तीतुस 3:10 बाइबल पद की व्याख्या
तीतुस 3:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
किसी पाखण्डी को एक दो बार समझा बुझाकर उससे अलग रह।
तीतुस 3:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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तीतुस 3:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 16:17 (HINIRV) »
अब हे भाइयों, मैं तुम से विनती करता हूँ, कि जो लोग उस शिक्षा के विपरीत जो तुम ने पाई है, फूट डालने, और ठोकर खिलाने का कारण होते हैं, उनसे सावधान रहो; और उनसे दूर रहो।

2 यूहन्ना 1:10 (HINIRV) »
यदि कोई तुम्हारे पास आए, और यही शिक्षा न दे, उसे न तो घर में आने दो, और न नमस्कार करो।

मत्ती 18:15 (HINIRV) »
“यदि तेरा भाई तेरे विरुद्ध अपराध करे, तो जा और अकेले में बातचीत करके उसे समझा; यदि वह तेरी सुने तो तूने अपने भाई को पा लिया।
तीतुस 3:10 पर टिप्पणी
यह संदेश असली चाल-चलन से जुड़ा है: जब किसी ने बार-बार समझाने के बाद भी भागना नहीं सुधरता, तब आवश्यक दूरी रखना ही हितकर होता है। भूमि-रूढ़ी या पाखण्डी से बार-बार समझाने की कोशिश करना समय और धैर्य की मांग है, पर यदि वह दो बार से अधिक न सुधरे, तो उससे अलग रहना समुदाय के लिए सुरक्षा और सच्ची चिकित्सा का मार्ग है। लेखन इस बात पर प्रकट करता है कि ईसाई समुदाय के भीतर अनुशासन आवश्यक है ताकि विश्वसनीयता और शुद्धता बनी रहे।
मुख्य अर्थ
पद में एक मार्गदर्शक निर्देश दिया गया है— किसी ऐसे पाखण्डी या असत्यचर्तन व्यक्ति को जिसे बार-बार चेतावनी दी जा चुकी है, उससे दूरी बना ली जाए। यह दूरी केवल अस्थायी नहीं है, बल्कि समुदाय के लिए एक सावधानीपूर्ण उपाय है ताकि गलत मार्ग से दूसरों की आस्था प्रभावित न हो और विवेकशीलता बनी रहे।
दो-तीन प्रमुख विषय
सीधे संदर्भित विचार और पारिवारिक संदेश
सीधे तौर पर पुराने टिप्पणीकारों के विचारों से प्रेरणा मिलती है कि एक बार चेताने के बाद भी अगर सुधार नहीं होता, तो दूरी अपनाना ईमानदारी और कलह-रहित समुदाय के हित में है। डॉ. Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सारगर्भित संकेतों में दिखे हैं कि क्रिया-व्यवहार के असत्य-अनुशासन से बहाव नहीं रोका जा सकता; संतुलन बनाए रखना चाहिए।
अनुष्ठानिक और क्रॉस-रेफरेंसेस
1) तीतुस 1:13-14 — विश्वासयोग्य कार्यों के साथ शिक्षण का संयम; गलत सोच से दूरी बनाकर सच्चे शिक्षण को बनाए रखना।
2) मत्ती 18:15-17 — यदि मित्र के विरुद्ध गलत बात हो, तो चरणबद्ध सुधार और जब तक परिणाम न आये, मार्गदर्शन का क्रम।
3) याकूब 5:19-20 — ऐसे लोगों के कारण बहुधा समुदाय धर्म के मार्ग से भटकता है; सम्हाल कर रखना अनिवार्य।
व्यावहारिक विचार
- जब भी किसी व्यक्ति के पथ में दो बार चेतावनी मिले और परिवर्तन नहीं हो, तो समुदाय-सेवा में उचित दूरी की योजना बनाएं ताकि अन्य विश्वासियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
- आलोचनात्मक लेकिन प्रेमपूर्ण नियम: नये विश्वासियों को सूचित करें कि यह निर्णय समुदाय के संरक्षण के लिए लिया गया है, न कि व्यक्तिगत पक्षपात का परिणाम।
संक्षेप
तीतुस 3:10 दो बार समझाने के बाद भी पाखण्डी से दूरी रखना एक बोल्ड, परिशुद्ध मार्ग है ताकि विश्वास समुदाय में सत्य और पवित्रता बनी रहे। यह कदम प्रेम और शुभचिंतन के साथ लिया जाना चाहिए ताकि ईमानदार जीवन की दिशा सतत बनी रहे।