Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 3:1 रोमियों 3:2 रोमियों 3:3 रोमियों 3:4 रोमियों 3:5 रोमियों 3:6 रोमियों 3:7 रोमियों 3:8 रोमियों 3:9 रोमियों 3:10 रोमियों 3:11 रोमियों 3:12 रोमियों 3:13 रोमियों 3:14 रोमियों 3:15 रोमियों 3:16 रोमियों 3:17 रोमियों 3:18 रोमियों 3:19 रोमियों 3:20 रोमियों 3:21 रोमियों 3:22 रोमियों 3:23 रोमियों 3:24 रोमियों 3:25 रोमियों 3:26 रोमियों 3:27 रोमियों 3:28 रोमियों 3:29 रोमियों 3:30 रोमियों 3:31



रोमियों 3:7 का पाठ—प्रकटन और गूढ़ार्थ
इस पद में पवित्र शास्त्रीय कथन उस परिशोधित तर्क की ओर इशारा करता है जो परमेश्वर की न्याय-योजना के भीतर झूठ और दया का संबंध समझाती है। पौलूस यहाँ अपनी वाक-युक्ति का एक प्रभावशाली उद्धरण प्रस्तुत करते हैं: अगर मेरे झूठ के कारण परमेश्वर की सच्चाई उसकी महिमा के लिये अधिक करके प्रगट हुई, तो फिर मैं दण्ड के योग्य कैसे ठहराऊँ? यह विचार हमें विश्वास, दया और परमेश्वर के न्याय के संतुलन के गहरे मुद्दों की ओर ले जाता है।
पद्य का भूमिका-परिप्रेक्ष्य
रोमियों का लेखन शुरू में यह स्पष्ट करता है कि सभी मनुष्य चूकते हैं और परमेश्वर की महिमा से वंचित रहते हैं (रोम 3:23). इस पंक्ति में प्रेरित Paul स्पष्ट करते हैं कि दोनो प्रकार के दोस—व्यक्ति के अपने बुरे व्यवहार और मानव स्वभाव की प्रकृति—परमेश्वर के न्याय के सामने खड़े होते हैं। यहाँ “झूठ” और “सच्चाई” शब्द रूपक के रूप में प्रयुक्त होते हैं ताकि दिखाया जा सके कि कैसे परमेश्वर की सच्चाई और उसकी महिमा कभी पतित नहीं होतीं, भले ही मानव असत्य या ठोस दोष का प्रदर्शन करें।
मुख्य शिक्षण
इस वाक्य का मूल आशय यह है: परमेश्वर की सत्यता उसकी महिमा में और अधिक उजागर होती है, जब वह अपनी दया और न्याय को दिखाता है—यह साफ़ संकेत देता है कि दया और न्याय एक साथ कैसे सन्तुलित रहते हैं। यदि मान लिया जाए कि मेरे पाप के कारण परमेश्वर की सच्चाई और महिमा उभरती है, तब भी यह उद्धार के मार्ग में हमारे लिए आंतरिक रूप से ईमानदारी और संदेह से ऊपर उठकर विश्वास की आदत बनाता है। यह दृष्टिकोण वास्तविक परिवर्तन औरप्रेमपूर्ण भक्ति की प्रेरणा देता है, न कि नैतिक असफलताओं के कारण बनती निराशा की।
अनुवृत्ति-दृष्टिकोण: अन्य शास्त्रीय टिप्पणीकार
यहाँ कुछ विचार जिनकी परंपरागत व्याख्या भी मिलती हैं:
आरोह-चक्र के अनुसार क्रॉस-रेफरेंस
इन संदर्भों से जुड़ाव समझाते हैं कि पाप और दया के रिश्ते कैसे दृश्य होते हैं:
व्यावहारिक अनुप्रयोग
यह पद हमें निम्न विचार देता है:
छोटे-से-छोटा निष्कर्ष
रोमियों 3:7 यह स्मरण देता है कि परमेश्वर की महिमा कभी कम नहीं होती, भले ही मानव अवस्था में त्रुटियाँ और झूठ स्थित हों। इस तथ्य से प्रेरित होकर हमें अपने विश्वास को मजबूत करना चाहिए—न केवल पाप से मुक्त रहने के लिए, बल्कि परमेश्वर की संयमित न्याय और उसकी असीम दया की महिमा को देखने के लिए भी।
मुख्य विचार: परमेश्वर की सच्चाई और महिमा एक साथ स्थिर रहते हैं; हमारा उत्तर केवल विश्वास और भक्ति है।