Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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निर्गमन 35:29 का अर्थ in Hindi
इस पद का मूलार्थ है: जो कुछ भी यहोवा ने मूसा के द्वारा बनाने के लिए आदेश दिया था, वह सब कुछ उन लोगों ने पहुँच कर अपनी इच्छा से दिया—पुरुषों और स्त्रियों ने, जिन्होंने हृदय से उद्ग्रह की प्रेरणा पाई थी।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
निर्गमन 35 अध्याय इस्राएलियों के देव-आह्वान के समय की तैयारी का भाग है, जब वे सामने आए और द्वार-निर्माण, पलंग, वस्त्र, और सेंघ-फरिश्तों के लिए आवश्यक वस्तुएँ दे रहे थे। यह अध्याय उन्होंने इसराएली समुदाय के योगदान को एक सामूहिक शब्द में संकलित किया है—हर कोई, जो भी सक्षम था, अपने मन से दान दे रहा था। यहोवा के लिए दान देना केवल धन नहीं था, बल्कि एक आस्था और सेवा का व्यवहार था।
व्याख्यात्मक विचार
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
अन्य संदर्भ और उनके अर्थ
यही विचार—दिल से दान, समुदाय-भागीदारी, और दान का उद्देश्य—कई समकालीन और पूर्व-युग के पवित्र पाठों में भी मिलता है। नीचे के संदर्भों में छोटे टिप्पणियाँ:
क्रॉस-रेफरेंस (सीधे उद्धरण नहीं, पर अर्थ-संलग्न)
1) एक समुदाय की प्रतिज्ञा और सहयोग का चित्रण—जहाँ हर व्यक्ति अपने-अपने साधन से सेवा के लिए आगे आता है।
2) दान का उद्देश्य—मंदिर, सेवा-संचालन, और विशिष्ट कार्यों के लिए आवश्यक साधन जुटाना।
3) आंतरिक प्रेरणा बनाम बाहरी दबाव—स्वेच्छा से दान देना अधिक बहुमूल्य माना गया।
चरितार्थ एवं व्यावहारिक Takeaway
यह पद हमें यह सिखाता है कि भगवान के लिए हर प्रकार के दान, जो दिल से आया हो, वह स्वीकार्य है। स्थिरता और सामुदायिक भागीदारी से ही Church-like सेवा संभव बनती है। यदि हम ईश्वर के कारण किसी कार्य के लिए जुटते हैं, तो हमारे संकल्प में आज्ञापालन और प्रेम की भावना रहती है।
हेडिंग्स के साथ उद्धृत अनुभाग
यहां पर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के छोटे-छोटे स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं, किन्तु उनके दृष्टिकोण से संभावित सार यह है कि दान-प्रेरणा और समुदाय-योगदान की महत्ता इस पाठ के मूल में है।
कुल मिलाकर, निर्गमन 35:29 इस बात को रेखांकित करता है कि परमेश्वर के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति एक ऐसे समुदाय की आंतरिक एकता और उल्लास से होती है—हर दिल से दान, हर हाथ में सेवा।