उत्पत्ति 6:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

एक-एक जाति के पक्षी, और एक-एक जाति के पशु, और एक-एक जाति के भूमि पर रेंगनेवाले, सब में से दो-दो तेरे पास आएँगे, कि तू उनको जीवित रखे।

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उत्पत्ति 6:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

उत्पत्ति 6:20 पर commentary (HINIRV)

यह पद उस समय की कथा का भाग है जब परमेश्वर ने Noah के लिए एक विशाल उद्धार-योजना बनायी। जलप्रलय से पहले पृथ्वी पर जीवन की संरक्षण-योजना के रूप में परमेश्वर ने ntab yaatra की व्यवस्था दी: हर प्रकार की जीव-जंतुओं के जोड़े उनके साथ चले, ताकि वे जीवित रह सकें। यह वाक्य यह संकेत देता है कि भगवान की योजना में संरक्षण, पुनर्जन्म और नव शुरूआत का मानवीय सिम्बोलिज्म कैसे जुड़ा हुआ है।

केन्द्रीय अर्थ

तीसरे आयाम में यह संदेश है कि हर प्रकार के पशु-पक्षी और जंतु-कुल के जोड़े Noah के साथ आकर नाव में प्रवेश करेंगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि उद्धार का कार्य क्रमबद्ध तरीके से संविधानित है: परमेश्वर ने կառ्यान्वित किया कि विश्व के विनाश के बाद भी पृथ्वी के जीवन की पुनर्निर्माण हो सके।

मुख्य विषय

  1. विश्वास व पालन – Noah ने परमेश्वर के आदेश के अनुसार योजना में सहभागिता दी। यह विश्वास की प्राथमिकतापूर्ण मानक है: परमेश्वर के निर्देशों पर विश्वास और उनका पालन जीवन के बचाव के लिए प्रमुख है।
  2. पुनर्निर्माण का संकेत – प्रत्येक जीव के जोड़े की सुरक्षा से पहचानी जाने वाली पुनःस्थापना की आशा बनती है; इस तरह उद्धार एक नये आरम्भ की प्रतीक बनता है।
  3. कर्म के अनुसार संरक्षण – परमेश्वर के निर्देशों के पालन से जीव-जन्तु सुरक्षित रहे। यह संकेत देता है कि वह विश्व के हर भाग के जीवन की परवाह करते हैं और संचालन में क्रम बनाये रखते हैं।

संबद्ध पाठ

यीशु के समय में परमेश्वर के उद्धारक काम की प्रकृति में इस प्रकार के “जोड़े” और “प्रवेश” की विचारधारा अद्भुत रूप से दोहराती है—यानी जिंदा रहने के लिए आवश्यकताओं का प्रबंधन। परंतु यहाँ प्राथमिक संदर्भ Noah के समय के प्रलय-कथा से है। अन्य संबंधित संदर्भ: a) परमेश्वर के भविष्य के उद्धार के संकेत, b) जीवों के जोड़ों के साथ नाव पर चढ़ना—प्रकृति के प्रति आस्था का प्रतीक, c) विश्व-योजना में सावधानीपूर्वक पालन की महत्ता।

व्यावहारिक विचार

आज के पाठक के लिए यह सिख how है कि प्रभु के दिशा-निर्देशों पर विश्वास कर के हम उलटफेर के मुश्किल समय में भी सुरक्षित रह सकते हैं। अपने जीवन के अंशों में पालन और योजना का संयोजन रखें—परामर्श, आस्था और दायित्व—ताकि आप भी आध्यात्मिक नवशुरुआत के भागीदार बन सकें।

संक्षिप्त समापन

उत्पत्ति 6:20 में हर प्रकार के जीवों के जोड़ों के साथ Noah की नाव में प्रवेश की व्यवस्था से यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर उद्धार-योजना को क्रमबद्ध और পরিচालित रूप से संचालित करते हैं, ताकि धरती पर जीवन फिर से पनपे। यह संदेश आज भी विश्वास, संरक्षण और पुनर्निर्माण की उम्मीद देता है।

Cross-references (संक्षिप्त विवरण)

  • उत्पत्ति 7:1 – परमेश्वर का Noah से कहना कि तू और तेरे घराने जैसा विश्वासियों के साथ नाव बनाकर जीवन बचाये। यह स्पष्ट करता है कि उद्धार का प्रगति क्रम बोझ नहीं, बल्कि श्रद्धा के साथ किया गया कर्तव्य है।
  • मत्ती 24:37-39 – पुरानी दुनिया के प्रवाह और नयी दुनिया के निर्माण के बीच सावधानी और सजगता की आवश्यकता पर जोर।
  • 1 पतरस 3:20 – जिन्होंने बपतिस्मा लिये और आजीवन विश्वास के साथ टिके रहे, उनके उद्धार का संकेत है।

टीका सार: परमेश्वर की योजना में पालन-आज्ञा और सुरक्षा का संयोजन है; Noah की कथा के भीतर यह सीखा जा सकता है कि आस्था और विश्वसनीय कदम मिलकर जीवन के लिए नयी शुरुआत बनाते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

उत्पत्ति 6:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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उत्पत्ति 2:19 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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और यहोवा परमेश्‍वर भूमि में से सब जाति के जंगली पशुओं, और आकाश के सब भाँति के पक्षियों को रचकर आदम के पास ले आया कि देखे, कि वह उनका क्या-क्या नाम रखता है; और जिस-जिस जीवित प्राणी का जो-जो नाम आदम ने रखा वही उसका नाम हो गया।

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उत्पत्ति 7:8 (HINIRV) »
शुद्ध, और अशुद्ध दोनों प्रकार के पशुओं में से, पक्षियों,

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फिर परमेश्‍वर ने कहा, “जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें।”

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