Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
मत्ती 23:1 मत्ती 23:2 मत्ती 23:3 मत्ती 23:4 मत्ती 23:5 मत्ती 23:6 मत्ती 23:7 मत्ती 23:8 मत्ती 23:9 मत्ती 23:10 मत्ती 23:11 मत्ती 23:12 मत्ती 23:13 मत्ती 23:14 मत्ती 23:15 मत्ती 23:16 मत्ती 23:17 मत्ती 23:18 मत्ती 23:19 मत्ती 23:20 मत्ती 23:21 मत्ती 23:22 मत्ती 23:23 मत्ती 23:24 मत्ती 23:25 मत्ती 23:26 मत्ती 23:27 मत्ती 23:28 मत्ती 23:29 मत्ती 23:30 मत्ती 23:31 मत्ती 23:32 मत्ती 23:33 मत्ती 23:34 मत्ती 23:35 मत्ती 23:36 मत्ती 23:37 मत्ती 23:38 मत्ती 23:39



मत्ती 23:5 का तात्पर्य और संदर्भ
यूहन्नी राजा धर्म के नेता पाद्री-फारिसी उस समय की धार्मिक रीति‑रिवाजों को बाहरी प्रदर्शन पर अधिक केंद्रित कर रहे थे। इस पद में मत्ती उद्धृत करते हैं कि वे अपने सभी कर्म लोगों को दिखाने के लिये करते हैं, ताकि लोग उन्हें आदर दें। थेओ-शास्त्र के भीतर ऐसी प्रवृत्ति थी कि वे बाहरी रूप-रंग, तावीज़, और झालरों के जरिये पवित्रता का चिह्न स्थापिक करते, परंतु उनके दिल में ईश्वर की महिमा और.requirement of परिवर्तन कम आत्मीयता होती थी। इस verse में यीशु ने बाहरी आडंबर के जोखिम की चेतावनी दी है और यह दिखाया गया है कि धर्म के कर्मों का सही माप तब है जब उनका उद्देश्य परमेश्वर की महिमा और लोगों की कल्याण हो।
मूल अर्थ औरCentral meaning
यह पंक्ति बताती है कि धार्मिक नेताओं ने सुनियोजित ढंग से अपनी धार्मिक पहचान को उभारना चाहा—कुर्सियों, वस्त्रों, और आभूषणों के जरिये। परन्तु यीशु के अनुसार वास्तविकता यह है कि आंतरिक परिवर्तन के बिना बाहरी प्रदर्शन व्यर्थ है। तावीज़ों और झालरों का आकर्षण दिखावा है; वास्तविक धार्मिकता तो दिल की पवित्रता और नम्रता में निहित है।
मुख्य विषय (की बातें)
अन्य संदर्भ से सम्बन्ध
1) मत्ती 6:1‑6 — सेवा के ढंग में प्रेरणा की सत्यता; जो लोग मान्यता पाने के लिए दिखावा करते हैं, वे इनाम छोड़ देते हैं। छोटे संदर्भ का सार: ईश्वर जिसे देखते हैं वह दिल की सच्चाई है, न कि मंच पर की चमक।
2) लुका 11:37‑44 — फरीसियों के आडंबर पर यीशु का स्पष्ट आह्वान: आंतरिक पवित्रता का महत्व, बाहर की साफ़-सफाई वास्तविक धार्मिकता नहीं गिना जाती।
3) मरकुस 12:38‑40 — धार्मिक नेताओं का दिखावा और धन- संपत्ति के साथ उनका भेदभाव; क्या सच में उनका आचरण ईश्वर के राज्य के अनुरूप है?
व्यावहारिक प्रति-चिंतन
अपने जीवन को आप किस प्रकार के लक्षणों से दर्शाते हैं? आप कितनी सहजता से क्या कहते हैं और क्या आप वास्तव में जो कहते हैं उसके अनुरूप जीवन जीते हैं? यह शास्त्री-प्रवृत्ति पर नियन्त्रण का समय है: बाहरी चमक से पहले प्रेम, नम्रता और सेवाभाव की परीक्षा लें। यदि कहीं भी आडंबर पकड़ बन रहा हो, तो प्रार्थना करें कि ईश्वर दिल को खोल दे और आपकी प्रेरणा वर्षों से बहार और भीतर एकरूप हो जाए।
संक्षिप्त निष्कर्ष
मत्ती 23:5 हमें यह याद दिलाता है कि धर्मग्रहण का वास्तविक माप आंतरिक परिवर्तन, दिल की सच्ची भक्ति और दूसरों के साथ सत्य प्रेम में होता है—ना कि बाहरी दिखावे, तावीज़ों या झालरों के प्रदर्शन में। यीशु की शिक्षा यही है कि परमेश्वर देखता है दिल की अवस्था और कर्मों के पीछे की प्रेरणा।
क्रॉस-रेफरेंस
– मत्ती 6:1‑4: प्रायः मिलने वाली प्रशंसा से प्रेरित दिखावे से बचने की शिक्षा।
– लूका 11:44: आंतरिक विषमताओं को उजागर करता है कि बहार की सफ़ाई के साथ दिल में शुद्धता आवश्यक है।
– मरकुस 12:38‑40: धन-संपत्ति के साथ शो-ऑफ के खतरे का उलेख।
यह टिप्पणी HINIRV अनुवाद से प्रेरित है और शुरुआती प्रशिक्षकों के सार्वजनिक-domain विचारों के समन्वय से बनी है।