मत्ती 23:39 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि मैं तुम से कहता हूँ, कि अब से जब तक तुम न कहोगे, ‘धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है’ तब तक तुम मुझे फिर कभी न देखोगे।”

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मत्ती 23:39 पद-दर-पद बाइबल टीका

मत्ती 23:39 पर संदर्भ संग व्याख्या

पद में यीशु ने ירושלים के साथ एक कठोर सच का इशारा किया है: उस नगर ने उसे बारम्बार ठुकराया है, और अब उसका अवसर उसे छोड़ रहा है। यह वाक्य उसी प्रसंग का भाग है जहाँ यीशु ने धर्माध्यक्षों और शास्त्रियों के विरोध पर करारा निष्कर्ष दिया है, और बतलाया कि वे दूसरे मार्ग से उद्धार के अवसरों को टाल रहे हैं। अब वे प्रभु के पुत्र को देखने से वंचित रहेंगे जब तक वे भविष्य में उसे स्वीकार न करें। यह चेतावनी नगर के लोगों के लिए थी, पर साथ ही यह पाठक के लिए भी एक आत्मिक संकेत है—आखिरकार कौन-सा अवसर खोना है और कौन-सा अवसर खुला रहता है।

केंद्रीय अर्थ

यह वाक्य बताता है कि यीशु मसीह के आने के समय एवं सहभागी अवलोकन के बीच नगर के लोगों के भाग्य का निर्णय उनके जवाब पर निर्भर है। “तुम मुझे फिर कभी न देखोगे” से आशय यह है कि जब तक वे विश्वासपूर्वक प्रभु के नाम से नहीं बुलाते, तब तक उनकी दृष्टि से मसीह का प्रभामय रूप नहीं दिखेगा—यानी उद्धारधर्मी अवसर और गहरे आशीर्वाद उनसे दूर रहेंगे।

तीन प्रमुख थीम

  1. आकर्षण बनाम अस्वीकृति: यीशु ने कहा कि अस्वीकृति के परिणामस्वरूप उनके पास लौटकर देखने का अवसर दूर होता है; धार्मिक नेताओं की कठोरता उद्धार के मार्ग को बंद कर देती है।
  2. विश्वास की जरूरत: उद्धार के लिए सही संबोधन—“धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है”—के अभाव में लोग मार्ग से चूक जाते हैं, भले ही वे धार्मिक गतिविधियों में माहिर क्यों न हों।
  3. प्रतीक्षा और दया: यह शिक्षा कि परमेश्वर के समय में भी दया और आस्था के क्षण लौट आते हैं, पर उनके लिए जो अस्वीकार कर चुके होते हैं, अवसर का आना मुश्किल हो सकता है।

संबद्ध पार्श्व बचनों

1) यह संदेश बाइबिल के अन्य हिस्सों से जुड़ता है जहाँ यीशु अपने शास्त्रियों के साथ आस्था और खुलापन माँगते हैं—भक्ति निष्ठा के साथ सच स्वीकारना।

2) प्रेरितों के कामों में भी उद्धार के अवसरों के खोने के बारे में सावधानियाँ मिलती हैं; विश्वास के घंटे अक्सर मानव आत्मा के लिए निर्णायक मोड़ बनते हैं।

3) पुराने नियम के प्रतीकों में भी प्रभु के नाम से आने की आशा और उन्होंने उसे कैसे स्वीकार किया, इसका पूर्वाभास मिलता है।

व्यावहारिक विचार

अपनी आस्था की शब्दावली में“धन्य है वह, जो प्रभु के नाम से आता है” जैसी अभिव्यक्ति को दैनिक जीवन में अपनाएँ। क्या आप अपनी धार्मिक गतिविधियों के बारे में सचेत हैं, या क्या आप प्रभु के साथ व्यक्तिगत संबंध को प्राथमिकता दे रहे हैं? उद्धार के अवसर बार-बार नहीं आते, इसीलिए आत्मा की आंखें खोलकर ईश्वर की वाणी सुनना और समर्पण करना महत्त्वपूर्ण है।

संक्षिप्त समापन

यह पद, यीशु के सार्वजनिक संदेश के हिस्से में, चेतावनी देता है कि निष्ठा और आस्था से पहले धार्मिक परंपराओं की कठोरता अहम बन सकती है। प्रभु के नाम से आने वाले उद्धार के सत्य को स्वीकारना ही व्यक्ति को अक्सर अंततः देखने के योग्य बनाता है।

Cross-references (संक्षेप में)

• भेड़-भाल की परंपरा के संदर्भ में उद्धार के अवसर और दावा—जिनका जवाब सही आस्था से मिलता है।

• प्रेरितों के कार्यों में विश्वास के अवसरों की प्राप्ति और न मान लेने पर उनके परिणाम।

• पुराने नियम के प्रतीकों में प्रभु के आने की आशा और उसे स्वीकारने का महत्व।

पंक्तियों के भीतर निकलने वाले संदेश: विश्वास, आस्था और उद्धार के अवसर—ये तीनों एक साथ मिलकर हमें प्रभु के आगमन के समय एकत्व में देखने का अवसर प्रदान करते हैं।

नोट: नीचे उद्धृत तीन प्रमुख पंक्तियों के लिए टिप्पणीकारों के छोटे अभिगम उपलब्ध हैं—Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke. यदि आप चाहें तो मैं उन्हीं से सीधे-सीधे संक्षिप्त उद्धरण भी दे सकता/सकती हूँ।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

मत्ती 23:39 समानांतर पद और संबंधित वचन

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भजन संहिता 118:26 (HINIRV) »
धन्य है वह जो यहोवा के नाम से आता है! हमने तुम को यहोवा के घर से आशीर्वाद दिया है। (मत्ती 23:39, लूका 13:35, मर. 11:9-10 लूका 19:38)

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मत्ती 21:9 (HINIRV) »
और जो भीड़ आगे-आगे जाती और पीछे-पीछे चली आती थी, पुकार-पुकारकर कहती थी, “दाऊद के सन्तान को होशाना; धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है, आकाश में होशाना।”

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लूका 2:26 (HINIRV) »
और पवित्र आत्मा के द्वारा प्रकट हुआ, कि जब तक तू प्रभु के मसीह को देख न लेगा, तब-तक मृत्यु को न देखेगा।

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