Old Testament
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सपन्याह 3:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“जो लोग नियत पर्वों में सम्मिलित न होने के कारण खेदित रहते हैं, उनको मैं इकट्ठा करूँगा, क्योंकि वे तेरे हैं; और उसकी नामधराई उनको बोझ जान पड़ती है।
सपन्याह 3:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 3:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 42:2 (HINIRV) »
जीविते परमेश्वर, हाँ परमेश्वर, का मैं प्यासा हूँ, मैं कब जाकर परमेश्वर को अपना मुँह दिखाऊँगा? (भज. 63:1, प्रका. 22:4)

विलापगीत 2:6 (HINIRV) »
उसने अपना मण्डप बारी के मचान के समान अचानक गिरा दिया, अपने मिलाप-स्थान को उसने नाश किया है; यहोवा ने सिय्योन में नियत पर्व और विश्रामदिन दोनों को भुला दिया है, और अपने भड़के हुए कोप से राजा और याजक दोनों का तिरस्कार किया है।

विलापगीत 1:4 (HINIRV) »
सिय्योन के मार्ग विलाप कर रहे हैं, क्योंकि नियत पर्वों में कोई नहीं आता है; उसके सब फाटक सुनसान पड़े हैं, उसके याजक कराहते हैं; उसकी कुमारियाँ शोकित हैं, और वह आप कठिन दुःख भोग रही है।
प्रस्तावना: पनत्व और उद्धार की योजना का संकेत (सपन्याह 3:18)
यह पदचिन्ह स्पष्ट करता है कि ईश्वर औचित्यपूर्ण रूप से निष्ठावान उपासक की चिंता करते हैं और उन समुदायों को एकत्रित करना चाहते हैं जो उत्सवों में भाग लेने से वंचित रहने के कारण हृदयहीन होकर खेदित रहते हैं। भविष्यवाणी के इस हिस्से में पाप के कारण अलग-थलग पड़े लोगों के लिए ईश्वर की ममता और पुनःजोड़ने की योजना दिखाई देती है।
गर्भित सेटिंग और टेक्स्ट का अर्थ
इस वचन में परमेश्वर उन लोगों की वास्तविक स्थिति बताता है जो भेदभाव या सामाजिक-धार्मिक बाधाओं के कारण त्योहारों में सम्मिलित नहीं होते। वे अपने-अपने आंतरिक संघर्ष के कारण बोझ महसूस कर रहे हैं; "नामधराई" (उसकी पहचान) उनके लिए एक भार बन चुकी है। इस संदर्भ में ईश्वर का उद्देश्य है—उनको एक बार फिर से अधिकारपूर्वक एक साथ लाना, ताकि वे अपनी पहचान और उद्देश्य को परिभाषित करें और उसकी गाथा में भागीदारी प्राप्त करें।
ईश्वर की दृष्टि और विश्वास के गुण
पद यह बताता है कि ईश्वर न सिर्फ व्यवस्था-पालन पर ध्यान देता है, बल्कि दिल की स्थिति पर भी गहराई से देखता है। उनका समाहित करना, उन्हें exercer करना और शारीरिक उपस्थिति से अधिक, आंतरिक परिवर्तन पर बल है। आत्म-खेद और रोड़े बन चुके उपासना-प्रतीक भी उनके प्रेम के दायरे में आते हैं; वह उनका उद्धार चाहें, भले ही वे तात्कालिक सम्मिलन से किनारे रहे हों।
महत्वपूर्ण शब्द और छवियाँ
- नियत पर्वों में सम्मिलित न होना: यह त्योहारों-उत्सव के सामाजिक-धार्मिक चक्र से बाहर रहने की स्थिति है; इससे समुदाय में अकेलापन या असहयोग की अनुभूति उत्पन्न हो सकती है।
- खेदित रहते हैं: आंतरिक दुःख, पश्चात्ताप या अपराध-बोध जो आत्म-संयम और प्रभु-आशीर्वाद के बीच दूरी बनाते हैं।
- उसकी नामधराई: परमेश्वर के साथ पहचान और सामाजिक-धर्म तात्विकता; यह नाम और आचरण दोनों से जुड़ा है।
अन्य संदर्भों से पुष्टियाँ
वर्तमान जीवन में आवेदन
- समुदाय से आत्म-व्यक्ति-विकराल भावना के बीच संतुलन बनाएं: त्योहारों और समुदाय-उत्साह में भाग लेने के साथ भी, अपने दिल को ईश्वर के सामने सजग रखें ताकि नामधारा से जुड़ना सहज रहे।
- चर्चा-धर्म की बजाय दिल की उद्धार-प्रार्थना: यदि आप उपासना-आयोजन में किसी कारण से दूरी अनुभव करते हैं, तो प्रभु के साथ सीधी उम्मीद और क्षमा-प्रीम की प्राथना करें।
- सच्चे विश्वास की पुनःस्थापना: अपनी पहचानी गई भूमिका—जो कि नाम के साथ जुड़ी है—का पुनर्निर्धारण करें; आप जैसे परमेश्वर के लोग, एक दूसरे के साथ पुनः जोड़े जाएँ और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करें।
सार निर्देश: संदेश का संक्षित सार
ईश्वर उन लोगों को नहीं छोड़ना चाहते जो त्योहारों के बीच दूरी बनाते हैं; बल्कि वे उन्हें एक बार फिर से एक साथ लाने, अपनी पहचान-भूमिका में स्थापित करने का उद्देश्य रखते हैं। यह उद्धार का दायरा है—समुदाय के भीतर से दिल की परिवर्तन और आस्था की प्रेरणा।
उद्धृत संयुक्त टिप्पणी (संक्षेप)
इस विषय पर मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क की सार्वजनिक-domain टिप्पणियाँ उभरे हुए हैं: वे दर्शाते हैं कि धार्मिक कर्मकांड के पीछे असल बात दिल की पवित्रता और समुदाय के साथ ईश्वर की आखों में एकीकृत होना है; उनका संदेश है—अपनी आंतरिक स्थिति बदलो ताकि बाह्य कर्म भी पूर्ण हों।
Cross-references के साथ संक्षिप्त संबंध: यह वचन दिल की पवित्रता, समुदाय-सम्बन्ध और धैर्यपूर्वक परमेश्वर के समय की प्रतीक्षा से जोड़ा जाता है, ताकि आज के पाठक अपने विश्वास-यात्रा में पुनः सचेत हो सकें।