Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 3:1 रोमियों 3:2 रोमियों 3:3 रोमियों 3:4 रोमियों 3:5 रोमियों 3:6 रोमियों 3:7 रोमियों 3:8 रोमियों 3:9 रोमियों 3:10 रोमियों 3:11 रोमियों 3:12 रोमियों 3:13 रोमियों 3:14 रोमियों 3:15 रोमियों 3:16 रोमियों 3:17 रोमियों 3:18 रोमियों 3:19 रोमियों 3:20 रोमियों 3:21 रोमियों 3:22 रोमियों 3:23 रोमियों 3:24 रोमियों 3:25 रोमियों 3:26 रोमियों 3:27 रोमियों 3:28 रोमियों 3:29 रोमियों 3:30 रोमियों 3:31



रोमियों 3:18 परिदृश्य और संदेश
पवित्रशास्त्र के इस अंश में हम देखते हैं कि परमेश्वर के भय की कमी मानव जीवन के भीतर अंधकार लाती है। रोमियों 3:18 यह कहता है कि वे जिनके सामने परमेश्वर का भय नहीं, उनके मन में ईश्वर की महिमा नहीं दिखाई देती। यह कथन भजन 36:1 जैसे टेक्स्ट के साथ संगति बनाता है और यह बताता है कि ईमानदारी और आस्था के बिना मनुष्य सचमुच ईश्वर-जीवन के मार्ग से भटक जाता है।
ईश्वर के भय और विश्वास की रोशनी
इस वचन के अनुसार परमेश्वर का भय केवल भयग्रस्तता नहीं है, बल्कि यह प्रतिष्ठित पथ पर चलने का आंतरिक प्रेरक है। जब हम परमेश्वर के लिए सम्मान और आदर के साथ जीते हैं, तब मन में सत्य और नैतिकता का कॉन्ट्रैक्शन बनता है; यह भय नया जीवन, चंचलता से मुक्त, और क्षमा-पछतर अनुभवों की दिशा देता है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
यहाँ “भय” का तात्पर्य एक विनम्र, सब कुछ जानते—पर परमेश्वर के न्याय और करुणा के प्रति जागरूक(receiver) जीवन से है।
संबंधित पवित्रग्रंथ
- भजं 36:1 में निंदित जीवन के भीतर परमेश्वर के भय की कमी के कारण नैतिक पतन दिखाया गया है; यह प्रेरित करता है कि मनुष्यों को ईश्वर के नियमों का सम्मान करना चाहिए।
- रु 1:18 में परमेश्वर की प्रजा के भीतर धर्म और नीति के महत्व पर प्रकाश डालता है कि निन्दा के बिना आस्था कितनी अधूरी है।
- यूह 1:12-13 में प्रभु यीशु में विश्वास रखने वालों के लिए आशीष और जीवित पथ का मार्ग मिलता है, जो भय के बजाय आस्था को मजबूत करता है।
अनुवादक-आउटलाइन (HINIRV) से संबद्ध संकेत
यह पाठ आधुनिक हिन्दी-आवृत्ति के अनुवाद में परमेश्वर के भय के साथ विश्वास-जीवन का संयोजन प्रस्तुत करता है: जो परमेश्वर का भय मानते हैं, वे ईश्वरीय तरीकों के अनुसार चलते हैं और जीवन के हर पहलू में सत्य की राह पकड़ते हैं।
प्राकृतिक पठन-प्रयोग (आज के जीवन में)
1) नैतिक निर्णयों के समय परमेश्वर के भय को स्मरण रखें—छोटे निर्णयों में भी ईमानदारी और पवित्रता की परीक्षा हो सकती है।
2) जब समस्याओं में निराशा हो, तब आत्म-स्वयं का मूल्यांकन करें: क्या हम परमेश्वर के हर मार्ग को स्वीकारना चाहेंगे? अगर नहीं, तो क्यों?
3) उद्धार की आशा और नैतिक आचरण एक साथ चलते हैं; विश्वास को deeds से प्रदर्शित करें ताकि जीवन में वास्तविक परिवर्तन आये।
छोटी संदर्भ सूची
उद्धरण-टिप्पणी: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से संगत विचारों के संक्षिप्त सार इस तरह मिलते हैं: परमेश्वर का भय वह आधार है जिस पर सुसमाचार की सुगंध और आस्तिक जीवन का निर्माण होता है; यह भय निष्कपट वचन-पालन और नैतिक आचरण को प्रेरित करता है।