मत्ती 23:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय! तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवाँ अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों अर्थात् न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते।

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मत्ती 23:23 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे स्पष्टार्थ

मत्ती 23:23 में यीशु यह कहते हैं कि धार्मिक कर्तव्यों के बाहरी प्रदर्शन के साथ-साथ न्याय, दया और विश्वासन की गम्भीर बातों को भी समान महत्व देना चाहिए। पोदीना, सौंफ, जीरे जैसे दसवाँ अंश देना सही है, परन्तु उन्हें व्यवस्था की गम्भीर न्यायिक और नैतिक माँगों को छोड़ना उचित नहीं।

पृष्ठभूमि

यह दुआओं-फरिशियों के बारे में यीशु की निरुपण की सतह पर है। वे विशेष रूप से धार्मिक कर्मों को दिखाने और कानून के बाहरी अंशों का पालन करने में मशगूल थे, जबकि आंतरिक न्याय और दया का अनुपालन कम कर गए थे। मत्ती के Gospel में यह वाक्यांश उनके धार्मिक अडंबर और आत्म-धर्मीता पर चोट करता है।

विश्लेषणात्मक नोट्स

  • दर-कथन बनाम आंतरिक न्याय: दसवाँ अंश देना बाहरी व्यवस्था है, परन्तु “न्याय, दया, और विश्वास” आंतरिक नैतिकता के मुनासिब भाग हैं।
  • धर्म-कर्म और प्रेम की संतुलना: यीशु कहता है कि व्यवहारिक धर्म के साथ प्रेम और नैतिकता में संतुलन जरूरी है; केवल धार्मिक क्रियाओं से ही धर्म पूरा नहीं होता।
  • कठोरता बनाम करुणा: शास्त्रियों की कड़ाई समाज के कमजोरों के विपरीत हो सकती है; दयालुता और सत्यनिष्ठा दोनों मिलकर धर्म को प्रमाणित करते हैं।

थीमिकल सार

  1. बाहरी धर्म की आलोचना
  2. आंतरिक न्याय की मांग
  3. विश्वास और दया का अनुप्रयोग

संलग्न मार्गदर्शक दृष्टी

मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के प्रमुख विचारों के समेकन से दिखता है कि धार्मिक विधियों को मानना आवश्यक है, परन्तु बिना आंतरिक परिवर्तन और दयाभाव के वे पूर्ण नहीं होते।

संक्षिप्त अंश-उद्धरण स्रोत

मैथ्यू हेनरी: “धर्म-क्रिया के साथ दया और न्याय को भी निभाना चाहिए; वरना वह पूजा खोखली है।”

ऐल्बर्ट बार्न्स: “कथन यह है कि व्यवस्था की सतह को बनाए रखना अच्छा है, परन्तु उच्चतम कानून प्रेम है।”

एडम क्लार्क: “कानून के दायरे में आने वाले कर्म केवल चोर-उद्धार नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि का संकेत भी हैं।”

क्रॉस-रेफरेंसेज के साथ संक्षिप्त स्पष्टीकरण

1) लूका 11:42—यह दिखाता है कि बाहरी व्यवस्था के साथ आंतरिक दया और राज्य-प्रेरणा का संयोजन कैसे आवश्यक है।

2) मत्ती 5:7—आंतरिक करुणा से लाभ पाने की महत्ता; यीशु यहाँ पर दया के वास्तविक प्रदर्शन की बात करते हैं।

3) मरकुस 12:33—प्रेम परम प्रधान आदेश है; अन्य सब बातें प्रेम के अंतर्गत बनती हैं।

व्यावहारिक निष्कर्ष

धर्मयत्नों को बनाए रखते समय हमें यह याद रखना चाहिए कि न तो केवल दसवाँ अंश देना पर्याप्त है, न ही केवल पवित्र दिखना। हमें न्याय, दया और विश्वास को अपने व्यवहार का केंद्र बनाकर, नियमों के साथ दयालुता और सच्चे प्रेम का संकेत देना चाहिए।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 23:23 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“पर हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम पोदीने और सुदाब का, और सब भाँति के साग-पात का दसवाँ अंश देते हो, परन्तु न्याय को और परमेश्‍वर के प्रेम को टाल देते हो; चाहिए तो था कि इन्हें भी करते रहते और उन्हें भी न छोड़ते। (मत्ती 23:23, मीका 6:8, लैव्य. 27:30)

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हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्‍वर के साथ नम्रता से चले? (मत्ती 23:23, यशा. 1:17)

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क्योंकि मैं बलिदान से नहीं, स्थिर प्रेम ही से प्रसन्‍न होता हूँ*, और होमबलियों से अधिक यह चाहता हूँ कि लोग परमेश्‍वर का ज्ञान रखें। (मत्ती 9:13, मत्ती12:7, मर. 12:33)

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