Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 3:1 रोमियों 3:2 रोमियों 3:3 रोमियों 3:4 रोमियों 3:5 रोमियों 3:6 रोमियों 3:7 रोमियों 3:8 रोमियों 3:9 रोमियों 3:10 रोमियों 3:11 रोमियों 3:12 रोमियों 3:13 रोमियों 3:14 रोमियों 3:15 रोमियों 3:16 रोमियों 3:17 रोमियों 3:18 रोमियों 3:19 रोमियों 3:20 रोमियों 3:21 रोमियों 3:22 रोमियों 3:23 रोमियों 3:24 रोमियों 3:25 रोमियों 3:26 रोमियों 3:27 रोमियों 3:28 रोमियों 3:29 रोमियों 3:30 रोमियों 3:31



रोमियों 3:8 पराठी-आलोचना (HINIRV)
यह पद.roRomans 3:8 में पवित्रशास्त्र के संदर्भ को स्पष्ट करता है कि दोषारोपण और निंदात्मक आलोचना मानव इतिहास में बुराई के विरुद्ध कौन सा उद्देश्य है। प्रेरित पौलुस इस एकदम स्पष्ट प्रश्न पर चर्चा करते हैं: यदि हम बुराई करें ताकि भलाई निकले, या लोग हमारा तुक बनाकर यही कहें, तो क्या वह उचित है? नहीं, यह विचारधारा दुष्टता को बढ़ाती है और ईश्वर की योजना के विरुद्ध है।
पाठ के भीतर स्थिति और करता-जानकारी
रोमियों के अध्याय 3 में पौलुस ने सभी लोगों की दया-हीनता और पाप को दिखाते हुए एक समग्र निष्कर्ष दिया है: सभी ने ईश्वर के सम्मुख चूक की है। इस संदर्भ में 3:8 एक तर्क के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसे कुछ लोग गलत ढंग से यह मान लेते हैं कि अगर हमारी बुराई से भलाई निकलती है तो वह ठीक है। लेकिन लेखक स्पष्ट करते हैं कि यह बात स्पष्टरूप से अस्वीकार्य है, और ऐसे लोग गलत व्याख्या के दोष में ही रहते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
पवित्र-उद्धरण से मिलान
यहाँ से एकात्मता में उद्धृत भागों से मिली प्रेरणा यह है कि पाप को छुपाने या जोड-तोड़ के माध्यम से भलाई प्राप्त करने की आशा असत्य है। चर्चित टिप्पणीकारों ने इसे निम्न प्रकार समझाया है:
मैथ्यू हेन्री (अंश): "क्योंकि दुष्टता के साथ भलाई निकलने की धारणा नमूद की गयी है, वह एक अवनति है" — यह उद्धरण केवल संक्षेप है और पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं है।
एल्बर्ट बर्न्स (अंश): "जो लोग बुराई से भलाई की उम्मीद लगाते हैं, वे ईमानदारी से नहीं रहते; यह विचार ईश्वर के विरुद्ध है" — यह एक संक्षेप है।
एडम क्लार्क (अंश): "भलाई के लाभ पर बुराई का प्रयोग, नैतिक तानाशाही की रीढ़ है" — यह भी संक्षेप-वाक्य है।
पठन-योजनाएं और क्रॉस-रेफरेंसेज़
यह पाठ अन्यत्र शास्त्रों के साथ एक नैतिक-नीति का संकेत देता है:
इन क्रॉस-रेफरेंसों से यह सिद्ध होता है कि भलाई को बढ़ावा देना मात्र पाप से पनपता है; यह ईश्वरीय कार्यक्रम के अनुरूप नहीं है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
छोटा निष्कर्ष
पौलुस का संदेश स्पष्ट है: हमें भलाई पाने के लिए किसी भी तरीके की नैतिक ढील नहीं देनी चाहिए। पाप को रोके बिना भलाई की अपेक्षा करना ही अस्वीकृत है; ईश्वर की व्यवस्था स्वतः सत्य है, और हमारा उत्तर सच्चे मन से ईश्वर की महिमा को केंद्र में रखकर जीना है।
संरक्षित उद्धरणों का उल्लेख ऊपर दिया गया है। यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के छोटे-से उद्धरणों को देखना चाहें, तो वे इस पाठ के तात्पर्य को दोहराते हुए स्पष्ट करते हैं कि भलाई के लिए पाप को वैध ठहराना गलत है और यह विचार वास्तव में दायित्वपूर्ण नैतिकता के विरुद्ध है।