Old Testament
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आमोस 6:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“तुम हाथी दाँत के पलंगों पर लेटते, और अपने-अपने बिछौने पर पाँव फैलाए सोते हो, और भेड़-बकरियों में से मेम्ने और गौशालाओं में से बछड़े खाते हो।
आमोस 6:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
आमोस 6:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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याकूब 5:5 (HINIRV) »
तुम पृथ्वी पर भोग-विलास में लगे रहे और बड़ा ही सुख भोगा; तुम ने इस वध के दिन के लिये अपने हृदय का पालन-पोषण करके मोटा ताजा किया।

आमोस 3:12 (HINIRV) »
यहोवा यह कहता है: “जिस भाँति चरवाहा सिंह के मुँह से दो टाँगें या कान का एक टुकड़ा छुड़ाता है, वैसे ही इस्राएली लोग, जो सामरिया में बिछौने के एक कोने या रेशमी गद्दी पर बैठा करते हैं, वे भी छुड़ाए जाएँगे।”

यहेजकेल 34:2 (HINIRV) »
“हे मनुष्य के सन्तान, इस्राएल के चरवाहों के विरुद्ध भविष्यद्वाणी करके उन चरवाहों से कह, परमेश्वर यहोवा यह कहता है: हाय इस्राएल के चरवाहों पर जो अपने-अपने पेट भरते हैं! क्या चरवाहों को भेड़-बकरियों का पेट न भरना चाहिए?
हिंडिती व्याख्या: आमोस 6:4 — आराम के ठाठ और न्याय के अनुरोध में दूरी
मुख्य interpretive point: आमोस 6:4 में इज़राइल के ऊँचे-आनंद में खोए लोग चारों ओर आराम, विलास और पालतू पशुओं के लिये उत्तम व्यवस्थाओं में मग्न हैं, परन्तु उनका आध्यात्मिक दृष्टिकोण शुष्क है। वे भुलक्कड़ता और सामाजिक असमानता के कारण ईश्वरीय न्याय के विरुद्ध चले जाते हैं; उनका शारीरिक आराम और प्रभु के सिद्धांतों के बीच असमानता स्पष्ट है।
पठनीय सन्दर्भ: साहित्यिक परिप्रेक्ष्य
आमोस की किताब प्रायः न्याय के मुद्दे पर केंद्रित है—यहोवा के वादों और चेतावनियों को सामाजिक व्यवहार के साथ जोड़ना। इस आयत में लेखक उन लोगों की बेपरवाही को चित्रित करता है जो आराम और ठाठ में जीते हैं, जबकि देश के भीतर आर्थिक शोषण और निष्क्रियता व्याप्त है। पंक्तियाँ लालित्य से थोड़ा कठोर कल्पना भी प्रस्तुत करती हैं: वे “हाथी दाँत के पलंगों पर लेटते” और “अपने-अपने बिछौने पर पाँव फैलाए सोते” हैं; उनके भोजन में मेम्ना और गौशालाओं से बछड़े आते हैं—यानी स्वार्थी लाभ और आराम के साधनों के साथ नागरिक कर्तव्य की अवहेलना।
आध्यात्मिक महत्त्व
प्रतीकात्मक रूप से पलंग और बिछौने आराम के प्रतीक हैं, परन्तु ये आराम न्याय से विमुख रहते हैं। यह संदेश बताता है कि धार्मिक आचरण की सतह पर आ बैठना पर्याप्त नहीं है जब वास्तविक जीवन में गरीबों के अधिकार और समुदाय के कल्याण के लिए कदम नहीं उठते। ईश्वर के संदेश में पवित्रता और न्याय एक साथ चलते हैं; तनावपूर्ण सामाजिक स्थितियाँ और दमनकारी व्यवहार परमेश्वर के विरुद्ध आवाज उठाते हैं।
पवित्र शास्त्र के साथ संबद्धता
इन क्रॉस-रेफरेंसेस में एक सूत्र स्पष्ट है: आराम यदि असमानताओं को बढ़ावा देता है, तो वह ईश्वर के इच्छित भय-कर्ता जीवन के विरुद्ध है।
पाठ के भीतर प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
आमोस 6:4 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर न्याय-सम्बन्धी चेतावनियाँ देता है, जब समाज में समरसता और करुणा की कमी हो। भौतिक आराम और दायित्व-उन्मुखता के बीच सन्तुलन बनना चाहिए: धार्मिक-आचरण वृद्धि तभी सफल होता है जब वह सामाजिक दायित्व और नैतिक व्यवहार के साथ प्रतिबद्धता प्राप्त करे।
उद्धृत टिप्पणियाँ (संदर्भित आंशिक उद्धरण)
एडम क्लार्क, मैथ्यू हेनरी और अल्बर्ट बार्न्स के सार्वजनिक-डायट टिप्पणीकारों से मिलती-जुलती ध्वनि इस आयत की व्याख्या में दिखाई देती है — किन्तु यहाँ पूर्ण उद्धरण का प्रयोग आवश्यक नहीं है; नीचे कुछ संक्षिप्त संकेत दिए गए हैं:
“धनी लोगों के ठाठ और आराम के बीच ईश्वर की आवाज़” की याद दिलाते हैं; उनकी भाषा में तत्वार्थ यह है कि ‘आर्थिक समृद्धि’ भी नैतिक समृद्धि नहीं बनाती जब सामाजिक दायित्व और न्याय का अभाव हो।
Cross-references सार
यिर्मयाह 22:15-16: साथ ही साथ न्यायपूर्ण व्यवहार, न केवल धन-सम्पदा की बात नहीं है, बल्कि आंतरिक धर्म का प्रमाण है।
यशायाह 58:7: बाहरी उपहार से अधिक आंतरिक परिवर्तन और करुणा-कार्य महत्वपूर्ण है।
आमोस के साहित्यिक ढांचे में न्याय और समाज-धर्म के प्रणालियों को मिलाकर प्रस्तुत किया गया है—ताकि पाठक यह समझ सकें कि ईश्वर की दृष्टि में वास्तविक शांति और समृद्धि तब है, जब कमजोरों के पक्ष में नीति और व्यवहार मिलकर चलते हैं।