Old Testament
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मीका 7:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तू याकूब के विषय में वह सच्चाई, और अब्राहम के विषय में वह करुणा पूरी करेगा, जिसकी शपथ तू प्राचीनकाल के दिनों से लेकर अब तक हमारे पितरों से खाता आया है। (लूका 1:54-55, रोम. 15:8-9)
मीका 7:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मीका 7:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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प्रेरितों के काम 3:25 (HINIRV) »
तुम भविष्यद्वक्ताओं की सन्तान और उस वाचा के भागी हो, जो परमेश्वर ने तुम्हारे पूर्वजों से बाँधी, जब उसने अब्राहम से कहा, ‘तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे घराने आशीष पाएँगे।’ (उत्प. 12:3, उत्प. 18:18, उत्प. 22:18, उत्प. 26:4)

भजन संहिता 105:8 (HINIRV) »
वह अपनी वाचा को सदा स्मरण रखता आया है, यह वही वचन है जो उसने हजार पीढ़ियों के लिये ठहराया है;

उत्पत्ति 28:13 (HINIRV) »
और यहोवा उसके ऊपर खड़ा होकर कहता है, “मैं यहोवा, तेरे दादा अब्राहम का परमेश्वर, और इसहाक का भी परमेश्वर हूँ; जिस भूमि पर तू लेटा है, उसे मैं तुझको और तेरे वंश को दूँगा।
मीका 7:20 पर टिप्पणी — संदर्भ और अर्थ
यह वचन परमेश्वर की सच्चाई और करुणा की पवित्र प्रतिज्ञाओं को दया से पूरा करने की घोषणा है। याकूब और अब्राहम के विषय में ईश्वर की दृढ़ शपथ और पितरों के प्रति उनकी वाणी के अनुरूप, वह अपने समय-सारिणी में महामनुष्य के पक्ष में करुणा और सत्य स्थापित करेगा।
पृष्ठभूमि और सन्दर्भ
मीका की किताब राष्ट्र के पापों के साथ निराशाजनक प्रतिसार के बीच ईश्वर की स्मरण-शक्ति और उद्धार की योजना की ओर संकेत करती है। मीका 7 में विशिष्ट रूप से विश्वासयोग्य शासकों, सेवादारों और प्रमुख कुण्डलियों के बीच आशा की छोटी किरण दिखती है: परमेश्वर की सच्ची घोषणा और करुणा की पुनर्स्थापना। लूका 1:54-55 और रोम 15:8-9 के संदर्भ में यह दिखता है कि ईश्वर अपने चयनित लोगों के लिए पहले की शपथों को निभाने के लिए पथ बनाते हैं—याकूब (इस्राइल) और अब्राहम के वंशजों के साथ उनका करुणामय विश्वास प्रकट होता है।
interpretive observations
- ईश्वर की सतत प्रतिबद्धता: यह वचन ईश्वर की सदा-निर्विकल्प सच्चाई को पुष्ट करता है; वह अपने बन्धन और वादों को नहीं तोड़ते।
- करुणा के समापन के लक्ष्य: परमेश्वर केवल शब्द नहीं कहता, वह अपने चयन के लोगों के जीवन में करुणा और उद्धार को बहाल करता है।
- इतिहास से वर्तमान तक: अतीत के पितरों के साथ की गई प्रतिज्ञाएँ अब भी सच हो रही हैं, क्योंकि उद्धार का योजनात्मक क्रम अभी भी चल रहा है।
एक छोटा संकल्प-सूची
संबंधित संदर्भ
- लूका 1:54-55: दया का स्मरण और अपने पुत्रों के लिए उद्धार का उद्धघोष।
- रोम 15:8-9: यहूदियों और अन्य जातियों के बीच परमेश्वर की करुणा और महिमा की स्थापना का उद्देश्य।
इन बातों से यह निष्कर्ष निकलता है कि परमेश्वर की शपथें न केवल अतीत की स्मृति हैं, बल्कि वर्तमान तथा भविष्य के पथों को भी दिशा देती हैं।
केंद्रीय निष्कर्ष और व्यवहारिक TAKE-away
ईश्वर अपनी सच्चाई और करुणा के साथ हर परिस्थिति को संभालते हैं। जब जीवन कठिन हो या विश्वास डगमगाने लगे, तब भी वह अपने वादों को निभाते हैं। इस सच्चाई से प्रेरित हों कि हमारी निर्भरता चाही तो कठिनाइयों के बीच भी स्थिर रहे, और हमारे व्यवहार में करुणा, नम्रता व न्याय को अधिक निखार दे।
उद्धरणों का पन्ना
यदि आवश्यक हो, नीचे दिए गए प्रमाण-वाक्यों के मूल साहित्यिक संकेतों का संदर्भ लिया जा सकता है, परन्तु पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिए जाते:
“तू याकूब के विषय में वह सच्चाई, और अब्राहम के विषय में वह करुणा पूरी करेगा…”