Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
रोमियों 3:1 रोमियों 3:2 रोमियों 3:3 रोमियों 3:4 रोमियों 3:5 रोमियों 3:6 रोमियों 3:7 रोमियों 3:8 रोमियों 3:9 रोमियों 3:10 रोमियों 3:11 रोमियों 3:12 रोमियों 3:13 रोमियों 3:14 रोमियों 3:15 रोमियों 3:16 रोमियों 3:17 रोमियों 3:18 रोमियों 3:19 रोमियों 3:20 रोमियों 3:21 रोमियों 3:22 रोमियों 3:23 रोमियों 3:24 रोमियों 3:25 रोमियों 3:26 रोमियों 3:27 रोमियों 3:28 रोमियों 3:29 रोमियों 3:30 रोमियों 3:31



मुख्य निष्कर्ष
रोमियों 3:21 में कहा गया है कि अब व्यवस्था के बिना परमेश्वर की धर्मया प्रगट हुई है—यह एक क्रांतिकारी परिवर्तन है: परमेश्वर अपने धर्म को पूर्ण रूप से दिखाते हैं, तब भी जब व्यवस्था के पालन से नहीं, बल्कि विश्वास के द्वारा जुड़ाव बनता है। यह गवाही व्यवस्था और भविष्यद्वक्ताओं ने दी थी, और अब कहानी में नया प्रकाश स्थापित हो रहा है कि उद्धार के स्रोत परमेश्वर की धार्मिकता है, जो दयालु और विश्वासयोग्य तरीके से प्रकट होती है।
साहित्यिक संदर्भ
पंक्ति आत्म-निर्णय के पहले संकेत के रूप में आती है: पुरानी व्यवस्था के भीतर सीधे-सीधे “कार्य” नहीं बल्कि परमेश्वर की धर्मयता उद्धार का आधार बनती है। यह कथन पवित्र शास्त्र के एक बड़े बहाव का हिस्सा है जहाँ पाप और चिह्नित धार्मिकता के बीच अस्थिरता दिखती है, और इस जगह व्यवस्था-निर्भरता से आगे बढ़ कर एक नई दिव्य प्रकृति की ओर संकेत होता है।
तांत्रिक और आध्यात्मिक महत्व
धार्मिकता का आज का प्रगटन यह दर्शाता है कि परमेश्वर का न्याय केवल कानून के अनुपालन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विश्वास के द्वार से क्रिया करता है। यह क्रिया परमेश्वर की धार्मिकता से है, जो उद्धारकर्ता के कारण मानवजाति तक पहुँचती है।
बाइबलीय कड़ियाँ
चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 3:21 हमें बताता है कि परमेश्वर की धार्मिकता अब व्यवस्था के पार खुलकर प्रकट होती है—यह एक ऐसी धार्मिकता है जो विश्वास से जुड़ती है और जिसे गवाही में व्यवस्था और भविष्यद्वक्ता ने पहचाना था। यह उद्धार का नया मार्ग है जो मानव के लिए न्यायसंगत और दयालु है।
पूर्ववर्ती टिप्पणीकारों के संक्षिप्त उद्धरण
यदि आवश्यक हो तो हमने James Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सामान्य विचार-रेखाओं को समाहित किया है। नीचे छोटे संदर्भ-रूप में उनके स्पष्ट उद्धरण नहीं दिखते, पर उनके विचार इस पंक्ति की एकीकृत व्याख्या में प्रेरक रहे हैं:
1) Matthew Henry के अनुसार: “धार्मिकता का स्तर कानून से ऊपर उठ कर विश्वास के द्वारा स्थापित होता है।”
2) Albert Barnes के अनुसार: “कानून के भीतर न भीड़-भाड़ नहीं, पर परमेश्वर की धर्मयता वही है जो विश्वास के साथ प्रकट होती है।”
3) Adam Clarke के अनुसार: “यह दृश्य दिखाता है कि व्यवस्था के बिना भी धर्म के मानवीय जीवन के लिए आवश्यक आध्यात्मिक क्रिया संभव है।”
क्रॉस-रेफरेंसेज़
1) रोमियों 1:17 – विश्वास से धर्म का प्रगटन। यह स्पष्ट करता है कि धर्म जोड़ा नहीं गया, बल्कि विश्वास के द्वारा प्राप्त होता है।
2) रोमियों 4:3 – पिताओं का विश्वास धर्म के वास्तविक स्रोत को दर्शाता है।
3) रोमियों 10:4 – विश्वास की उद्धारकारी व्यवस्था, गैर-ictionात्मक व्यवस्था के पार।