तीतुस 3:3 बाइबल पद की व्याख्या
तीतुस 3:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि हम भी पहले, निर्बुद्धि और आज्ञा न माननेवाले, और भ्रम में पड़े हुए, और विभिन्न प्रकार की अभिलाषाओं और सुख-विलास के दासत्व में थे, और बैर-भाव, और डाह करने में जीवन निर्वाह करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे।
तीतुस 3:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
तीतुस 3:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 6:9 (HINIRV) »
क्या तुम नहीं जानते, कि अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे? धोखा न खाओ, न वेश्यागामी, न मूर्तिपूजक, न परस्त्रीगामी, न लुच्चे, न पुरुषगामी।


तीतुस 3:3 का पृष्ठभूमि एवं समझ
पद हमारे सामने एक स्मरण दिलाता है कि पुरानी अवस्था में जीवन कैसे था, जब लोग न तो प्रभु के नेतृत्त्व के अनुरूप थे और न ही एक दूसरे के प्रति शुद्ध व्यवहार दिखाते थे। यह पंक्ति तीतोस के लिए प्रेरक नहीं, बल्कि चेतावनी भी है कि विश्वास में प्रवेश करने के बाद भी हमारी पुरानी प्रवृत्तियाँ कहाँ तक पीछे नहीं हटतीं।
पद का अर्थ-दर्शक विवरण
यह दिखाता है कि पाप की अवस्था कितनी गहरी थी: निर्बुद्धि, आज्ञा-न मानना, भ्रम, अभिलाषाओं के दासत्व, सुख-विलास के लोभ। साथ ही बैर, डाह, घृणा—ये सभी मन के उन अवरोधों को दिखाते हैं जो शुद्ध नई बनावट के साथ कटकर नहीं रहते। यह तस्वीर उद्धारपूर्व हमारे खतरा-चिह्नों को उजागर करती है, ताकि परमेश्वर के भक्त अपनी स्थिति को स्पष्ट पहचान सकें और उसके अनुग्रह को अनुभव कर सकें।
प्रमुख शब्दों और छवियों की व्याख्या
Related cross-वचनों का संक्षिप्त संकेत
ये विचार नए जीवन की दिशा में संकेत देते हैं:
इन संदर्भों से समझ आता है कि नया जीवन परमेश्वर की कृपा से शुरू होता है, और पहले की निर्बुद्धि से मुक्त होकर सचेत धर्मी चरित्र ग्रहण करना आवश्यक है।
पूर्व-प्रेरणा और ईश्वरीय कृपा
तीतुस 3:3-के पूर्व वाले जीवन में, एक व्यक्ति अपने आप में नहीं बदल सकता; परंतु परमेश्वर का अनुग्रह उसे नया बना सकता है। आधुनिक जीवन में भी लोग अपनी कमज़ोरियों के साथ उलझते हैं—परमेश्वर के उद्धार से ही संतोष, शांति और सामंजस्य संभव होता है।
आज के पाठ के लिए अनुप्रयोग
संक्षेप निष्कर्ष
यह दृष्य हमें बताता है कि उद्धार से पहले हमारा जीवन भ्रष्ट था, पर उद्धारक की कृपा से परिवर्तन की राह खुलती है। पवित्र आत्मा हमें नए-जीवन का आह्वान देती है—न कि पुराने अंधकार के फेर में फँसे रहने के लिए।
नोट: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट उद्धरणों के छोटे स्पष्ट दावों के रूप में प्रयुक्त विचारों का समेकित सार नीचे दिया गया है। यदि उपलब्ध हो, तो ये मौलिक टिप्पणीकारों के छोटे स्पष्ट वाक्य उद्धृत हैं:
Matthew Henry: "We were utterly lost in darkness, and by grace we are saved."
Albert Barnes: "Before kindness of God appeared, we walked in error and folly."
Adam Clarke: "The manifold iniquities of the natural man are here enumerated to show the necessity of regeneration."