Old Testament
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सपन्याह 3:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा जो उसके बीच में है, वह धर्मी है, वह कुटिलता न करेगा; वह अपना न्याय प्रति भोर प्रगट करता है और चूकता नहीं; परन्तु कुटिल जन को लज्जा आती ही नहीं।
सपन्याह 3:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 3:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 32:4 (HINIRV) »
“वह चट्टान है, उसका काम खरा है*; और उसकी सारी गति न्याय की है। वह सच्चा परमेश्वर है, उसमें कुटिलता नहीं, वह धर्मी और सीधा है। (रोमी. 9:14)

भजन संहिता 145:17 (HINIRV) »
यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करुणामय है*। (प्रका. 15:3, प्रका. 16:5)

पाठ का परिचय — संक्षिप्त अवलोकन
सपन्याह 3:5 में भविष्यदेशक यहोवा के न्याय और धर्मशीलता की पुष्टि करता है। यह वचन इस बात पर जोर देता है कि परमेश्वर अपने नगर—यहोशू (यहोवः के बीच में रहने वाले लोग) के साथ धर्मी है; वह कुटिलता न करेगा, प्रातः-प्रातः अपना न्याय प्रगट करेगा और न पीछे हटेगा। परन्तु उस कुटिल और दुष्ट का क्रम लज्जित रहेगा। यह वचन आशा और चेतावनी दोनों देता है—परमेश्वर का चरित्र स्थिर है और दुष्टता अंततः छिप नहीं सकती।
अध्याय के संदर्भ में यह पद
सपन्याह अध्याय 3 में यरूशलेम की निन्दा, उसकी अनेक विफलताओं और फिर सुधार की भविष्यवाणी है। अध्याय की पृष्ठभूमि में नगर के धार्मिक और सामाजिक पतन का चित्र है, परन्तु साथ ही चेतावनी, दंड और आश्वासन भी मिलता है। 3:5 उस आश्वासन का केन्द्र है: जबकि लोग भ्रष्ट हुए हैं, परन्तु यहोवा स्वयं धर्मी है और सत्य के साथ काम करेगा।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
मुख्य शिक्षा यह है कि परमेश्वर का न्याय निश्चित और समयपरक है; वह कुटिलता से ग्रस्त नहीं होता। यह विश्वासियों को भरोसा और धैर्य सिखाता है—वह जनता के साथ ईमानदारी से पेश आता है और दुष्टता का पर्दाफाश करेगा। साथ ही यह चेतावनी भी देता है कि दुष्टता को शर्मसार होना ही है।
संबंधित शास्त्रीय उद्धरण और टिप्पणियाँ
मैथ्यू हेनरी के संक्षिप्त विचार इस धारणा का समर्थन करते हैं कि परमेश्वर का न्याय मर्मज्ञ और अपरिवर्तनीय है; यदि उद्धरण दिया जाए तो उसकी भाषा में कहा गया है कि "परमेश्वर की चालें सत्य और कूटनीति से परे हैं"—यहाँ केवल एक संक्षिप्त उद्धरण उद्धृत करना प्रासंगिक है। (नोट: यदि उद्धरण प्रयुक्त किया गया है तो वही संक्षिप्त वाक्य उपयोग में लाया गया है।)
अन्य बोलियों से तुलना (क्रॉस-रिफरेंस)
व्यावहारिक अनुप्रयोग
यह वचन हमें तीन प्रकार से प्रभावित करता है:
संक्षिप्त समाप्ति—एकीकृत सार
सपन्याह 3:5 हमें यह दर्शाता है कि परमेश्वर का चरित्र धर्मी और अपरिवर्तनीय है; वह कुटिलता में न पड़ता है और न्याय को समय पर प्रगट करता है। यह वचन विश्वासियों को आश्वस्त करता है कि असत्य और दुष्टता स्थायी नहीं रहती, और दुष्टों को अन्ततः लज्जा उठानी होगी। इसलिए हम ईमानदारी, धैर्य और आशा के साथ जीवन जीएँ, यह जानते हुए कि हमारा परमेश्वर सत्य का रक्षक और न्याय का पालनकर्ता है।