निर्गमन 35:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और जितनी स्त्रियों के मन में ऐसी बुद्धि का प्रकाश था उन्होंने बकरी के बाल भी काते।

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निर्गमन 35:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

निर्गमन 35:26 का संक्षिप्त परिचय और पाथेय

यह पद उस समय का दृश्य उधृत करता है जब मूसा के निर्देशानुसार ईश्वर के लिए पवित्र उद्देश्यों के लिए बन रहे निर्मित वस्त्रों और उपकरणों के लिए दान और सज्जा की तैयारी चल रही थी। इस ठोर-तराशी के पीछे एक दृढ़ प्रामाणिकता और संयम है, जिसे बाबरल संस्कृति के बजाय परम पवित्र उद्देश्य के अनुरूप ढाला गया था।

संदेश का सार—ईश्वर और विश्वास का परिचय

इस वचन में स्पष्ट है कि परमेश्वर अपने भक्तों से ठीक-ठीक बारीकी और सतर्कता की अपेक्षा करते हैं। स्त्रियों के मन में बुद्धि ने जो प्रेरणा दी, वह देखिए — उन्होंने बकरी की कांति (बाल) काटकर उनके आध्यात्मिक योगदान को अंकित किया है। इसका तात्पर्य यह है कि विश्वास में भागीदारी केवल औपचारिक देना नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण दक्षता और लगन से काम करना है।

शब्दों का विश्लेषण और चित्रण

  • शास्त्र परंपरा में यह स्पष्ट करता है कि इसे मंदिर के वस्त्रों के रंग-रूप, बनावट या सजावट के लिए उपयोग किया गया। यह जिम्मेदारी और समर्पण का प्रतीक है—जो कुछ भी दिया जाए, वह पूरी जड़ता और संकल्प के साथ।
  • देवत्व की योजना समझना और उसे व्यवहार में उतारना।यहाँ महिलाओं की भूमिका न सिर्फ संसाधन जुटाने की है, बल्कि योजना की सूझ-बूझ भी है।

निकट सम्बन्धित पवित्र पाठ

– हिब्रू धर्म के निर्माण-कार्य के समय महिला सहयोग की सराहना करता है, जैसे बाहर से आये दान-स्वीकृति में भी भागीदारी।

– अन्य जगहों पर पवित्र वस्त्रों और उपकरणों के लिए विधि-संयोजन और दानो की महत्ता दिखती है।

आधुनिक अनुप्रयोग

आज के विश्वासियों के लिए यह पाठ प्रेरणा देता है कि सेवा में भागीदारी केवल बड़े दान तक सीमित नहीं; बल्कि हर व्यक्ति के दिल से आने वाला विवेक, लगन और जिम्मेदारी एक साथ जुड़ कर समुदाय के बड़े कार्य को संभव बनाता है। महिलाएं भी सत्ता-नहीं, पर सूझ-बूझ और कुशलता के क्षेत्र में ईश्वर के काम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका संक्षिप्त अनुमान

– प्रेरणा के क्षेत्र में बने वस्त्रों के सजावट का हिस्सा बनने की बात अन्य स्थानों में भी मिलती है; यह समुदाय की समर्पण और सहयोग को दर्शाती है।

– दान देते समय आत्म-समर्पण और विवेक का संतुलन बनाए रखना सीख।

संपूर्ण सार

इस वचन से धर्म-कार्य के लिए प्रस्तुत हर सहभागिता को ईश्वर के सामने सम्मानजनक माना गया है—जहाँ विवेक, प्रतिबद्धता और सामूहिक सहयोग मिलकर एक पवित्र उद्देश्य को साकार करते हैं।

नोट: नीचे दिये गए विश्लेषण में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के वास्तविक उद्धरण यदि उपलब्ध हों, तो संक्षेप में संकेतित हैं:

सार-संरचना में उक्त टीका-लेखक के स्पर्श मिलते हैं—पर पूर्ण उद्धरण नहीं; मूल विचारों के अनुरूप ही समाहित किया गया है।

पाठ-संदेश का संक्षेप बिंदु

  • परमेश्वर के कार्य में हर प्रकार का योगदान मान्य है, यदि वह प्रेम और सचेतना से किया जाए।
  • समुदाय की सहभागिता से बनता है उद्देश्यपूर्ण मंदिर-सज्जा—यह एकता और समर्पण का प्रतीक है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 35:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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और जितनों को उत्साह हुआ, और जितनों के मन में ऐसी इच्छा उत्‍पन्‍न हुई थी, वे मिलापवाले तम्बू के काम करने और उसकी सारी सेवकाई और पवित्र वस्त्रों के बनाने के लिये यहोवा की भेंट ले आने लगे।

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और काम करनेवाले जितने बुद्धिमान थे* उन्होंने निवास के लिये बटी हुई सूक्ष्म सनी के कपड़े के, और नीले, बैंगनी और लाल रंग के कपड़े के दस परदों को काढ़े हुए करूबों सहित बनाया।

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जिस-जिस वस्तु के बनाने की आज्ञा यहोवा ने मूसा के द्वारा दी थी उसके लिये जो कुछ आवश्यक था, उसे वे सब पुरुष और स्त्रियाँ ले आईं, जिनके हृदय में ऐसी इच्छा उत्‍पन्‍न हुई थी। इस प्रकार इस्राएली यहोवा के लिये अपनी ही इच्छा से भेंट ले आए।

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