निर्गमन 35:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

फिर जितने चाँदी, या पीतल की भेंट के देनेवाले थे वे यहोवा के लिये वैसी भेंट ले आए; और जिस-जिस के पास सेवकाई के किसी काम के लिये बबूल की लकड़ी थी वे उसे ले आए।

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निर्गमन 35:24 पद-दर-पद बाइबल टीका

मतलब का सीधा समझना

निर्गमन 35:24 में बताया गया है कि किस प्रकार यहोवा की सेवा के लिए दानदाता अपने-अपने समृद्ध पदार्थ जुटाकर नेकी की थी। चाँदी, पीतल और लकड़ी जैसी अनुभूत देहिक सामग्री से सेवकाई के कार्य संचालित होते थे; जो लोग यह दान दे सके उनके द्वारा यहूदा के मंदिर-सबन्धी कामों के लिए आवश्यक सामग्री प्रस्तुत की गई।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह अध्याय इस्राएल के समुदाय के लिए बन रहे tabernacle के निर्माण-कार्य के लिए भेंट देने की व्यवस्था की चर्चा करता है। प्रभु यहूदा के लोगों से कहते हैं कि वे अपने पास शेष चाँदी-पीतल और बबूल की लकड़ी के दान दें ताकि भवन-सज्जा और सेवकाई सुचारु रूप से चल सके। यह दानिकता इस बात का प्रतीक है कि परमेश्वर के कार्य के लिए हर व्यक्ति अपनी क्षमतानुसार सहयोग दे सकता है।

interpretive observations

  • हर दाता अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देता है—चाँदी और पीतल के दान, और बबूल की लकड़ी जैसी संरचनात्मक सामग्री। यह विविधता यह दिखाती है कि समुदाय की एकता कैसे बहुविध संसाधनों से संभव बनती है।
  • भेंट की प्रकृति उपहार-स्वरूप है, न कि जबरदस्ती। यह मानवीय अर्पण की स्वेच्छा और परमेश्वर की सेवा के लिए प्रेम का प्रमाण है।
  • यह अंश यह संकेत देता है कि देवत्व के कार्यों के लिए समर्पण व्यक्तिगत-विकास और सामाजिक कल्याण दोनों को प्रेरित करता है।

छोटी थीमैटिक सूची

  • स्वेच्छा से दान देना बनाम बाध्य होना
  • विविध सामग्री का एक साथ प्रयोग होना
  • सेवकाई के मैदान में समुदाय का भागीदारी भाव

अन्य संबंधित आयतन

1) कर्म-पूर्वक दान की प्रेरणा: बार्न्स टिप्पणी है कि यह दान प्रेम-पूर्वक दिया गया था ताकि 하나님 के भवन की महिमा बढ़े।

2) फर्माइशी-आदेश बनाम स्वेच्छा: लेंदेन का यह भाग यह दर्शाता है कि किस प्रकार परमेश्वर अपने लोगों के भीतर दयालु और उदार रवैया विकसित करना चाहता है।

3) कार्य-उन्मुख दान: एडम क्लार्क समझाते हैं कि भेंट केवल संपत्ति नहीं, बल्कि दिल की सेवा है जो स्थानीय सुविधाओं के लिए श्रम और संसाधन प्रदान करती है।

क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षित व्याख्या)

यशायाह के सिद्धांत में भी एक समान विश्वास है कि नेककार्य के लिए संसाधनों की सहभागिता ईश्वर की योजना को पूर्ण बनाती है; प्रेरित पठन में भी यह सिद्धांत प्रतिपादन है कि समुदायिक सहयोग से चर्चाओं और स्थायी सेवाओं को प्रोत्साहन मिलता है।

वचन-जोड़: यह दान-प्रथा यह दर्शाती है कि परमेश्वर की 봉ायबद्ध सेवा में हर सदस्य की भूमिका है, चाहे वह सामग्री दे या सेवकाई का劳动।

व्यावहारिक निष्कर्ष

जब भी हम अपने पास उपलब्ध संसाधनों को परमेश्वर की सेवा के लिए छोड़ते हैं, तो हम समुदाय की एकता और सेवकाई की गति को बढ़ाते हैं। अपनी स्थिति के अनुसार अपेक्षित योगदान दें—यह न केवल भवन के लिए है, बल्कि दिल की उदारता और ईश्वर-विश्वास में भी वृद्धि का स्रोत है।

उद्धरण-यादनीस

हेनरी/बार्न्स/एडम क्लार्क के सार्वजनिक-domain टिप्पणियों में से निम्न छोटी उद्धरणात्मक पंक्तियाँ संबद्ध हैं: “यह दान दिल से दिया गया है, न कि जबरदस्ती” (संकेत: सामान्य विचार, विशिष्ट टेक्स्ट से संबद्ध)।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 35:24 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि यदि मन की तैयारी हो तो दान उसके अनुसार ग्रहण भी होता है जो उसके पास है न कि उसके अनुसार जो उसके पास नहीं।

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