Old Testament
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निर्गमन 35:25—आत्मिक कौशल और सहभागी योगदान
इस पद में महिलाएँ वह योगदान दे रही हैं जो एक आंदोलित, विशिष्ट उद्धार के आयोजन के लिए आवश्यक था। यह संदर्भ तब है जब ईश्वर ने मूसा को चूड़ियाँ, वस्त्र और आभूषण बनाने के लिए निर्देश दिए, ताकि ईश्वर की मन्दिरीय प्रतिष्ठा तथा तुरुद्वारा-उत्सव के लिए आवश्यक वस्त्र और उपकरण तैयार हों। verse 25 में उन सभी स्त्रियों का उल्लेख है जिनके हृदय में बुद्धि और समझ प्रकाशमान था, जिन्होंने सूत कातकर, नीला, बैंगनी, लाल रंग और महीन सूत तैयार किया। यह देखना महत्त्वपूर्ण है कि सामूहिक समर्पण और कौशल का यह मिश्रण ईश्वर के उद्देश्य की पूर्ति के लिए एक संगठित परिवार की तरह काम कर रहा है।
मुख्य अर्थ
यह वचन साक्ष्य देता है कि ईश्वर के कार्य में भागीदारी केवल पुरुषों की दृढ़ता या पेशेवर कला तक सीमित नहीं थी; स्त्रियों का योगदान भी बहुमूल्य था और उनकी बुद्धि से प्रेरित निर्णयों ने देव-कार्य का स्वरूप सँवारा। सूत कातना, रंगों का चयन, और महीन सूत की पेशकश—इन सबमें एक गहरी खूबी है: सामग्री का चयन और शिल्प, जो पवित्र कार्य के लिए आवश्यक था।
दो-तीन केंद्रीय थीम
संबद्ध संदर्भ
1) Exodus 31:2-5 में भी वैसा ही उल्लिखित है कि Bezaleel और Oholiab को कला, शिल्प और डिज़ाइन में भरे-पूरे दायित्व दिए गए। इसे इस अध्याय के साथ जोड़ा जाता है कि संगठित समुदाय की कला-शक्ति किस प्रकार परमेश्वर की योजना को साकार करती है।
2) 1 करिंथियों 12:12-27 में बताये गये जिस प्रकार सभी अंग एक शरीर की तरह हैं, उसी क्रम में यह दिखता है कि विविध कृपा और कार्य सभी मिलकर एक के लिए काम करते हैं—भिन्न-भिन्न भाग, एक उद्देश्य।
3) प्रेरितों के कार्य 6:1-7 में जब सेवक-समिति का चयन हुआ, तब भी यह स्पष्ट है कि सेवा-कार्य के लिए हर पक्ष को भूमिका दी जाती है, ताकि वैश्विक समुदाय में संसाधन और गुंजाइश बहती रहे।
व्यावहारिक विचार
आप स्वयं कैसे ईश्वर के कार्य में भाग लेने के लिए प्रेरित होते हैं? बुद्धि के प्रकाश के साथ स्वयं के कौशल और उपलब्ध संसाधनों को पहचान कर उसे परमेश्वर के उद्धार-कार्य के लिए समर्पित करें। आसपास के समूहों में सहयोग, सूझ-बूझ और रचनात्मकता को साझा करें—हर किसी की छोटी-छोटी सहभागिता भी बड़े उद्देश्य को साकार करती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
निर्गमन 35:25 दर्शाता है कि ईश्वर के संगठित कार्य में हर दिल, हर हाथ और हर बुद्धि की भूमिका है। महिलाएँ विशेषकर सूत-कात कर, रंग-निर्माण में भाग लेकर मिस्र के बाहर निकलने के प्रतिमा-कार्य को प्रेरित करती हैं—यह एक सामुदायिक और आध्यात्मिक समर्पण का आदर्श प्रस्तुत करता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
• प्रेरित-शासन 31:2-5: कला-शिल्प के लिए दी गई क्षमता का उल्लेख; मानव-समूह के कार्य के लिए भगवान की योजना का भाग।
• 1 करिंथियों 12:12-27: शरीर के अंगों के समान विविध प्रतिभाओं का एकत्व।
• प्रेरितों के काम 6:1-7: सेवक-समिति के चयन से समूह-कार्य की व्यवस्था और भागीदारी का मॉडल।
स्थापना-आधार के रूप में यह पाठ हमें बताता है कि आराधना-कार्य में बहुलता और सहभागिता से ही परमेश्वर की योजना पूर्ण होती है, और हर योग्य भागीदार की कड़ी भूमिका उसे आगे बढ़ाती है।