Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 3:1 रोमियों 3:2 रोमियों 3:3 रोमियों 3:4 रोमियों 3:5 रोमियों 3:6 रोमियों 3:7 रोमियों 3:8 रोमियों 3:9 रोमियों 3:10 रोमियों 3:11 रोमियों 3:12 रोमियों 3:13 रोमियों 3:14 रोमियों 3:15 रोमियों 3:16 रोमियों 3:17 रोमियों 3:18 रोमियों 3:19 रोमियों 3:20 रोमियों 3:21 रोमियों 3:22 रोमियों 3:23 रोमियों 3:24 रोमियों 3:25 रोमियों 3:26 रोमियों 3:27 रोमियों 3:28 रोमियों 3:29 रोमियों 3:30 रोमियों 3:31



मुख्य व्याख्या: सभी άνθρωποι पाप के अधीन
रोमियों 3:9 का ये उद्घोष हमें यह बताता है कि मनुष्य के भीतर नैतिक स्थिति में किसी भी जाति-क्षेत्र का भेद नहीं रहता: सभी के सभी पाप के वश में हैं। लेखक स्पष्ट करते हैं कि यहूदियों और यूनानियों के बीच कोई नैतिक उच्च स्थिति नहीं है; सभी फलस्वरूप एक ही दोष-संहिता में समेटे हुए हैं। यह निरपेक्ष स्थिति एपिस्टल के तात्पर्य को स्थापित करती है कि धर्मी-नहीं बल्कि पाप पर न्याय की आवश्यकता है।
पाठ-संदेश के साहित्यिक संदर्भ
पाठ के साहित्यिक मंच पर रोमियों-V5–सारगर्भित तत्त्वों से जुड़ती है। पॉल ने पहले यह दिखाने की कोशिश की कि धर्म-यथार्थ की कसौटी में जाति-भेद नहीं माना जाता; सभी ने पाप किया है, जिसमें समुदाय चाहे वह यहूदी हो या यूनानी। यह पंक्ति रोमियों 3:9-12 के व्यापक तर्क का भाग है, जो बताता है कि सभी ने पाप किया है और सभी के लिए एक कानूनी अपराध के समान स्थिति है।
वैचारिक महत्त्व
इस वाक्य से यह निष्कर्ष निकलता है कि ईश्वर की पवित्रता के सम्मुख मानव की स्व-धारणा नहीं टिकती। परमेश्वर के सामने समान अपराध-संयम के कारण, शास्त्र-युक्ति इस बात पर जोर देती है कि उद्धार केवल चहेते और कृपापात्र कारण से आता है—यानी विश्वास पर निर्भर। यह भी संकेत करता है कि पाप की सार्वभौमिकता मानवीय स्थिति को समान बनाती है, ताकि सभी को दया और उद्धार की समान मांग मिले।
अन्यशास्त्रीय पथ-प्रदर्शक (Cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि पाप की वास्तविकता मानव-जाति के सभी भागों में समान है, इसलिए उद्धार का संदेश भी समान और सार्वभौमिक है।
जीवंत चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 3:9 यह स्पष्ट करता है कि सभी लोग पाप के अधीन हैं—यद्यपि यहूदियों और यूनानी—ताकि उद्धार की आवश्यकता और उसकी समान पहुँच सभी के लिए हो। परमेश्वर की पवित्रता के सामने किसी का न्याय-संसार में ऊँच-नीच नहीं टिकता; केवल विश्वास के द्वारा उद्धार संभव है।
सीधी उद्धरण (पब्लिक डोमेन से सम्बद्ध)
Adam Clarke और Albert Barnes के विवेचनों से यह निष्कर्ष उजागर होता है: धर्म-यथार्थ में सबकी बराबरी और पाप की सार्वभौमिकता; तथा उद्धार की आवश्यकता केवल क्रिस्ट के चरणों पर आकर समर्थ होती है।
नोट: नीचे किसी एक विशेष वाक्य को हूबहू उद्धृत किया गया है—हमें इसे टेक्स्ट में नहीं दोहराते; पर अन्य टिप्पणीकारों के समान विचारधाराओं के सार को संकलित किया गया है।