यशायाह 28:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्या वह उसको चौरस करके सौंफ को नहीं छितराता, जीरे को नहीं बखेरता और गेहूँ को पाँति-पाँति करके और जौ को उसके निज स्थान पर, और कठिये गेहूँ को खेत की छोर पर नहीं बोता?

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यशायाह 28:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 28:25 का संदर्भ और अर्थ

यह पाठ यशायाह की पवित्र भाषा में किसान-जीवन के दृश्य को प्रस्तुत करता है, जहाँ प्रभु इस्राइल के उद्धारक के रूप में आत्म-विश्वास के साथ खेती के सामान्य कार्यों—चौरस करना, भू-संयोजन, बीज डालना—के संकेत देता है। 28 अध्याय में परमेश्वर अपने पापी नेताओं की मूर्खताओं को चुनौती देते हैं और यह बताने का प्रयास करते हैं कि उनकी योजनाएँ मानव-शक्ति पर निर्भर हैं, न कि परमेश्वर के नियम और योजना पर. इस वाक्य में किसान के निशानों के द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि परमेश्वर की योजना संतुलन और क्रम से चलती है: फसलें समय पर बोई जाती हैं, चौकस कैसे काटी जाती हैं, और मौसम के अनुसार उचित संसाधन जुटाए जाते हैं।

मुख्य आशय

वाक्य इस बात की नुमाइश करता है कि परमेश्वर वस्तुओं को व्यवस्थित और क्रमबद्ध तरीके से देता है—चौरस बनाकर, सौंफ, जीरे, गेहूं, जौ आदि के लिए उचित स्थान और पोषण-योग्यता तय करता है। यह परमेश्वर की व्यवस्था और सृष्टि-क्रम की स्थिरता पर जोर है; यह नहीं है कि मनुष्य अपनी चालाकी से हर चीज को नियंत्रित कर सके। यह परमेश्वर के नियंत्रण की घोषणा है, जो प्रकृति के हर तत्व को एक भूमिका और समय देता है।

मुख्य विषय

  • क्रम और योजना: हर बीज को सही स्थान और समय पर बोया जाता है—जीवन के सभी क्षेत्रों में भी क्रम आवश्यक है।
  • स्वामित्व और मालिकाना: राष्ट्र-नायकों की नीतियाँ चाहे जो भी हों, परमेश्वर हर चीज के ठेकेदार हैं और उनके निर्देश से सब कुछ चलता है।
  • विश्वास बनाम भय: भयभीत मनुष्य अपने तरीकों से प्रयास करते हैं; भरोसा परमेश्वर के नियमों पर किया जाए तो फसल भी सुरक्षित रहती है।

प्रासंगिक cross-references (संक्षेप में समझाकर)

  • उत्पत्ति 8:22 – खेती के नियम और मौसम के क्रम का स्थिर होना महान सिंक है; परमेश्वर ने सृष्टि क्रम स्थापित किया है, ताकि समय पर फल मिले।
  • रोमियों 8:28 – परमेश्वर की योजना के अनुरूप सभी वस्तुएँ काम करती हैं; यदि हम उसे पहचाने और स्वीकार करें तो सब Some good मिलते हैं।
  • हबक्कुक 2:3 – काल-समय पर स्पष्ट होगा कि परमेश्वर की योजना क्या है; धैर्य से प्रतीक्षा करना सीखना चाहिए।

व्यावहारिक राहत

हमारी जिंदगी में भी क्रम और पर्याप्त तैयारी के द्वारा परिणाम मिलते हैं। वित्त, शिक्षा, और रिश्तों में भी-पैर के साथ कदम उठाने चाहिए—हर योजना में परमेश्वर के मार्ग-निर्देश को याद रखना चाहिए। जब हम हिमाकत नहीं करते, बल्कि सावधानी और निष्ठा से काम लेते हैं, तब परमेश्वर अनुभूति देता है कि वह हमारे कार्यों में सहायता कर रहा है।

संक्षिप्त संकल्पना

यशायाह 28:25 में किसान की सरल—चौरस, बीजों का स्थान-निर्धारण—जगह-जगह क्रम-बद्ध खेती की कुशलता दर्शाती है। यह हमें यह याद दिलाता है कि परमेश्वर की व्यवस्था में हर वस्तु का एक स्थान और एक समय है, और हमारे विश्वास-जीवन में भी वही क्रम लागू होना चाहिए।

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पुस्तक-सम्बन्धी नज़रिए: यह पाठ पूर्व-निर्धारित क्रम के महत्व को रेखांकित करता है—प्रभु के नियंत्रण के बिना मानव-यत्न भी मायने नहीं रखते। साथ ही, यह संदेशन देता है कि परमेश्वर की रचना-सृष्टि में हर प्रक्रिया संतुलित रूप से चलती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 28:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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सन और जौ तो ओलों से मारे गए, क्योंकि जौ की बालें निकल चुकी थीं और सन में फूल लगे हुए थे।

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“तू गेहूँ, जौ, सेम, मसूर, बाजरा, और कठिया गेहूँ, लेकर एक बर्तन में रखकर* उनसे रोटी बनाया करना। जितने दिन तू अपने करवट के बल लेटा रहेगा, उतने अर्थात् तीन सौ नब्बे दिन तक उसे खाया करना।

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“हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय! तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवाँ अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों अर्थात् न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते।

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