रोमियों 3:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“हम क्यों बुराई न करें कि भलाई निकले*?” जैसा हम पर यही दोष लगाया भी जाता है, और कुछ कहते हैं कि इनका यही कहना है। परन्तु ऐसों का दोषी ठहराना ठीक है।

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रोमियों 3:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

रोमियों 3:8 पराठी-आलोचना (HINIRV)

यह पद.roRomans 3:8 में पवित्रशास्त्र के संदर्भ को स्पष्ट करता है कि दोषारोपण और निंदात्मक आलोचना मानव इतिहास में बुराई के विरुद्ध कौन सा उद्देश्य है। प्रेरित पौलुस इस एकदम स्पष्ट प्रश्न पर चर्चा करते हैं: यदि हम बुराई करें ताकि भलाई निकले, या लोग हमारा तुक बनाकर यही कहें, तो क्या वह उचित है? नहीं, यह विचारधारा दुष्टता को बढ़ाती है और ईश्वर की योजना के विरुद्ध है।

पाठ के भीतर स्थिति और करता-जानकारी

रोमियों के अध्याय 3 में पौलुस ने सभी लोगों की दया-हीनता और पाप को दिखाते हुए एक समग्र निष्कर्ष दिया है: सभी ने ईश्वर के सम्मुख चूक की है। इस संदर्भ में 3:8 एक तर्क के रूप में प्रस्तुत किया गया है जिसे कुछ लोग गलत ढंग से यह मान लेते हैं कि अगर हमारी बुराई से भलाई निकलती है तो वह ठीक है। लेकिन लेखक स्पष्ट करते हैं कि यह बात स्पष्टरूप से अस्वीकार्य है, और ऐसे लोग गलत व्याख्या के दोष में ही रहते हैं।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

  • ईश्वर के सभी आगमन के अनुसार स्वयं-स्वीकृत पाप हीनता को ढाँढ़ते हैं; उदाहरणस्वरूप मित्र-रचना के बजाय हमारी आयी भलाई के लिए हमें प्रेरित नहीं किया जा सकता।
  • कठोर नैतिकता का परिणाम यह है कि मनुष्यों को जो कुछ मिल रहा है, वह उनकी गलत समझ के कारण है और इसे यूं ही स्वीकार कर लेना उचित नहीं है।

पवित्र-उद्धरण से मिलान

यहाँ से एकात्मता में उद्धृत भागों से मिली प्रेरणा यह है कि पाप को छुपाने या जोड-तोड़ के माध्यम से भलाई प्राप्त करने की आशा असत्य है। चर्चित टिप्पणीकारों ने इसे निम्न प्रकार समझाया है:

मैथ्यू हेन्री (अंश): "क्योंकि दुष्टता के साथ भलाई निकलने की धारणा नमूद की गयी है, वह एक अवनति है" — यह उद्धरण केवल संक्षेप है और पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं है।

एल्बर्ट बर्न्स (अंश): "जो लोग बुराई से भलाई की उम्मीद लगाते हैं, वे ईमानदारी से नहीं रहते; यह विचार ईश्वर के विरुद्ध है" — यह एक संक्षेप है।

एडम क्लार्क (अंश): "भलाई के लाभ पर बुराई का प्रयोग, नैतिक तानाशाही की रीढ़ है" — यह भी संक्षेप-वाक्य है।

पठन-योजनाएं और क्रॉस-रेफरेंसेज़

यह पाठ अन्यत्र शास्त्रों के साथ एक नैतिक-नीति का संकेत देता है:

  • Rom 6:1-2 — क्या हम पर दोष लगाते हैं कि हम अनुदानित पाप से बढ़ावा दें? नहीं; मरच्ध, हमने पुराने शरीर के साथ संबंध खो दिया है।
  • गलातियों 6:7 — जो आप बोएंगे वही काटेंगे; भलाई से नहीं, पर अपराध से जुड़ी नीतियों से नहीं।

इन क्रॉस-रेफरेंसों से यह सिद्ध होता है कि भलाई को बढ़ावा देना मात्र पाप से पनपता है; यह ईश्वरीय कार्यक्रम के अनुरूप नहीं है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  1. सामाजिक-नैतिकता में त्रुटि न करें: हमारी कल्पना न करें कि भलाई पाने के लिए पाप को स्वीकार करना उचित है।
  2. आत्मिक सतर्कता बनाए रखें: किसी भी आत्म-धोखे को रोकने के लिए, खुद की सरहद और ईश्वर की महिमा को सर्वोपरि समझें।

छोटा निष्कर्ष

पौलुस का संदेश स्पष्ट है: हमें भलाई पाने के लिए किसी भी तरीके की नैतिक ढील नहीं देनी चाहिए। पाप को रोके बिना भलाई की अपेक्षा करना ही अस्वीकृत है; ईश्वर की व्यवस्था स्वतः सत्य है, और हमारा उत्तर सच्चे मन से ईश्वर की महिमा को केंद्र में रखकर जीना है।

संरक्षित उद्धरणों का उल्लेख ऊपर दिया गया है। यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के छोटे-से उद्धरणों को देखना चाहें, तो वे इस पाठ के तात्पर्य को दोहराते हुए स्पष्ट करते हैं कि भलाई के लिए पाप को वैध ठहराना गलत है और यह विचार वास्तव में दायित्वपूर्ण नैतिकता के विरुद्ध है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

रोमियों 3:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें कि अनुग्रह बहुत हो?

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तो क्या हुआ? क्या हम इसलिए पाप करें कि हम व्यवस्था के अधीन नहीं वरन् अनुग्रह के अधीन हैं? कदापि नहीं!

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तो हम क्या कहें? क्या व्यवस्था पाप है*? कदापि नहीं! वरन् बिना व्यवस्था के मैं पाप को नहीं पहचानता व्यवस्था यदि न कहती, “लालच मत कर” तो मैं लालच को न जानता। (रोम. 3:20)

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