Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
निर्गमन 1 निर्गमन 2 निर्गमन 3 निर्गमन 4 निर्गमन 5 निर्गमन 6 निर्गमन 7 निर्गमन 8 निर्गमन 9 निर्गमन 10 निर्गमन 11 निर्गमन 12 निर्गमन 13 निर्गमन 14 निर्गमन 15 निर्गमन 16 निर्गमन 17 निर्गमन 18 निर्गमन 19 निर्गमन 20 निर्गमन 21 निर्गमन 22 निर्गमन 23 निर्गमन 24 निर्गमन 25 निर्गमन 26 निर्गमन 27 निर्गमन 28 निर्गमन 29 निर्गमन 30 निर्गमन 31 निर्गमन 32 निर्गमन 33 निर्गमन 34 निर्गमन 35 निर्गमन 36 निर्गमन 37 निर्गमन 38 निर्गमन 39 निर्गमन 40Verse
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reader-friendly overview
निर्गमन 35:9 में यह निर्देश मिलता है कि ईश्वर के लिए विशेष वस्तुएँ और औजार बनाए जाएँ। पवित्र ठहराव के समय मंदिर निर्माण के लिए दी जाने वाली सामग्री और उपकरणों की योजना स्पष्ट की गई है, ताकि साधन शुद्ध और पवित्र क्रम के अनुसार बने। यहाँ एपोद (आभूषण) और चपरास (सूक्ष्मली, पवित्र कर्म के लिए) के लिए विशेष वस्तुओं का उल्लेख है, जो सेवक-समर्थन के साथ वहन होती हैं। यह पंक्ति यह दिखाती है कि परमेश्वर के लिए हर छोटा-सा भाग भी ईश्वर-आहुति और धार्मिक कर्म में शामिल है, और यह कि पूजा के हर आयाम में समर्पण और परिश्रम आवश्यक है।
verse in its chapter
फिर एपोद और चपरास के लिये सुलैमानी मणि और जड़ने के लिये मणि। यह रचना स्पष्ट रूप से वे वस्तुएँ दर्शाती है जो देवालय की सेवा के लिए समर्पित करनी थीं—आभूषण और औजार, जिनमें विशिष्ट धार्मिक और संगठित प्रयोग के लिए अनुशासन और शिल्प का मेल हो।
main spiritual lesson
ध्यान देने योग्य बिंदु यह है कि पूजा-सज्जा और फराइशी कार्यों में भी क्रम, शुद्धता और समर्पण आवश्यक है। परमेश्वर चाहते हैं कि जो कुछ भी उनकी सेवा के लिए प्रस्तुत किया जाए, वह विचारपूर्वक, निष्ठा और पवित्रता से किया जाए। यह गीत-सा निर्देश नहीं बल्कि जीवन-योजना है—हर वस्तु जो पूजा के साथ जुड़ी हो, उसका उद्देश्य परमेश्वर के महिमा को बढ़ाना है, न कि अपने आप को दिखाने के लिए।
cross-references and brief explanations
careful application
आज के पाठकों के लिए यह शिक्षा है कि हमारी हर तैयारी, चाहे वह सेवा-सामग्री हो या सेवा-क्रम, ईश्वर के निर्देश के अनुरूप होनी चाहिए। आधुनिक संदर्भ में इसका अर्थ है—हम अपनी सुविधाओं, समय-निर्गम और कौशल को ऐसे तरह से लगाएं कि सेवा-कार्य परमेश्वर की महिमा बढ़ाने के लिये हो, न कि केवल मौज़-मस्ती या दिखावे के लिए। साथ ही यह याद दिलाता है कि विशिष्टता और संपन्नता से नहीं, बल्कि पवित्रता, एकाग्रता और समर्पण से पूजा की गति बनती है।
summary
निर्गमन 35:9 यह दिखाता है कि परमेश्वर के लिए दिया गया हर साधन—आभूषण, औजार या अन्य उपकरण—साफ-सुथरे नियमों के साथ और पवित्र उद्देश्य के लिए बनता है। यह न केवल मंदिर-कार्य की कुशलता पर बल देता है, बल्कि भक्तों के हृदय में परमेश्वर के प्रति समर्पण और क्रमित पूजा की कल्पना भी जगा देता है।
इस पंक्ति को पाठक बनाते समय, नीचे के संकेत भी स्मरण रखें: यहूदी और ईसाई परंपरा में उपकरण और वस्तुएँ अक्सर प्रतीक बनते हैं—शास्त्रीय विद्वानों के तर्कों के आलोक में, यह परमेश्वर की सेवा के लिए समर्पित जीवन की बुनियादी सजगता को दर्शाती है।
noted quotations
Matthew Henry और Adam Clarke के निर्गमन-परिचय आधारित सार-उद्धरण इस प्रकार हैं: Henry ने अपनी टिप्पणियों में पूजा-सामग्री के पवित्र निष्ठा और क्रम की महत्ता पर बल दिया है; Clarke ने सेवक-कार्य के लिए सामग्री को “सज्जा” और “परिश्रम” के संयोजन के रूप में समझाया है. (यदि उपलब्ध हो तो नीचे उद्धृत शब्दों के छोटे अंश ही पेश किये गये हैं।)