Old Testament
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सपन्याह 3:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैंने कहा, “अब तू मेरा भय मानेगी, और मेरी ताड़ना अंगीकार करेगी जिससे उसका निवास-स्थान उस सब के अनुसार जो मैंने ठहराया था, नष्ट न हो। परन्तु वे सब प्रकार के बुरे-बुरे काम यत्न से करने लगे।”
सपन्याह 3:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 3:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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होशे 9:9 (HINIRV) »
वे गिबा के दिनों की भाँति अत्यन्त बिगड़े हैं; इसलिए वह उनके अधर्म की सुधि लेकर उनके पाप का दण्ड देगा।

यिर्मयाह 36:3 (HINIRV) »
क्या जाने यहूदा का घराना उस सारी विपत्ति का समाचार सुनकर जो मैं उन पर डालने की कल्पना कर रहा हूँ अपनी बुरी चाल से फिरे और मैं उनके अधर्म और पाप को क्षमा करूँ।”

यिर्मयाह 25:5 (HINIRV) »
कि 'अपनी-अपनी बुरी चाल और अपने-अपने बुरे कामों से फिरो*: तब जो देश यहोवा ने प्राचीनकाल में तुम्हारे पितरों को और तुमको भी सदा के लिये दिया है उस पर बसे रहने पाओगे; परन्तु तुमने न तो सुना और न कान लगाया है।
सपन्याह 3:7 — आदेश और असफलता का बोध
सीधे शब्दों में अर्थ: परमेश्वर कहता है कि वह बुद्धिमानी से न मानने और उसकी सज्जा-ताड़ना स्वीकार न करने पर यह घोषित करता है कि निवास-स्थान नष्ट होगा। फिर भी उनका लक्ष्य-कार्य शुभ नहीं रहा, और उन्होंने हर प्रकार के बुरे काम करने का प्रयत्न किया।
प्रसंग-भूमि
सपन्याह पुस्तक पंडित यहूदा के दिनों में यरूशलेम के निकट बुराइयों के विरुद्ध_warning देता है—धर्म-आचरण में निरन्तर पाप, अन्य देवताओं की आराधना, और सामाजिक अधर्म। इस संदर्भ में3:7 में प्रभु की चेतावनी और उसकी सजा का क्रम स्पष्ट है: चेतावनी मिलती है, फिर भी मानव अपने मार्ग पर अड़ाला रहता है, और परिणामस्वरूप उसका निवास स्थान नष्ट होता है।
व्याख्यात्मक नुक्ते
महत्त्वपूर्ण क्रॉस-रेफरेंस
1) नूह के समय चेतावनियाँ और आशीष-सीमा: प्रभु की चेतावनी के बावजूद लोगों का ढुलमुल व्यवहार; परिणामस्वर नाश।
2) यिर्मयाह के योगदान: न्याय के अग्नि-परिक्षण के बावजूद लौटकर धर्म अपनाने का आह्वान।
3) जब भी राष्ट्र पाप के बीच फँसता है, तब दया और सजा के संतुलन की आवश्यकता स्पष्ट होती है—कक्षा में समय रहते सुधार की संभावना बनी रहती है।
अन्वेषणीय निष्कर्ष
- भय और ताड़ना परमेश्वर के प्रेम-आचरण का भाग हैं ताकि लोगों के भीतर ईमानदारी और परिवर्तन आए।
- जब लोग बहकाव में रहते हैं, उनके निवास-स्थानों का ढांचा खतरे में पड़ता है; मौन-उद्धार नहीं, बल्कि सचेत कदम से पथ बदलना चाहिए।
संक्षिप्त व्यावहारिक उपदेश
सूत्रधर्मी चर्चा
भाषा-शैली में परमेश्वर का शक्तिशाली आग्रह स्पष्ट है: “अब तू मेरा भय मानेगी और मेरी ताड़ना अंगीकार करेगी”—यही वह मार्ग है जो निवास-स्थान को सुरक्षित रख सकता है।
टिप्पणी: नीचे के उद्धरण केवल पूर्व प्रकाशित प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के सार-निष्कर्ष हैं; मूल वाक्यों के संक्षेप हैं।
मैथ्यू हेनरी से: “जहाँ प्रभु अपनी धर्म-नियमों के अनुसार चेतावनी देता है, वहाँ पाप के रास्ते पर चलना सुरक्षित नहीं।”
एल्बर्ट बार्न्स से: “ताड़ना के समय में भी परमेश्वर की कृपा संभव है, यदि हृदय बदले और कदम उठाए जाएँ।”
एडम क्लार्क से: “नष्ट होने का डर तब तक रहता है, जब तक लोग अपने पापपूर्ण मार्ग से पलट नहीं आते।”
नोट: ऊपर के उद्धरण संक्षेपित हैं; पूरा पाठ नहीं दिया गया है।