निर्गमन 3:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और मैंने ठान लिया है कि तुमको मिस्र के दुःखों में से निकालकर कनानी, हित्ती, एमोरी, परिज्जी हिव्वी, और यबूसी लोगों के देश में ले चलूँगा, जो ऐसा देश है कि जिसमें दूध और मधु की धारा बहती है।'

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निर्गमन 3:17 पद-दर-पद बाइबल टीका

निर्गमन 3:17 का पटल—तुम्हारे लिए उद्धार का आह्वान

इस बच्चों-सी सरल वाक्य में परमेश्वर ने मोशे से क्या कहा, इसका आरम्भक स्वरूप मिलता है: “मैं ठान चुका हूँ कि तुमको मिस्र के दुःखों से निकालकर कनानी-हित्ती-एमोरी-परिज्जी-हिव्वी-यबूसी देशों के into शासन देश में पहुँचा दूँ।” यह सिर्फ एक भौगोलिक संक्रमण नहीं, बल्कि उद्धार-योजना का आध्यात्मिक उद्घोष है। परमेश्वर ने यह वचन तब दिया जब मोशे ने दयनीय स्थिति देखी और यह जान लिया कि इस निकास के बिना उनके पास जीवन नहीं। साथ ही, यह वचन यह भी बताता है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए एक निश्चित उद्देश्य रचता है: वह उन्हें एक ऐसी भूमि में पहुँचा देगा जहाँ दूध-शहद की धारा है—यही हमारे विश्वास के इतिहास में आशा की प्रतीक है कि आकाशीय वादा सच होता है।

ईश्वर का पक्का इरादा और विश्वास

इस वचन के पीछे की मुख्य बात यह है कि ईश्वर ने एक स्पष्ट उद्धार-योजना निर्धारित कर दी है। उनके कहने से पहले, मिस्र की captivity में फंसी जनता की पीड़ा दिखती है; फिर एक स्पष्ट “मैं” आता है—मैं वे निकास कर दूँगा। यह दर्शाता है कि ईश्वर केवल शक्तिशाली नहीं है, वह अपने वादों के प्रति दृढ़ विश्वासी है।

महत्वपूर्ण शब्द और चित्र

  • —यह सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि अनुग्रह, अनुपात और सामाजिक-आर्थिक फ्रीडम की प्रतीक है।
  • “दूध और मधु की धारा”—संतुष्टि, कल्याण और स्थिर समृद्धि का चित्र; गैर-उत्पन्न कठिनाइयों के बाद भी परमेश्वर का आशीर्वाद लगातार रहता है।

अनOther देखने वाले बिंदु: सम्बद्ध पाठ

यह उद्धार-योजना अन्य हिस्सों से जुड़ी है जहाँ परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के लिए निकासी व घोषणा करता है:

  • यहोशू 1:2—“तेरा सेवक मोशे मर गया; अब उठ कर इन लोगों को पार उतार।” यह बताता है कि परमेश्वर की योजना कैसे पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती है।
  • निर्गमन 6:6-8—“मैं तुम्हारे ईश्वर हूँ; मैं तुम्हें मुक्त कर दूँगा।” यह स्पष्ट करता है कि उद्धार მხოლოდ एक क्रिया नहीं, बल्कि ईश्वर की पहचान और नाम भी है।

हरकती-जीवन में आज का अनुप्रयोग

हम भी अपने कठिन समय में यह सीख लेते हैं कि परमेश्वर का उद्धार-योजना स्थिर है। व्यक्तियों के रूप में हम पीड़ा या असुरक्षा का सामना करें, तब भी ईश्वर के “मैं ठान चुका हूँ” की स्मृति हमें उम्मीद देती है। उसका उद्देश्य केवल बाधाओं से बाहर निकालना नहीं, बल्कि नयी जमीन—आध्यात्मिक उन्नति, सुरक्षित आचरण और ईश्वर-समर्पण में वृद्धि देना है।

विवेकपूर्ण संदर्भ

इस वचन के साथ निम्न संदर्भ प्रासंगिक हैं:

- निर्गमन 3:7-8: ईश्वर ने अपनी पीड़ा सुनी और उद्धार की योजना बतायी।

- इब्रानियों 11:13-16: विश्वासियों की अंतिम आशा यहाँ भी बतायी गयी है—एक महत्त्वपूर्ण मुलाकात जो धरती के स्थान पर स्‍थानीय आकाशीय निवास की ओर इंगित करती है।

कथन-नोट: नीचे दिये गए उद्धरण केवल संदर्भ हेतु हैं; पूर्ण पदग्रंथ नहीं दिया गया है।

महत्वपूर्ण उद्धरण (आवश्यकतानुसार): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-घरों के टिप्पणी-उद्धरणों से आवश्यक वाक्यांश शामिल हो सकते हैं; यह संकलन उनकी कृतियों के “संभावित” सार को एकीकृत करता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

निर्गमन 3:17 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उत्पत्ति 50:24 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, “मैं तो मरने पर हूँ; परन्तु परमेश्‍वर निश्चय तुम्हारी सुधि लेगा,* और तुम्हें इस देश से निकालकर उस देश में पहुँचा देगा, जिसके देने की उसने अब्राहम, इसहाक, और याकूब से शपथ खाई थी।” (इब्रा. 11:22)

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तब यहोवा ने अब्राम से कहा, “यह निश्चय जान कि तेरे वंश पराए देश में परदेशी होकर रहेंगे, और उस देश के लोगों के दास हो जाएँगे; और वे उनको चार सौ वर्ष तक दुःख देंगे;

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मैं तेरे संग-संग मिस्र को चलता हूँ; और मैं तुझे वहाँ से फिर निश्चय ले आऊँगा; और यूसुफ अपने हाथ से तेरी आँखों को बन्द करेगा।”

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