Old Testament
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मीका 7:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उस दिन अश्शूर से, और मिस्र के नगरों से और मिस्र और महानद के बीच के, और समुद्र-समुद्र और पहाड़-पहाड़ के बीच में देशों से लोग तेरे पास आएँगे।
मीका 7:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
मीका 7:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 19:23 (HINIRV) »
उस समय मिस्र से अश्शूर जाने का एक राजमार्ग होगा, और अश्शूरी मिस्र में आएँगे और मिस्री लोग अश्शूर को जाएँगे, और मिस्री अश्शूरियों के संग मिलकर आराधना करेंगे।

होशे 11:11 (HINIRV) »
वे मिस्र से चिड़ियों के समान और अश्शूर के देश से पंडुकी की भाँति थरथराते हुए आएँगे; और मैं उनको उन्हीं के घरों में बसा दूँगा, यहोवा की यही वाणी है।

यशायाह 11:16 (HINIRV) »
उसकी प्रजा के बचे हुओं के लिये अश्शूर से एक ऐसा राज-मार्ग होगा जैसा मिस्र देश से चले आने के समय इस्राएल के लिये हुआ था।
मीका 7:12 का अभिधेय उत्तर—सबके लिए आशीष की राह
मुख्य विचार: उस दिन परमेश्वर लोगों को दूर-दराज के देशों से आकर इस्राएल के लिए सहायता और दया का मार्ग खोलेंगे। यह वचन बताता है कि परमेश्वर का उद्धार और न्याय सीमाओं का क़ायदा नहीं मानते; वह राष्ट्रों को अपनी योजना में जोड़कर प्रतिपादन करते हैं, ताकि दया, न्याय और सामरिक सुरक्षा एक साथ आएं।
साहित्यिक संदर्भ का ढांचा
यह भविष्यवाणी मीका की किताब में उस समय की राजनीतिक अस्थिरता के बीच आती है, जब नज़दीकी और दूर के राष्ट्र इस्राएल के विरुद्ध सुलह-समझौते कर रहे थे। वाक्य में “उस दिन” का उद्धार-काल दृष्टिगत है, जिसमें परमेश्वर की दीर्घकालीन योजनाओं के अनुसार विविध देशों से आने वाले लोग यह संकेत देते हैं कि ईश्वर की करूणा सार्वत्रिक है। यह संदेश सिर्फ शान्ति-भरे आशीर्वाद तक सीमित नहीं है, बल्कि परमेश्वर के राज्य में सभी जातियों की सहभागिता का उद्घोष भी है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
इसअवसर पर यहूदियों के लिए एक बड़ा परिवर्तन दिखता है: अस्थिर पड़ोसी देशों से लोग आकर यहूदी जीवन को नया आयाम देंगे। यह दृष्टिकोण ऐतिहासिक रूप से यह दर्शाता है कि खोज और उद्धार केवल एक जाति तक सीमित नहीं है, बल्कि ईश्वर की महिमा और चंगाई सभी जगह फैलेगी। यह विचार पौलुस की प्रेरित-व्याख्या से भी संगत है, जिसमें परमेश्वर की वरदान जातीय विभाजन से ऊपर उठकर सामूहिक कल्याण का सामान बनता है।
आध्यात्मिक संकेत और तात्त्विक मूल्य
ग्रंथ-सम्बन्ध और cross-references
1) भविष्य-युग के विश्व-सम्भाषण की दिशा: योद्धाओं के देशों से भी आशीष का आना एक पूर्वसूचना है कि परमेश्वर का राज्य सभी को जोड़ता है।
2) वचन-समन्वय: यह विचार इब्रानियों 12:28 से मेल खाता है जहाँ नए विश्व-परिदृश्य में एक दृढ़ धर्म-घर की स्थापना होती है जिसमें सब जातियाँ आशीष पाती हैं।
3) राष्ट्रों के साथ सम्बन्ध: यहाक, मिस्र आदि का उल्लेख दर्शाता है कि परमेश्वर के उद्धार का ढाँचा मनुष्य-सम्बन्धों को भी छु देता है और वैचारिक-आकर्षणों को एक मंच पर लाता है।
Reflection: ध्यान के प्रश्न
- क्या मेरा विश्वास यह मानता है कि ईश्वर का उद्धार वैश्विक और सार्वभौम है? - कैसे मैं अपने समुदाय में ऐसी खुली और सम्मिलित दृष्टि को बढ़ावा दे सकता/सकती हूँ? - किन-किन तरीकों से मैं दूसरों के साथ दया और सहयोग का साझा मार्ग ढूंढ सकता/सकती हूँ?
संक्षिप्त निष्कर्ष
मीका 7:12 हमें दिखाता है कि परमेश्वर के उद्धार की दिशा सीमा-पार है और विविध राष्ट्र एक साथ आकर उसकी महिमा में सहभागी बनेंगे। यह प्रतिज्ञान आज भी बताती है कि परमेश्वर का राज्य न्याय और दया के एक अद्वितीय संगम से चलता है, जिसमें हर मनुष्य का स्थान है।
यथार्थ उद्धरण (जहाँ आवश्यक हो): मीका 7:12 के समान भक्ति-आउटपुट में प्रस्तुत भाष्य में ध्यान दिया गया है। प्रभावी विवरण के लिए नीचे के उद्धरण पंक्तियाँ केवल सूचित हैं:
“उस दिन अश्शूर से, और मिस्र के नगरों से और मिस्र और महानद के बीच के, और समुद्र-समुद्र और पहाड़-पहाड़ के बीच में देशों से लोग तेरे पास आएँगे।”