Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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यशायाह 28:21 का परिचय एवं गहराई
परीक्षित पंक्ति: “क्योंकि यहोवा ऐसा उठ खड़ा होगा जैसा वह पराजीम नामक पर्वत पर खड़ा हुआ और जैसा गिबोन की तराई में उसने क्रोध दिखाया था; वह अब फिर क्रोध दिखाएगा, जिससे वह अपना काम करे, जो अचम्भित काम है, और वह कार्य करे जो अनोखा है।”
संक्षिप्त संदर्भ-सेटअप
यहछंद यहूदी-यहोवा की पूर्ण नियन्त्रणशीलता और न्याय के साथ क्रोध के पक्ष की याद दिलाता है। यहोवा के प्रेरित जनों पर क्रोध उभर कर आता है, ताकि उनकी भ्रांतियों और निर्भरता से उनकी आस्था सुधरे। पहाड़-पराक्रम और गिबोन की तराई का संदर्भ दृढ़ रूप से उसे दिखाते हैं कि परमेश्वर्विश्वास में अस्थिरता न मानी जाए; उसकी क्रोध भी किसी योजना के अनुसार चलती है और उसका लक्ष्य है सत्य का पुनर्स्थापन।
ईश्वर के व्यक्तित्व और विश्वास पर संकेत
इस वाक्य से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर क्रोध से बचाने वाले नहीं, बल्कि पूरक न्याय और सुधारकर्ता हैं। वह जब उठ खड़ा होता है, तब वह अपने बड़े पर्वत-स्तर के समान स्थिर और निर्णायक होते हुए, मानव इतिहास में ऐसे ऐतिहासिक क्रोध-क्रियाओं को संचालित करते हैं जो लोगों को अपनी दिशा बदलने के लिए उकसाते हैं। यह संदेश यह भी दिखाता है कि परमेश्वर का क्रोध स्वयं सेतु नहीं, बल्कि एक उद्देश्यपरक क्रिया है—धर्म-निर्देशन और उद्धार के लिए मार्ग बनाना।
महत्वपूर्ण शब्दावलियाँ और चित्र
अन्य पाठों से संबंध
1) यशायाह 1:24-25 – परमेश्वर के रूप में क्रोध और उद्धार का संतुलन: वह ध्वंस नहीं, बल्कि परिवर्तन के लिए संरचना बनाते हैं।
2) यूहन्ना 3:36 – विश्वास न रखने पर क्रोध का भाविक परिणाम; परमेश्वर के चाल-चलन में न्याय का अपरिहार्य स्थान।
3) मीका 7:18 – परमेश्वर की कृपा और न्याय का अद्वितीय मिलन; वह दयालु रहते हुए भी न्याय को नहीं छोड़ते।
आज के प्रयोगिक अर्थ
हमारे जीवन में यह चेतावनी है कि परमेश्वर के काम का समय अकल्पनीय हो सकता है। वह निर्भय रूप से क्रोध दिखाकर गलतियों को उखाड़ फेंकते हैं ताकि बनावट-नया निर्माण, और विश्वास-आख्यान संभव हो सके। जब हम भ्रमित होते हैं, तब याद रखें कि उसकी उठाई हुई क्रिया से हमारे मार्ग की धारा स्पष्ट होती है, और उसका उद्देश्य है हमारा आंतरिक परिवर्तन—आत्म-निष्ठा, पवित्रता और सच्चे विश्वास का पुनः-स्थापन।
क्रॉस-रेफरेंसेस और संक्षिप्त व्याख्या
- पराजीम पर्वत और गिबोन की तराई के संकेत: प्रेरित-इतिहास में परमेश्वर की उपस्थिति और न्याय-कार्य के दृश्य हमें यह बताते हैं कि वह समय-समय पर मानव-उद्धार के लिए अपने निर्णय स्पष्ट करते हैं।
- अन्य संदर्भ बताते हैं कि परमेश्वर का क्रोध भी प्रेम-योजनाओं का हिस्सा है और उद्धार के मार्ग को खोलता है।
निष्कर्ष
यशायाह 28:21 हमें सिखाता है कि ईश्वर का क्रोध, उसकी पवित्रता और न्याय के अनुरूप है। गिरह-बंद मानवीय योजना की अस्थिरता के बजाय, परमेश्वर के कार्यों में स्थिरता है, जो सच के पुनर्स्थापन और विश्वास के परम ध्येय को पूरा करता है।
उद्धरण नोट: कनिष्ठ मौखिक-टिप्पणी से जो शब्द स्पष्ट रूप से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे उद्धरण के समान मिलते हैं, उन्हें यहाँ उल्लेखित किया गया है। यदि हमारे पाठ में उनके संपूर्ण वाक्यांश उपलब्ध हों, तो उन्हें संक्षेप में उद्धृत किया गया है और प्रयोजनसार प्रस्तुत किया गया है।