Old Testament
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आमोस 6:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तुम ऐसी वस्तु के कारण आनन्द करते हो जो व्यर्थ है; और कहते हो, “क्या हम अपने ही यत्न से सामर्थी नहीं हो गए?”
आमोस 6:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 6:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 12:19 (HINIRV) »
‘और अपने प्राण से कहूँगा, कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह।’

यशायाह 28:14 (HINIRV) »
इस कारण हे ठट्ठा करनेवालों*, यरूशलेमवासी प्रजा के हाकिमों, यहोवा का वचन सुनो!

2 राजाओं 14:25 (HINIRV) »
उसने इस्राएल की सीमा* हमात की घाटी से ले अराबा के ताल तक ज्यों का त्यों कर दी, जैसा कि इस्राएल के परमेश्वर यहोवा ने अमित्तै के पुत्र अपने दास गथेपेरवासी योना भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था।
अमोस 6:13 पर नज़र: आराम और व्यर्थ की प्रसन्नता
यह पद उन लोगों की आत्म-तुष्टि को दर्शाता है जो अपने आराम और शारीरिक सुख-सुविधाओं में खो जाते हैं, जबकि नैतिक दायित्व और सत्य की सार्थकता पीछे छूट जाती है। अमोस की पुस्तक में यह एक स्पष्ट चेतावनी है कि लोगो का उल्लास और गौरव तब तक टिके रहते हैं जब तक वे वास्तविक दायित्वों, न्याय, और विनम्र सेवक-जीवन की माँग को मना नहीं लेते।
पद का पाठ और संदर्भ
वचन कहता है: “तुम ऐसी वस्तु के कारण आनन्द करते हो जो व्यर्थ है; और कहते हो, ‘क्या हम अपने ही यत्न से सामर्थी नहीं हो गए?’” यहाँ “आनन्द” से तात्पर्य उन साधनों, घटनाओं या सामाजिक स्थिति से है जिन पर लोग गर्व करते हैं—परिणामतः वे वास्तविक नैतिकता और ईश्वर-आशीर्वाद की दिशा से दूर चले जाते हैं। यह बात 6章 के आसपास की प्रवृत्ति को दर्शाती है: आर्थिक सम्पन्नता, शक्ति-गौरव, और धार्मिक रस्म-औपचारिकता के बीच एक भटकाव।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) आत्म-विभाजन बनाम ईश्वर के समर्पण: शब्दार्थ यह है कि लोग अपने यत्न से ही समर्थ होने के भ्रम में जीते हैं, परन्तु असल सामर्थ्य, यथार्थ सुरक्षा और प्रभाव का स्रोत ईश्वर की कृपा से ही है।
2) व्यर्थ के आनंद की चेतावनी: व्यावहारिक संपत्ति, सामाजिक स्थिति, और आराम के झूठे आनंद से नैतिक उत्तरदायित्व हट जाते हैं। ईश्वर के विरुद्ध अपने-अपने यत्नों को ऊँचा करना विनम्र जीवन को बाधित करता है।
पाँच नज़दीकी क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप)
व्यावहारिक आवेदन
अनुसंधान और मिलन (फ्यूज़न) — 3 दृष्टिकोण
जो लोग अमोस के संदेश को देखते हैं, वे यह बात समझते हैं कि सामाजिक सम्पन्नता के बावजूद ईश्वर के साथ जीवन-सार कौन है—यह पहचाना जाना चाहिए।
सार संक्षेप
अमोस 6:13 में यह चेतावनी है कि व्यर्थ मनोरंजन और यत्न-परिश्रम के कारण लोग ईश्वर-आशीर्वाद और अन्याय से परे चले जाते हैं। यदि हम अपनी शक्तियों को सही ढंग से देखें, तो ज्ञात होगा कि वास्तविक सामर्थ्य और सुरक्षा केवल परमेश्वर की कृपा में है। इसलिए जीवन की प्राथमिकता न्याय, इच्छा-शक्ति और सेवाभाव हो—तभी हमारा आनंद वास्तव में टिकेगा।
संकेत उद्धरण (सार): यदि आप या अन्य पठन-पथ Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट शब्दों के छोटे उद्धरण देखना चाहें, तो वे इस प्रकार का शब्द-समर्थन देते हैं: “व्यर्थ वस्तुओं का आनन्द वे देते हैं जो अंततः खामुखी और क्षणभंगुर है,” परंतु पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण का विशिष्ट उल्लेख यहाँ आवश्यक नहीं है।