रोमियों 3:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि व्यवस्था के कामों* से कोई प्राणी उसके सामने धर्मी नहीं ठहरेगा, इसलिए कि व्यवस्था के द्वारा पाप की पहचान होती है। (भज. 143:2)

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रोमियों 3:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 3:20 - वास्तव में न्याय के लिए व्यवस्था के काम केवल प्रतिस्थापन नहीं देते

सीधी-सीधी बातें: व्यवस्था के कर्मों से कोई व्यक्ति धर्मी नहीं ठहरता; क्योंकि पाप की पहचान और दायरे का मूल्य वही है जो व्यवस्था दिखाती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

रोमियों के अध्याय 1–3 में पौलुस यह बताते हैं कि सभी लोग—यहूदियों और गैर-यहूदियों—पाप के कारण दोषी ठहरते हैं। अध्याय 3:20 में विशेष बात यह है कि व्यवस्था अपने आप में धर्मी ठहराने का आधार नहीं बनती। वही व्यवस्था, जो पापकर्म के बारे में स्पष्ट चेतावनी देती है, इसका सही उपयोग “पाप की पहचान” करना है ताकि मनुष्यों को साक्षात्कार और उद्धार के लिए आकर्षित किया जा सके। यह पद भजन 143:2 की उद्धृत प्रेरणा देता है: न मैं अपनी धारणा से धर्मी ठहरूँ, न मैं दूसरों के साथ तुलनात्मक मानक से।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • व्यवस्था की भूमिका— व्यवस्था पाप की सतह पर झलक दिखाती है और पाप की पहचान कराती है; पर वह अपने आप धर्मी ठहराने का आधार नहीं है।
  • धर्म का स्रोत—धर्मी ठहरना ईश्वर की कृपा, विश्वास और उद्धार की कृपा से मुमकिन है, न कि नियमों केकर्म से।
  • प्रेरणा—पाँचितिक निष्कर्ष यह है कि मनुष्यों को असाधारण ईमानदारी, विनम्रता और उद्धार की आवश्यकता है, ताकि वे दाय के अनुसार登録 न हो कर ईश्वर के उद्धार के कारण धर्मी ठहरें।

मुख्य विचारों का छोटा संकलन

  1. व्यवस्था से धर्मी ठहरना संभव नहीं।
  2. पाप की पहचान व्यवस्था से स्पष्ट होती है, ताकि उद्धार की आवश्यकता उजागर हो।
  3. उद्धार केवल विश्वास और कृपा से मिलता है, न कि कर्म से।

अनुक्रमित क्रॉस-रेफरेंसेज

1) गलातियों 2:16 — ईश्वर के तरीके से सच्चा धर्म उन परिणामों पर निर्भर करता है जो उद्धारकर्ता यीशु मसीह से आते हैं; व्यवस्था स्वयं उद्धार नहीं है।

2) रोमियों 1:17 — पवित्र शास्त्र में धर्म की धारणा “विश्चार” से जुड़ी है, जो विश्वास के द्वारा प्राप्य है, न कि कर्मों से।

3) रोम 10:4 — मसीह में पुरस्कार है: व्यवस्था के अनुसार नहीं, बल्कि न्याय के लिए विश्वास के द्वारा।

स्पष्ट एक-दो सादे निष्कर्ष

- धार्मिकता का आधार कृपा और विश्वास है, न कि कानून-अनुष्ठान।

- पाप की सच्ची पहचान से मनुष्य उद्धार की आवश्यकता को समझता है, और वह प्रभु के बिना संभव नहीं।

संश्लेषित निष्कर्ष

भारी संदेश यह है कि व्यवस्था पाप की पहचान कराती है पर वह धर्मी ठहराने का साधन नहीं है। हमारी सुरक्षा और धर्मत्व का स्रोत यीशु मसीह में है, जिन्हें विश्वास से हम धर्मी ठहराए जाते हैं। इस तथ्य को समझना जीवन में परिवर्तन लाने वाला है: हृदय परिवर्तन, न कि बाहरी कर्मों पर निर्भरता।

नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरणों का अपेक्षित संदर्भ उपलब्ध होने पर ही विशेष वाक्यों के रूप में इस्तेमाल किया गया है। ऊपर के विवेचन में इन विचारों को संदर्भित भावनात्मक सार के अनुरूप एकीकृत किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 3:20 समानांतर पद और संबंधित वचन

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गलातियों 2:16 (HINIRV) »
तो भी यह जानकर कि मनुष्य व्यवस्था के कामों से नहीं, पर केवल यीशु मसीह पर विश्वास करने के द्वारा धर्मी ठहरता है, हमने आप भी मसीह यीशु पर विश्वास किया, कि हम व्यवस्था के कामों से नहीं पर मसीह पर विश्वास करने से धर्मी ठहरें; इसलिए कि व्यवस्था के कामों से कोई प्राणी धर्मी न ठहरेगा। (रोम. 3:20-22, फिलि. 3:9)

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रोमियों 3:28 (HINIRV) »
इसलिए हम इस परिणाम पर पहुँचते हैं, कि मनुष्य व्यवस्था के कामों के बिना विश्वास के द्वारा धर्मी ठहरता है।

प्रेरितों के काम 13:39 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रेरितों के काम 13:39 (HINIRV) »
और जिन बातों से तुम मूसा की व्यवस्था के द्वारा निर्दोष नहीं ठहर सकते थे, उन्हीं सबसे हर एक विश्वास करनेवाला उसके द्वारा निर्दोष ठहरता है।

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