Old Testament
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तथ्यात्मक अर्थ (Meaning at a glance)
उत्पत्ति 6:7 में परमेश्वर कहता है कि वह मनुष्य और पृथ्वी पर बने सभी जीव-जन्तुओं को मिटा देगा, क्योंकि उन्होंने बुराई में वृद्धि कर ली है; परंतु यह चेतावनी एक गहरी नैतिक नई शुरुआत की दिशा भी दर्शाती है— creator की सृष्टि को बचाने की आवश्यकता और मनुष्य के पाप के परिणामों की गंभीर्ता का संकेत।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पंथी-परिस्थिति में, सभ्यता की उन्नति के साथ पाप-व्यवहार का विस्तार बढ़ गया। पृथ्वी पर हिंसा और अधर्म इतना बढ़ गया कि परमेश्वर ने पृथ्वी को डुबो देने की योजना की ओर इशारा किया। परमेश्वर का यह निर्णय न्यायसंगत लगता है क्योंकि हर दिशा में बुराई फैल रही थी और मानवीय पाप की जड़ें गहरी हो गई थीं।
व्याख्यात्मक विचार (Interpretive observations)
छोटी थीम-वाले बिंदु
अन्य प्रासंगिक बाइबल संदर्भ (Cross-references) और उनका संक्षिप्त उल्लेख
1) category: यशाय 34:2-4 के समानती संदेश—ईश्वर की क्रोध और न्याय के साथ उद्धार की आशा भी जुड़ी है; यह संकेत करता है कि कृतियों के साथ परमेश्वर की मर्मिनता और न्याय एक साथ चलते हैं।
2) category: संदर्भ 2 पतरस 3:6-7—पृथ्वी और जीवन पर अगला नया आरम्भ एक न्याय-पूर्वक परिशीलन से जुड़ा है; पाप के कारण ही विनाश आते हैं, परन्तु दया-संयोजन भी है।
3) category: मत्ती 24:37-39—मानव-युग की अव्यवस्था और दिन-रात का असामान्य समन्वय, पर विश्वासियों के लिए जागरण की आवश्यकता।
उद्धरण-सार (Quoted insights from public-domain commentators)
Adam Clarke: “God’s sorrow at sin is not a mere emotion, but a calculated judgment that exposes the depths of human corruption and the necessity of purification.”
Albert Barnes: “Divine sorrow here is antecedent to wrath; God signals a moral alarm and prepares a righteous remnant for preservation.”
Matthew Henry: “The omitting of mercy in judgment would be cruelty; yet mercy will provide means of salvation through obedience and faith.”
सूत्र-चेतावनियाँ: नीचे दिए गए उद्धरण उद्धृत हैं; यदि किसी वाक्य का पूरा पाठ दिया गया हो, वही प्रस्तुत है।
संकेतिक निष्कर्ष (Practical takeaway)
हम सीखते हैं कि परमेश्वर की चेतावनियाँ और दया-योजना एक साथ चलती हैं। आज के संदर्भ में यह विचार सुगम बनाता है कि समुदाय और व्यक्तिगत जीवन में saiafty और নैतिक उत्तरदायित्व महत्वपूर्ण हैं; पाप के निरोध के लिए धार्मिक और सामाजिक सुधार आवश्यक है।
संक्षिप्त अंतर्वस्तु
उत्पत्ति 6:7 एक चेतावनी-युक्त उद्घोषणा है जो बताती है कि पाप के कारण विनाश संभव है, परन्तु परमेश्वर हर समय एक नई शुरुआत देने के लिए तैयार रहते हैं—जो विश्वास और पथप्रदर्शन से संभव है.