भजन संहिता 62:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अत्याचार करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो; चाहे धन सम्पत्ति बढ़े, तो भी उस पर मन न लगाना। (मत्ती 19:21-22, 1 तीमु. 6:17)

भजन संहिता 62:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 62:10 – स्थिति का परिचय और भयावहता में विस्मय

यह पद भजनकार के समय के आश्वासन का एक ठोस स्मरण कराता है: तब जब मनुष्य अत्याचार और संपत्ति की मूरत में भय, दबाव या भ्रम बनाता है। यह स्पष्ट कहता है—भरोसा केवल धन-सम्पत्ति, अधिकार और पग-पग पर सन्नद्धता से नहीं आता; न ही लूट-पाट, अन्याय और अत्याचार से बना विश्वास टिक सकता है। उसके स्थान पर एक पूर्ण विश्वास है जो परमेश्वर पर है, वह भी तब जब वस्तुएँ बहुत बढ़ें।

ईश्वरत्व का संदेश और विश्वास का मर्म

भजनकार दर्शाता है कि ईश्वर ही हमारा गढ़ और आश्रय है; धन-संपत्ति से सुख नहीं, बल्कि पूर्ण सुरक्षा उसी पर निर्भर है जो हमें देता है। यह पाठ यह संकेत करता है कि धन अगर बढ़े, तो भी मन उसे नहीं लगना चाहिए; क्योंकि स्थायित्व वही है जो परमेश्वर के भक्त को देता है।

महत्वपूर्ण शब्दों और रंगों की व्याख्या

  • अत्याचार करना पर भरोसा मत रखो: दूसरों पर दबाव डालकर या असत्य के माध्यम से प्राप्त राहत से कबूतर की तरह सुरक्षित नहीं मिलती; ईश्वर न्यायी है और असत्य पर टिके रहने वालों को निष्क्रमण देता है।
  • लूट पाट करना: किसी के अधिकार पर जबरन कब्ज़ा करना या अवैधानिक लाभ उठाना—यह व्यवहार परमेश्वर के सामने अवैध और अस्थिर है।
  • धन सम्पत्ति बढ़े, तो भी उस पर मन न लगाना: विश्वासी को धन के बढ़ने से भी मोह नहीं होना चाहिए; संतोष और ईमानदारी है जो आस्थाओं को दृढ़ बनाते हैं।

संबद्ध पाठक-उद्धरण (cross-references)

1) मत्ती 19:21-22 – धन के प्रति मोह और आत्म-त्याग का सच: यदि तुम पूर्ण बनना चाहते हो, तो वस्तुओं के पीछे नहीं, परमेश्वर के राज्य के पीछे लगो; धन हो तो भी त्याग संभव है।

2) 1 तीमुथियुस 6:17 – धन के साथ निर्बलों के लिए निष्कपट आशीर्वाद: जीवित विश्वास में, धन के स्रोत पर निर्भर न रहो—परमेश्वर जो सब चीज़ दे रहा है, उसी पर आश्रय रखो।

3) इब्रायन 13:5 – धन और संसार की चिन्ता से मुक्त रहना: जो ईश्वर को भरोसा देता है, वही सदा संतुष्ट रहता है।

ईश्वर-विश्वास की बजाय वास्तविक जीवन में अनुप्रयोग

- धन बड़े या छोटे हों—हमारी आस्था एक-जगह स्थिर रहे: ईश्वर पर भरोसा और उनके नियमों के अनुसार आचरण।

- अन्याय से प्राप्त लाभ तुरंत खो सकता है; प्रतिष्ठा और सुरक्षा परमेश्वर के धर्म के अनुसार चलने में है, न कि लूट-पाट से।

- संसाधनों के बढ़ने पर भी आत्म-मोह न बढ़े; साधनों के उपयोग में नैतिकता और उद्भव की दिशा स्पष्ट रहे।

समापन सार

भजनकार हमें स्मरण कराता है कि वास्तविक सुरक्षा परमेश्वर के रब्बी-आशीर्वाद में है, और धन-सम्पत्ति कभी भी भगवान के सामने हमारी आस्था की कसौटी नहीं बननी चाहिए। पुराने commentators के अनुसार उत्पन्न विचार यह हैं कि विश्वास, प्रतिशत नहीं बल्कि परमेश्वर के प्रति समर्पण और धार्मिक नैतिकता पर टिका रहता है।

सीधे उद्धरण (exact quotes) खोजयोग्य: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के भीतर से अगर उपलब्ध हों, वहाँ संक्षेप में उल्लेख किया जाएगा; यहाँ अनुवादित पाठ में उनके पूर्ण उद्धरण शामिल नहीं हैं ताकि पाठ की मुख्यता बनी रहे।

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भजन संहिता 62:10 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जो अपनी सम्पत्ति पर भरोसा रखते, और अपने धन की बहुतायत पर फूलते हैं,

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