित प्रयोग की आवश्यकता होती है, ताकि वह समुदाय की सेवा में स्थायी रूप से उपयोगी बने।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 36:3 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जिस-जिस वस्तु के बनाने की आज्ञा यहोवा ने मूसा के द्वारा दी थी उसके लिये जो कुछ आवश्यक था, उसे वे सब पुरुष और स्त्रियाँ ले आईं, जिनके हृदय में ऐसी इच्छा उत्‍पन्‍न हुई थी। इस प्रकार इस्राएली यहोवा के लिये अपनी ही इच्छा से भेंट ले आए।

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तुम्हारे पास से यहोवा के लिये भेंट ली जाए, अर्थात् जितने अपनी इच्छा से देना चाहें वे यहोवा की भेंट करके ये वस्तुएँ ले आएँ; अर्थात् सोना, रुपा, पीतल;

निर्गमन 35:27 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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और प्रधान लोग एपोद और चपरास के लिये सुलैमानी मणि, और जड़ने के लिये मणि,

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