भजन संहिता 62:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परमेश्‍वर ने एक बार कहा है; और दो बार मैंने यह सुना है: कि सामर्थ्य परमेश्‍वर का है*

भजन संहिता 62:11 पद-दर-पद बाइबल टीका

भजन संहिता 62:11 — एक बार कहा गया और दो बार मैंने सुना: सामर्थ्य परमेश्वर का है

यह आयत भजनकार के भीतर परमेश्वर के गौरवपूर्ण राष्ट्र-स्वरूप को समर्पित एक गहरे अनुभव का अभिव्यक्ति है। यहां क्रमशः दो बातें स्पष्ट होती हैं: परमेश्वर के बारे में एक बार कही गई बात का महत्त्व; और उसी बात को दूसरी बार दोहराकर उसकी अविनाशी सत्ता पर जोर देना। यह उद्घोष दर्शाता है कि परमेश्वर की सामर्थ्य स्थिर, अटल और सभी चीजों के आधार-स्तम्भ के समान है।

भक्त के मन में उद्घाटन संकेत (Immediate Setting)

भजनकार अपने विरोधाभासों के बीच भी परमेश्वर के समान हैं—व्यथा, धैर्य और विश्वास के बीच। यह नारा-सा वाक्य उन चरों की पुष्टि करता है जो भजनकार ने पहले अनुभव किया है: परमेश्वर के विरुद्ध कुछ कठिन समय में भी उसकी सत्ता वही शान्ति प्रदान करती है जिसकी उसे आशा है। “एक बार कहा गया है” और “दो बार सुना है” से संकेत मिलता है कि परमेश्वर की सत्ता एकदम स्पष्ट और ठोस है; यह दोहरा पुष्टिकरण विश्वासियों के लिए दृढ़ स्थिरता बन जाता है।

मुख्य विचार: परमेश्वर की सामर्थ्य और उसकी उपस्थिति

इस पद के केंद्र में यह विचार है कि परमेश्वर की शक्ति सबके ऊपर है—सिर्फ किसी सीमा या परिस्थिति से मुक्त। यह सिर्फ संकल्प नहीं, बल्कि एकआम विश्वास का घोषणा है: परमेश्वर वही है जिसके हाथ में सब कुछ है, और वह अपने लोगों के कल्याण के लिए वह सब कर सकता है जो उसे परम了解 होता है। यह ज्ञान भय के समय में भी आशा पैदा करता है कि हमारी नियति उसकी योजना के अनुसार है।

कुछ शब्दों की स्पष्टता

  • “सामर्थ्य” — पवित्र, निश्चयपूर्ण और असरदार शक्ति को दर्शाता है; न तो क्षणभंगुर और न ही निर्बल।
  • “परमेश्वर का है” — इसका आशय है कि सत्ता उसकी है, उसका अधिकार और उसकी योजना सारी सृष्टि पर प्रभाव डालती है।

संबद्ध कथन (Related Passages) और उनका संक्षिप्त अर्थ

  • उद्धृत आत्म-विश्वास की पुष्टि: भजन 46:11 और यशाय 40:28–31—ये भी परमेश्वर की अटल सत्ता और सहायता की वचनबद्धता दिखाते हैं। यह बताता है कि मजबूत विश्वास वही पाते हैं जो परमेश्वर को अपना भरोसा मानते हैं।
  • कृतज्ञता और समर्पण का विस्तृत चित्र: भजन 145:11–13—परमेश्वर की विशालता और उसका राज्य हमेशा स्थिर रहता है; हमारे जीवन की घटनाएँ उसके नियमों के अनुरूप होती हैं।
  • क्योंकि वह राजा है: दानिया 4:35–36—जहां उसकी सत्ता सभी देवी-देवताओं के ऊपर है, वहीं हमारी रक्षा और अधिकार की अनुभूति होती है।

2-3 वाक्यों में स्पष्ट कर पंक्ति-आधारित समझ

यह वाक्य यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर की शक्ति सीमाओं से परे है और वह विश्व-व्याप्त शासन के स्रोत हैं। कठोर समय में भी हमारा ध्यान उसकी सत्ता पर बना रहना चाहिए, क्योंकि वह वही है जो परिवर्तन नहीं, बल्कि स्थायित्व प्रदान करता है।

आज के लिए अनुप्रयोग

हमारे प्रति दिन के संघर्षों में यह विश्वास बनाए रखें कि परमेश्वर की सामर्थ्य सभी नियंत्रण में है। निराशा के क्षणों में प्रार्थना करें; उसकी शक्ति हमारी कमजोरियों में भी मजबूत बनती है। अपने क्षुद्र योजनाओं को छोड़कर उसकी योजना पर विश्वास रखें; यह आपके प्रत्येक कदम को आशा और धीरज से भर देगा।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा परिचय

• यशाय 40:28–31: परमेश्वर की असीम ऊर्जा और निरन्तर सहायता का प्रेरक चित्र।

• भजन 46:11: शांति और सुरक्षा की निश्चयता—“यहोवा के साथ है—उसे डरने की आवश्यकता नहीं।”

• दानियेल 4:35–36: परमेश्वर की सत्ता और विश्व-राज्य की सुरक्षा का संकेत।

नोट: नीचे उद्धृत किसी भी अग्रणी पवित्र-व्याख्याता (मैथ्यू हेनरी, आल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क) के संक्षिप्त और आवश्यक समान विचारों का सार केवल यह दर्शाता है कि उनका शिल्प इस क्रम की पुष्टि में कैसे जुड़ता है; यदि उपलब्ध हो तो उनके छोटे स्पष्ट उद्धरण हर एक टिप्पणी में संलग्न होंगे।

उद्धृत तात्त्विक लहजे: अगर किसी जगह उनके सटीक वाक्य मिलते हैं, तो पाठक को यह बताने हेतु रखा गया है कि वह वास्तविक पाठ किस प्रकार प्रस्तुत हुआ है, ताकि मूल धारणा स्पष्ट रहे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

भजन संहिता 62:11 समानांतर पद और संबंधित वचन

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