Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
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रोमियों 3:11 का अर्थ और संदर्भ
पद का मूल विचार यह है कि परमेश्वर की खोज में मानव नैतिकता और सिद्धि असफल रहती है। रोमियों की पुस्तके पवित्रता के नियमों और उद्धार की आवश्यकता पर केंद्रित है; यहाँ प्रेरित पॉल बताता है कि सभी मनुष्य में शारीरिक एवं आध्यात्मिक रूप से परमेश्वर की खोज के लिए आवश्यक प्रवृत्ति नहीं है। यह पद पूर्ववर्ती तर्क के साथ जुड़ा है जिसमें दिखाया गया है कि सभी ने पाप के कारण परमेश्वर के मार्ग से भटकते हुए अपनी धुरी खो दी है।
मुख्य अर्थ
इस वाक्य में कहा गया है कि “कोई समझदार नहीं; कोई परमेश्वर को खोजनेवाला नहीं”—यह एक खरेपन में नहीं कि सभी लोग वास्तविक ढंग से खोज नहीं करते, बल्कि यह बताता है कि नैतिकता के दिखावे के विपरीत, भीतर से परमेश्वर की खोज का प्रबल इच्छा सभी में नहीं है। यह निष्कर्ष सीधे पूर्ण उद्धार के आवश्यकता पर उभरता है: यदि सब लोग खोज नहीं करते, तो परमेश्वर की कृपा के बिना उद्धार संभव नहीं।
दो प्रमुख थीम
संबद्ध ग्रंथ लिंक्स
इतिहासिक-आध्यात्मिक विवेचना
पुस्तक-चक्र के भीतर पॉल यह दर्शाते हैं कि असमानताओं के बावजूद परमेश्वर की कृपा मानव धर्म की कमी के ऊपर है। टिका हुआ मत यह है कि नहीं, स्वयं की क्षमताओं से आप परमेश्वर को नहीं खोज पाते; यह केवल नया जन्म और यीशु मसीह के माध्यम से संभव है।
वास्तविक अनुप्रयोग
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 3:11 यह स्पष्ट कर देता है कि मानव-स्वभाव रूप से परमेश्वर की खोज में पूरी तरह सक्षम नहीं है; उद्धार के लिए परमेश्वर की कृपा और प्रेरणा अनिवार्य है। यह पाठ हमें नि:स्वार्थ आचरण और आंतरिक परिवर्तन की आवश्यकता की याद दिलाता है, ताकि हम सचमुच परमेश्वर के सामने योग्य बनें।
नोट और उद्धरण-तत्व
नीचे दिये गए उद्धरण सार्वजनिक डोमेन टिप्पणीकारों के हैं, ताकि पाठक को गहन परिप्रेक्ष्य मिल सके, परन्तु यहाँ उनका संक्षिप्त सार और आधुनिक हिंदी संदर्भ एक साथ प्रस्तुत है:
Matthew Henry के संक्षिप्त निष्कर्ष: “The natural man cannot seek God, nor desire Him, until God works in him.”
Albert Barnes के विचार: “Man’s inability is not in outward zeal or form, but in inward need of regeneration; therefore God must reveal Himself.”
Adam Clarke का संकलन: “Where there is no light from above, there is no true searching after God in the heart.”
ये उद्धरण केवल सारतः हैं और विस्तृत पाठों के लिए पाठ-गृह देखें।