उत्पत्ति 26:34 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब एसाव चालीस वर्ष का हुआ, तब उसने हित्ती बेरी की बेटी यहूदीत, और हित्ती एलोन की बेटी बासमत को ब्याह लिया;

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उत्पत्ति 26:34 पद-दर-पद बाइबल टीका

यथार्थ अर्थ और मुख्य विचार

उत्पत्ति 26:34 के अनुसार जबईसा के चालीस वर्ष पूरे हुए, यसास ने हित्ती बेरी की बेटी यहूदित और एलोन की बेटी बासमत से विवाह किया। इस वाक्य का सरल अर्थ है— इस समय अविश्वास, विदेशी विवाह और पारिवारिक मिश्रण की स्थिति स्पष्ट होती है, जो आगे इस्लाह से भरे परिणामों को उभारती है। परन्तु इस पाठ का प्राथमिक संदेश यह है कि आराधना और कसमों के साथ जीवन की दिशा में तात्कालिक निर्णय भी दीर्घकालीन प्रभाव डालते हैं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

याकूब के वंश के साथ जुड़ा यह भाग वे समय दिखाता है जब तक़दीर परिवार के भीतर बाहरी विवाह से अनुशासन और धर्म-जीवन के जीर्ण-शीर्ण प्रभाव उठते हैं। आगे के प्रसंग में वहीं यहूदियों के सिद्धान्त और नीति में विविधता, भूगोल और जातीय पहचान के कारण परिवारिक संरचना पर असर डालती है। यह आश्वासन देता है कि परमेश्वर के उद्देश्य कभी-कभी मानव निर्णयों से प्रभावित होते हैं, परंतु परमेश्वर की योजना बनी रहती है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • यहूदीत और बासमत के विवाह से ऐतिहासिक रूप से पथभ्रष्टि और पारिवारिक विवाद की संभावनाएं उभरती हैं; परन्तु आदेश और विधान के भीतर भी ऐसे निर्णयों के परिणाम देखते हैं।
  • विवाह का आचरण और तपस्वी जीवनशैली पर प्रभाव— बाहरी रीति-रिवाज़ों के साथ सामाजिक संबंध बनना परिवार के आध्यात्मिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।
  • धर्म-बोध और परंपरा के बीच संतुलन की प्रमुखता— परमेश्वर की योजना के भीतर, हमें अपने जीवन के निर्णयों में विश्वास और धैर्य बनाए रखना चाहिए।

मूल पाठ से जुड़े विचार

यह पाठ दिखाई देता है कि आराधना के केंद्र में रहे असंख्य निर्णय भी अक्सर संसार की परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं। मैथ्यू हेनरी, आर्थर क्लार्क और एल्बर्ट बर्न्स के संकलन में यह स्पष्ट किया गया है कि परमेश्वर की विधान-संरचना में मानव प्रवृत्ति की सीमाओं के बावजूद, ईश्वर की प्रतिबद्धता बनी रहती है।

संयुक्त सार-संक्षेप

1) बाहरी विवाह से उत्पन्न सामाजिक-धार्मिक प्रभाव सामने आते हैं; 2) परमेश्वर की योजना के साथ जीवन-निर्णयों का संतुलन आवश्यक है; 3) परिवारिक पाप या गलत निर्णय भी समय के साथ शासन-कार्य में बदलाव ला सकते हैं, परन्तु परमेश्वर की वाणी और विधान उच्चतम रहते हैं।

संदर्भ-सम्बन्ध

related passages and brief explanations:

  • योजना और सत्ता के संघर्ष: उत्पत्ति 24-25 के पारिवारिक निर्णयों पर केंद्रित प्रसंग—परमेश्वर के चुनाव और humana निर्णयों के बीच संवाद।
  • आस्था बनाम संसारिक आचरण: इब्रानियों 11 जैसे पाठक-सम्बंध, जहाँ आस्था के माध्यम से जीवन के निर्णयों की कसौटी प्रस्तुत होती है।

व्यावहारिक takeaway

हमारे निर्णय बनते समय यह याद रखें कि परमेश्वर की योजना कभी बाधित नहीं होती; फिर भी हमारा आचरण और धर्म-संयम जीवन के दायरे को प्रभावित करता है। धर्म और परिवार के बीच संतुलन बनाने में प्रार्थना और परमेश्वर के मार्गदर्शन की आवश्यकता प्रमुख है।

कथित संदर्भ उद्धरण: यदि किसी टिप्पणीकार के स्पष्ट उद्धरण उपलब्ध हों, उनमें से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्द बिल्कुल उद्धृत बताए जा सकते हैं; इस संस्करण में वे आवश्यकतानुसार एक.placeholder के रूप में शामिल हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 26:34 समानांतर पद और संबंधित वचन

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एसाव ने तो कनानी लड़कियाँ ब्याह लीं; अर्थात् हित्ती एलोन की बेटी आदा को, और ओहोलीबामा को जो अना की बेटी, और हिव्वी सिबोन की नातिन थी।

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रूएल के ये पुत्र हुए; अर्थात् नहत, जेरह, शम्मा, और मिज्जा एसाव की पत्‍नी बासमत के वंश में ये ही हुए।

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और तू उनकी बेटियों को अपने बेटों के लिये लाये, और उनकी बेटियाँ जो आप अपने देवताओं के पीछे होने का व्यभिचार करती हैं तेरे बेटों से भी अपने देवताओं के पीछे होने को व्यभिचार करवाएँ।

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