Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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यशायाह 28:4 — तत्कालीन स्थिति का संकेत और परमेश्वर की दृष्टि
पद का आसन्न दृश्य इस समय के लोगों के लिए एक प्रतीकात्मक चिह्न है। अति उपजाऊ तराई के सिरे पर उगती, भड़कीली सूरत वाली वह फूल जैसी विशिष्टता जो इधर-उधर उछलकूद करती है, उससे अंजीर के पक कर गिरने की तेजी व्यक्त होती है। यह फूल-सी सुन्दरता, जो गर्मी से पहले पके अंजीर के समान है, ज्ञानपूर्वक बल्कि चेतावनी-पूर्ण है: जो कुछ अस्थायी, दिखावे से भरा और जल्द ही मुरझाने वाला है, वह क्षण भर में ही क्षीण हो सकता है। यह चिह्न गीत बनकर नहीं, बल्कि सचेत कर देता है कि वैभव और आत्म-विश्वास के ढोंगी स्वरूप कितने अस्थिर हैं।
ईश्वर के बारे में जो पाठ बताता है
यह शास्त्रीय तस्वीर हमें यह याद दिलाती है कि ईश्वर सत्य और स्थिर है, जबकि मानव-आकर्षण अस्थिर और क्षणभंगुर हो सकता है। देवता की दृष्टि में, तेज़ धारणा, धनी-दार्शनिकता या भव्य दिखावट—जो लोग मानते हैं—समय के साथ अपने वास्तविक मूल्य खो देती है। इसलिए भविष्यवाणी यह कहती है कि जो जोर-जुगलबंदी और चमक-धमक पर निर्भर है, वह जल्दी पलक झपकते ही दूर हो जाएगी। यह पाठ परमेश्वर की न्याय-साक्षरता और मानव प्रकृति की नाजुकता की एक चेतावनी है: वास्तविक सुरक्षा केवल ईश्वर पर निर्भरता से मिलती है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टीकरण
अन्य बाइबिल संदर्भ (संक्षिप्त cross-references)
1) रोमियों 12:2 जैसा विचार: बाहरी दिखावे की बजाय परिवर्तनशीलता, जोकि देव-परिप्रेक्ष्य में वास्तविक सत्य है—धार्मिक आत्म-चेतना के लिए आत्म-समर्पण आवश्यक है।
2) 1 नियम 8:6-7: दया और चेतना की स्थिरता, जो केवल परमेश्वर पर टिके रहने से मिलती है, मानव आचरण की अस्थिरता के विपरीत है।
3) इक़आदिस 40:8: पवित्रशास्त्र की स्थिरता के विरुद्ध अस्थिरता पर सच्चे विवेक की सुरक्षा का संकेत।
यथार्थ-जीवन में आवेदन
- इस पाठ से याद रखें कि सामाजिक या वस्तुवादी आभा कितनी भी चमकदार हो, कौन-सी स्थिति अस्थायी है, और कौन-सी स्थिर—यह ईश्वर के साथ संबंध पर निर्भर करता है।
- अपने मूल्यांकन में आत्म-उत्साह से अधिक, ईश्वर की सत्यान्वेषी शिक्षा और ईमानदार हृदय की खोज पर बल दें।
- कठिन समय में भी आशा रखें कि जो स्थिर है वही अचल है—परमेश्वर का सत्य और उसकी कृपा।
मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से संक्षेप निष्कर्ष
यह दृष्टिकोण उन पुरखों के विचार से मेल खाता है जो कहते हैं कि बाहरी शो-शHowdy के पीछे आंतरिक बदलाव आवश्यक है; सही सुरक्षा परमेश्वर के साथ संबंध में है, न कि विश्वसनीय दिखावे में। ध्यान दें कि उनके शब्दों में भी यह संकेत मिलता है कि मानवीय प्रशंसा और आत्म-गौरव क्षण भर के लिए टिके रहते हैं।
उद्धरण एकदम संक्षिप्त रूप में यदि आवश्यक हो, तो: "बाहरी शो से जीवन नहीं बदलता"—इस प्रकार के विचार इन पंक्तियों में सरल ढंग से आते हैं।