रोमियों 3:26 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वरन् इसी समय उसकी धार्मिकता प्रगट हो कि जिससे वह आप ही धर्मी ठहरे, और जो यीशु पर विश्वास करे, उसका भी धर्मी ठहरानेवाला हो।

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रोमियों 3:26 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 3:26 पर नज़रिया: धर्मी ठहराव की धार्मिकता का प्रगटन

पंक्ति का केंद्र यह बताती है कि परमेश्वर अपनी धार्मिकता को समय-समय पर प्रकट करते हैं, ताकि लोग यह जानें कि धर्मी कौन है और किसके आधार पर धर्मी ठहराए जाते हैं। यहाँ यीशु के विश्वास से जुड़ी धार्मिकता का खुलासा होता है: जो यीशु पर विश्वास करता है, उसे भी धर्मी ठहरानेवाला हो जाता है। यह वाक्य मुख्यतः यह दर्शाता है कि ईश्वर के उद्धार के नियम में धर्मी ठहरना व्यक्ति की उपलब्धियों के कारण नहीं, बल्कि उसकी आस्था के द्वारा है।

पाठ के भीतर संरचना और संदर्भ

यह पद रोमियों के पत्र के तृतीय अध्याय में आता है, जहां प्रेरित पॉल बतलाते हैं कि सभी मानव, जुआर, यहूदी और गिन, पाप के कारण अस्थिर हैं और सत्ता के विरुद्ध खड़े रहते हैं। फिर भी ईश्वर की धार्मिकता उद्धार के मार्ग का केंद्र है, जिसे प्रकट किया गया है ताकि धर्मीत्व केवल कानून-पालन से नहीं, बल्कि विश्वास से ठहराए जाएँ।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • : परमेश्वर अपनी न्याय-सत्ता को प्रकट करते हैं—कब? और कैसे? जब वह अपने उद्धार-योजना को पूरा करते हैं, जिसमें यीशु क्रूस पर विश्वास के साथ उत्तराधिकारी बनते हैं।
  • : जो यीशु में विश्वास करता है, उसे धर्मी ठहरानेवाला हो जाता है; यह आस्था परमेश्वर के धन्यवाद और क्रूस-आधारित उद्धार को मान्य करती है।

हमें क्या सीखना है?

पहुँच यह है: ईश्वर की धार्मिकता केवल किसी प्रकार के कर्म-योग से नहीं, बल्कि यीशु पर विश्वास से सापेक्ष है। जीवन में असामान्य तनावों के बीच भी ईश्वर स्वयं को ऐसे प्रमाणित करते हैं कि उनकी धार्मिकता सच्ची है और सभी लोगों के लिए उद्धार का मार्ग खुला है। इसका प्रभाव यह है कि नम्रता, आस्था और जीवित विश्वास-जीवन की मांग बढ़ती है—न कि आत्म-गौरव।

अनुशासनात्मक अनुप्रयोग

  1. अपनी धार्मिकता को न मापा जाए कानून-पालन से, बल्कि यीशु पर विश्वास के प्रकाश में मापा जाए।
  2. যिस प्रकार से भगवान समय-समय पर अपने धर्मीत्व को प्रकट करते हैं, उसी प्रकार अपने जीवन में भी ईश्वर की योजना को समर्पण से स्वीकारें।

क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप)

1) रोमियों 1:17— विश्वास से धर्मी ठहरना एक पदचिह्न के रूप में प्रारम्भ होता है; यह “नियम और मामले” से परे आस्था का प्रवेश है।

2) रोमियों 5:1— विश्वास के कारण शांति मिलती है; धर्मी ठहरना आस्था-नाते से जुड़ता है, जिससे उद्धारित जीवन शुरू होता है।

3) इब्रानियों 11:6— विश्वास के बिना ईश्वर को प्रसन्न करना संभव नहीं; आस्था ही धर्मी ठहराने का मापदंड है।

योजित संदर्भ-उद्धरण

यहाँ उपलब्ध सार्वजनिक-डायरी टिप्पणीकारों के संकल्प से प्रेरित विचार मिलते हैं कि भगवान अपने इत्यम-कृत्यों के द्वारा धर्मीत्व को प्रकट करते हैं और विश्वास के द्वारा इसे मानते हैं। नीचे कुछ संक्षिप्त निष्कर्ष दिए जाते हैं:

मैथ्यू हेनरी के अनुसार: “किए गए कर्मों से धर्म ठहरना संभव नहीं; यह विश्वास के द्वारा होता है।” (संक्षेपित सार)

एल्बर्ट बार्न्स के अनुसार: “धर्मी ठहरना एक कार्य नहीं, एक स्थिति है जो ईश्वर के कृपापात्र विश्वास से बनती है।”

एडम क्लार्क के अनुसार: “धर्मिता की परख न तो बाहरीकृत कानून से, न भौतिक सफलता से है, बल्कि यीशु के विश्वास के साथ संबद्धता से है।”

संक्षिप्त निष्कर्ष

रोमियों 3:26 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की धार्मिकता पूरी चतुर्थ भागों में प्रकट होती है: उसकी पवित्र न्याय, उद्धार-योजना, और विश्वास के आधार पर धर्मी ठहराव। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि भगवान का न्याय और दया एक साथ काम करते हैं—और वह यह कि यीशु में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति धर्मी ठहराया जा सकता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 3:26 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“वह चट्टान है, उसका काम खरा है*; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा परमेश्‍वर है, उसमें कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है। (रोमी. 9:14)

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सपन्याह 3:5 (HINIRV) »
यहोवा जो उसके बीच में है, वह धर्मी है, वह कुटिलता न करेगा; वह अपना न्याय प्रति भोर प्रगट करता है और चूकता नहीं; परन्तु कुटिल जन को लज्जा आती ही नहीं।

प्रेरितों के काम 13:38 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
प्रेरितों के काम 13:38 (HINIRV) »
इसलिए, हे भाइयों; तुम जान लो कि यीशु के द्वारा पापों की क्षमा का समाचार तुम्हें दिया जाता है।

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