Old Testament
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आमोस 6:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और कटोरों में से दाखमधु पीते, और उत्तम-उत्तम तेल लगाते हो, परन्तु यूसुफ पर आनेवाली विपत्ति का हाल सुनकर शोकित नहीं होते।
आमोस 6:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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आमोस 6:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 49:22 (HINIRV) »
यूसुफ बलवन्त लता की एक शाखा है, वह सोते के पास लगी हुई फलवन्त लता की एक शाखा है; उसकी डालियाँ दीवार पर से चढ़कर फैल जाती हैं।

उत्पत्ति 37:25 (HINIRV) »
तब वे रोटी खाने को बैठ गए; और आँखें उठाकर क्या देखा कि इश्माएलियों का एक दल ऊँटों पर सुगन्ध-द्रव्य, बलसान, और गन्धरस लादे हुए, गिलाद से मिस्र को चला जा रहा है।

उत्पत्ति 42:21 (HINIRV) »
उन्होंने आपस में कहा, “निःसन्देह हम अपने भाई के विषय में दोषी हैं, क्योंकि जब उसने हम से गिड़गिड़ाकर विनती की, तब भी हमने यह देखकर, कि उसका जीवन कैसे संकट में पड़ा है, उसकी न सुनी; इसी कारण हम भी अब इस संकट में पड़े हैं।”
आमोस 6:6 पर विवेचनात्मक संक्षेप
मुख्य interpretive बिंदु: इस पद में यह बतलाया गया है कि सामाजिक आडंबर और आराम के जीवन में लिप्त रहने वाले लोग, अपनी सुख-सुविधाओं और भौतिक आनंदों में मग्न रहते हैं, जबकि देश की विपत्ति—यूसुफ के समय से जुड़ी विपत्ति—उनके ध्यान से बाहर रहती है। प्रेषक Amos ऐसे लोगों की नैतिक असंगति पर तीखा प्रहार करते हैं: वे आह्वान के योग्य नहीं मानते और अन्ततः समाज के दुर्गुणों के कारण भाग्य के समान विपत्ति से चूक नहीं पाते।
पार्श्व-आलेख: साहित्यिक संदर्भ
यह पंक्ति Amos की उन आलोचनात्मक चिट्ठी-गुणों को दर्शाती है जहाँ पाखंड और आडंबर की आलोचना तीव्र होती है। उल्लेखित “कटोरों में दाखमधु” और “उत्तम-उत्तम तेल” विशाल वैभव और आराम का प्रतीक हैं, जो धार्मिक आचरण के साथ-साथ निजी सुख-सुविधाओं में लिप्तता को उजागर करते हैं। साथ ही “यूसुफ पर आनेवाली विपत्ति” एक ऐतिहासिक-परामर्शक संदर्भ है: मिस्र की घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में नैतिक जागरूकता की कमी को चिन्हित किया गया है।
थियॉलॉजिकल महत्व
इस verse में प्रायः चेतावनी दी जाती है कि धार्मिक आडंबर और सामाजिक लाभ-उपचार के बीच संतुलन भंग हो गया है। ईश्वर के साथ सत्य-संबंध बनाए रखना और सामाजिक-नैतिक दायित्वों का पालन करना अनिवार्य है। भौतिक सुख में लिप्त लोग अगर दीन-दुखी के प्रति संवेदनहीन रहते हैं, तो उन्हें दंड का भागीदार माना जाएगा—यह न्याय पर आधारित आह्वान है, न कि केवल शास्त्र-यथार्थ का वक्तव्य।
cross-references और उनका संक्षेप संबंध
संभावित संदर्भों का उद्देश्य पाठक को यह स्मरण कराना है कि सामाजिक-आर्थिक आराम के बावजूद न्याय और करुणा के मानक कैसे स्थिर रहते हैं।
आत्मिक सोच के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
आमोस 6:6 हमें चेतावनी देता है कि भौतिक सुख-समृद्धि के बीच नैतिकता की चिता ज्वलंत रहनी चाहिए। ईश्वर के विश्वासयोग्य लोग उनके विपरीत नहीं बन सकते—जो कटोरों के आनंद में लिप्त रहते हैं, वे यथार्थ न्याय और सामर्थ्य के लिए तैयार रहें। यह संदेश समाज के हर वर्ग के लिए है कि घटनाओं के समय में भी जागृत रहें और दयालु, न्यायप्रिय जीवन अपनाएं।
यह बात Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे प्रसिद्ध पब्लिक-डोमेन टीका-कर्ता के विविध दृष्टिकोणों से संगत बैठती है: वे उस प्रकार के ढांचे पर जोर देते हैं जिसमें वास्तविक भक्ति और सामाजिक उत्तरदायित्व एक साथ चलते हैं—वाह-भर में नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में।
कठोर, पर सटीक सलाह के रूप में מס: यह न सोचें कि धार्मिक आडंबर से छुटकारा मिलने पर ही आस्था पूर्ण होगी; अपितु आस्था का परीक्षण तब होता है जब हम जीवन की भौतिक समृद्धि के बीच समान अनुभुगति और दया दिखाते हैं।