Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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निर्गमन 35:4 — पाठ का तुरंत संदर्भ और सेटिंग
इस पाठ में मूसा, ईश्वर के अनुसार यहोवा की आज्ञाओं को इज़राइल की सारी सभा तक पहुँचाते हैं। यह क्षण तब है जब लोग जंगल-यात्रा के बाद पहली बार सामुदायिक रूप से यहोवा की सेवकाई और पूजा के लिए निर्धारित नियमों को समझते हैं। मूसा घोषणा कर रहे हैं कि परमेश्वर ने जो कार्य करने के लिए निर्देश दिए हैं, वही कर्म आज से शुरू होकर संगठित रूप से किया जाएगा। यह विश्वास का सामाजिक प्रगट है: परमेश्वर का मार्ग जन-जन तक पहुँच रहा है और एकता के साथ पालन किया जाएगा।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से क्या स्पष्ट हो रहा है?
इस पाठ से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर एक व्यवस्थित God है जो अपने चुने हुओं के जीवन-संघटन को क्रमशः निर्देशित करता है। समय-समय पर वह विशेष रूप से बताए हुए कार्य—यानी प्रति-उत्साह और पूर्ण समर्पण के साथ पालन—का आह्वान करते हैं। प्रेरणा के स्तर पर यह समुदाय के विश्वास को संगठित करता है: यहोवा के निर्देशों के पालन से वे अपनी आस्था को सार्वजनिक रूप से पहचानेंगे और एक समूह के रूप में उसकी महिमा करेंगे।
महत्वपूर्ण शब्दों और इमेजों की स्पष्टीकरण
यहाँ व्यवस्था, अनुशासन और सम्मिलन का संकेत है: एक समुदाय, एक मार्ग, एक परमेश्वर।
संबंधित पद और उनके अर्थ
रूचिपूर्ण cross-references (संक्षेप में):
आज-के-day के लिए अनुप्रयोग
- समुदायिक जीवन में स्पष्ट निर्देशों के साथ चलना हमारी प्रेरणा बनता है। जब हम ईश्वर की आज्ञाओं को जानते हैं, तो उनका पालन समुदाय के रूप में संभव होता है।
- नेतृत्व और समूह-योजना में ईश्वर के मार्गदर्शन को प्रधानता दें: साझा निर्णयों में प्रार्थना और सतर्कता से काम लें ताकि कार्य-संगठन स्वच्छ और विश्वसनीय रहे।
- पूजा-उत्सव और सेवा के दौरान समर्पण की भावना बनी रहे: हर क्रिया, चाहे वह सेवा हो या समर्पण, परमेश्वर की महिमा के लिए हो।
यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes एवं Adam Clarke के मौलिक विचारों के साथ एकीकृत संरचना में प्रस्तुत किया गया है: प्रमुख बिंदु यही है कि ईश्वर की आज्ञाओं का स्पष्ट और एकीकृत पालन gemeenschap के जीवन को दिशा देता है और उनके विश्वास को सार्वजनिक रूप से पुष्ट करता है।