उत्पत्ति 26:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब उसने वहाँ से निकलकर एक और कुआँ खुदवाया; और उसके लिये उन्होंने झगड़ा न किया; इसलिए उसने उसका नाम यह कहकर रहोबोत रखा, “अब तो यहोवा ने हमारे लिये बहुत स्थान दिया है, और हम इस देश में फूले-फलेंगे।”

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उत्पत्ति 26:22 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 26:22 पर टिप्पणी

पर्वतक के हासकाई, प्रकार से अस्थिर स्थानों में भी ईश्वर के वरदान के कारण जैसे-जैसे याकूब के पुत्र ने नया कुआँ खोदा, वह भविष्य में निरन्तर प्रगति और शांति की दिशा को दर्शाता है। इस पद में याकूब ने नया कुआँ खोदा और उसे “रहोबोत” कहा—यानी यह संकेत कि अब परमेश्वर ने हमारे लिये यहाँ स्थान दिया है, हम फलते-फूलते रहेंगे। यह इतिहासिक घटना यहूदी समुदाय की पहचान और उनकी कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक बन गई। यह सूचित करता है कि सत्य यात्रा में जब प्रयत्न नए स्रोत खोलते हैं, तब परमेश्वर की कृपा से संघर्ष कम होता है और स्थिरता मिलती है।

केंद्रीय अर्थ

याकूब के परिवार ने फिर से कुआँ खोदा और इस बार किसी के साथ झगड़ा नहीं हुआ। इसका आशय है कि परमेश्वर की रक्षा और आशीष के कारण अब उनका संबंधीय और धार्मिक क्षेत्र सुरक्षित हो रहा है। “रहोबोत” का नाम यह बताता है कि ईश्वर ने उनका कार्यस्थान बनाते समय उनके लिए पर्याप्त अवसर और स्थान प्रदान किया है। इसमें यहमानव व्यवहार का परिणाम स्पष्ट है: जब परमेश्वर की योजना के अनुरूप कार्य किया जाए, तो विरोध कम पड़ते हैं और सफलता मिलती है।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • ईश्वर की प्रावीण्यता बनाम मानवीय संघर्ष: कुँए खोलना एक प्रतीक है कि भविष्य के लिए ज़रूरी संसाधनों पर ईश्वर का आशीर्वाद है, और विरोध तब कम पड़ता है जब कदम नेक और न्यायपूर्ण हों।
  • स्थिरता और स्थान का लाभ: “रहोबोत” नाम से स्पष्ट होता है कि 하나님 ने इस जगह को उनके लिए मान्य और सुरक्षित बना दिया है, जिससे वे फसलते-फलते हैं।
  • आशीष के स्रोत का सही क्रम: उपलब्ध संसाधन, संघर्ष के बिना नहीं बनते; परन्तु परमेश्वर की कृपा से वे सुरकृत होते हैं।

संबंधित आयतें (संलेख समाकलन)

- Քीसी संदर्भ जो यह संदेश जोड़ते हैं: पूर्वजों के कुओँ के पुनः उद्घाटन और ईश्वर की आशीष के संकेत, जैसे जैतून के पेड़ की शांति बनना।

- साथ की घटनाओं के प्रभाव: अब्राहम और इज़राइल के इतिहास में स्थान और संसाधन का महत्व दिखता है; परमेश्वर के आशीर्वाद से दूरी घटती है और एकजुटता बढ़ती है।

- विश्वास और आज के संदर्भ: जब विश्वासियों को नया अवसर मिलता है, वे सामंजस्य बनाकर समुदाय और अपने पथ के लिए स्थिरता बनाते हैं।

व्यावहारिक विचार

जीवन में जब कोई नया मार्ग खुलता है या स्रोत मिलते हैं, तब निम्न बातों का ध्यान रखें: मानव-झगड़े से बचना, एक दूसरे के साथ शांति से व्यवहार करना, और परमेश्वर की आशीष को मानकर उस अवसर का सदुपयोग। यह घटनाक्रम जीवन के हर क्षेत्र में स्थिरता का संकेत देता है—व्यापार, संबंध और आध्यात्मिक यात्रा में।

संक्षिप्त निष्कर्ष

उत्पत्ति 26:22 हमें सीख देता है कि परमेश्वर के मार्ग में कदम बढ़ाने पर कठिनाइयों के बीच भी स्थान और फल मिलता है। निष्कर्षतः “रहोबोत” यह बताता है कि ईश्वर ने उनके लिए बहुत स्थान दिया है, और वे इस देश में फूले-फलेंगे।

Cross-References

1) उत्पत्ति 26:12-13 — परमेश्वर के आशीर्वाद से फसल का समृद्ध होना और जीवन में नवीन अवसरों का आना; यह संकेत देता है कि पृथ्वी में आशीष कैसे संचालित होती है।

2) उत्पत्ति 13:14-15 — भ्रातृत्व के कारण सीमाओं के बजाय आशीषों का बढ़ना; स्थान और संसाधन ईश्वर के निर्णय पर निर्भर हैं।

3) यूहन्ना 15:5 — जीवन में रिष्टे और फल का सम्बन्ध; बिना निर्भरता के फल नहीं मिलता—ईश्वरीय सहायता से ही स्थिरता आती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 26:22 समानांतर पद और संबंधित वचन

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दूसरे का नाम उसने यह कहकर एप्रैम रखा, कि ‘मुझे दुःख भोगने के देश में परमेश्‍वर ने फलवन्त किया है।’

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