Old Testament
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आमोस 6:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण सेनाओं के परमेश्वर यहोवा की यह वाणी है, “हे इस्राएल के घराने, देख, मैं तुम्हारे विरुद्ध एक ऐसी जाति खड़ी करूँगा, जो हमात की घाटी से लेकर अराबा की नदी तक तुमको संकट में डालेगी।”
आमोस 6:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 6:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 राजाओं 8:65 (HINIRV) »
अतः सुलैमान ने और उसके संग समस्त इस्राएल की एक बड़ी सभा ने जो हमात के प्रवेशद्वार से लेकर मिस्र के नाले तक के सब देशों से इकट्ठी हुई थी, दो सप्ताह तक अर्थात् चौदह दिन तक हमारे परमेश्वर यहोवा के सामने पर्व को माना।

2 राजाओं 14:25 (HINIRV) »
उसने इस्राएल की सीमा* हमात की घाटी से ले अराबा के ताल तक ज्यों का त्यों कर दी, जैसा कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने अमित्तै के पुत्र अपने दास गथेपेरवासी योना भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था।

यिर्मयाह 5:15 (HINIRV) »
यहोवा की यह वाणी है, हे इस्राएल के घराने, देख, मैं तुम्हारे विरुद्ध दूर से ऐसी जाति को चढ़ा लाऊँगा जो सामर्थी और प्राचीन है, उसकी भाषा तुम न समझोगे, और न यह जानोगे कि वे लोग क्या कह रहे हैं।
आमतः अर्थ: आमोस 6:14 — प्रभुत्वपूर्ण चेतावनी और आघात के समय की तैयारी
इस वाक्य का सीधा अर्थ है: परमेश्वर यहोवा यह घोषणा कर रहे हैं कि इस्राएल के विरुद्ध एक ऐसी力量 उठेगी जिसे हारना असंभव नहीं होगा—वह आक्रमण यातना से भरी होगी और इस्राएल को एक बड़े संकट में डाल देगी, जैसा कि इतिहास में यह वह समय था जब सेनाएँ और साम्राज्य एक दूसरे पर टूट पड़े थे। यह संदेश साधारणतः उन लोगों के लिए है जो अपने अभिमान और आत्म-निष्ठा में ठगे रहते थे और धार्मिक औचित्य के नाम पर आराम पसन्द करते थे।
पृष्ठभूमि – एक ऐतिहासिक संदर्भ यह है कि आमोस के समय उत्तर-यूनानी और मध्य-पूर्वी साम्राज्यों के दबाव में इस्राएल का भाग्य अस्थिर था। “हमात की घाटी” और “अराबा नदी” जैसी भूगोलिक विस्तृतियाँ इस दृश्य की छवि बनाती हैं: एक विस्तृत क्षेत्र में, युद्ध और विवशता के संकेत फैले हुए थे। यहोवा के दण्ड की चेतावनी इस बात की है कि अहंकारी व्यवस्था और लोक-उत्सव के पीछे से प्राकृतिक और राजनीतिक संकट उभरेंगे।
व्यাখ्याी सोच – इस वाणी में उचित और असफल दोनों का मिश्रण है: परमेश्वर न्यायी होने के साथ मोहभंग को भी नहीं छोड़ते। इस्राएल के घराने के भीतर की शांति-स्वार्थी जीवनशैली और सामाजिक अन्याय, पाप-स्वार्थ से भरे हुए कर्म—इन सभी पर यह वाणी मार्मिक चेतावनी देती है कि धार्मिक उपस्थिति भी यदि व्यवहारिक सत्य से पृथक हो जाए, तो वह भी विनाश का कारण बनती है।
मुख्य निष्कर्ष – - परमेश्वर की न्याय की सीमा पर जोर; - सुरक्षा-आशाओं के विपरीत संकट की वास्तविकता; - भ्रष्ट सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध चेतावनी और परिवर्तन की आवश्यकता।
संकेतित क्रॉस-रेफरेंसेस
पूर्वसूचना और व्याख्या – एक संक्षिप्त पंक्ति
यह दण्ड-उन्मुख चेतावनी इस बात की है कि धार्मिक अशुद्धता और सामाजिक अन्याय परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकते; नागरिक जीवन में नीतिगत बदलाव और नैतिक परिवर्तन अनिवार्य हैं।
व्यावहारिक takeaway
एतिहासिक टिप्पणी – इस पाठ के लिए प्रसिद्ध पादरी-हस्तलेखों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचार मिलते हैं जो यह दिखाते हैं कि धार्मिक आत्म-समझदारी और सामाजिक न्याय का संतुलन कितना आवश्यक है। Henry लिखते हैं कि यह चेतावनी समुदाय के पापों के परिणाम को स्पष्ट करती है; Barnes कहते हैं कि बाहरी रक्षा-सज्जा के पीछे आंतरिक भ्रष्टाचार ही सबसे बड़ा खतरा है; Clarke उद्धृत करते हैं कि यह दंड परमेश्वर की पवित्रता के साथ अन्याय के विरुद्ध है और उसका उद्देश्य भी आत्म-उद्धार की दिशा में है। इन विचारों से यह स्पष्ट है कि न केवल घटनात्मक संकट, बल्कि आंतरिक परिवर्तन भी अनिवार्य हैं।
यह संदेश याद दिलाता है कि inuia विश्वासियों के लिए सच्ची सुरक्षा दिल से नीतियों, न्याय-संगत व्यवहार और परमेश्वर के साथ निर्भरता में है।