Old Testament
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मीका 1:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसकी सब खुदी हुई मूरतें टुकड़े-टुकड़े की जाएँगी; और जो कुछ उसने छिनाला करके कमाया है वह आग से भस्म किया जाएगा, और उसकी सब प्रतिमाओं को* मैं चकनाचूर करूँगा; क्योंकि छिनाले ही की कमाई से उसने उसको इकट्ठा किया है, और वह फिर छिनाले की सी कमाई हो जाएगी।
मीका 1:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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मीका 1:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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व्यवस्थाविवरण 23:18 (HINIRV) »
तू वेश्यापन की कमाई या कुत्ते की कमाई किसी मन्नत को पूरी करने के लिये अपने परमेश्वर यहोवा के घर में न लाना; क्योंकि तेरे परमेश्वर यहोवा के समीप ये दोनों की दोनों कमाई घृणित कर्म है।

होशे 2:12 (HINIRV) »
मैं उसकी दाखलताओं और अंजीर के वृक्षों को*, जिनके विषय वह कहती है कि यह मेरे छिनाले की प्राप्ति है जिसे मेरे यारों ने मुझे दी है, उन्हें ऐसा उजाड़ूँगा कि वे जंगल से हो जाएँगे, और वन-पशु उन्हें चर डालेंगे।

होशे 8:6 (HINIRV) »
यह इस्राएल से हुआ है। एक कारीगर ने उसे बनाया; वह परमेश्वर नहीं है। इस कारण शोमरोन का वह बछड़ा टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा।
मीका 1:7 का सीधा अर्थ
इसVERSE में भविष्यवाणी है कि मिरयाम की सारी मूर्तियाँ टूट-फूट जाएंगी, उनका बाकी-बिखरा आभूषण और धन आग में भस्म हो जाएगा, और जो कुछ छिना-छपटा इकट्ठा किया गया है, वह भी उसी छिनाले की तरह विफल हो जाएगा। इसका मूल संदेश है: असत्य-समृद्धि और स्तवक-धन का दावानल पर टिकना अस्थिर है; परमेश्वर के न्याय से बच नहीं सकता।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मीकाह के समय इजराइल-यूडाही में अराजकता थी, जहाँ लोग अपने-अपने देवताओं में और उनकी मूर्तियों में आत्म-समृद्धि खोजते थे। “खुदी हुई मूर्तियाँ” से आशय है वे देवी-देवताओं के प्रतिमान जिनके लिए लोगों ने धन और मुसीबत छोड़कर भेंट चढ़ाए, परन्तु उनका वास्तविक नियंत्रण नहीं था। यह भविष्यवाणी राज्य के भीतर बुराइयों के कारण आने वाले विनाश की चेतावनी है – न केवल भौतिक दालान बल्कि आंतरिक विश्वास-घटनों के लिए भी।
व्याख्यात्मक बिंदु
कथा-संरेख
नीचे के समानांतरी बिंदु में अन्यथा भी इसी प्रकार का संदेश प्रचलित है:
छोटे निष्कर्ष और व्यक्तिगत अनुपालन
- वैभव और मूर्तिपूजा के प्रति आकर्षण से मुक्त रहें; परमेश्वर की सही वस्तुएं ही स्थायी सामर्थ्य देंगी।
अनुदर्शक संदर्भ: इस पाठ की संगत धारणा को समझाने के लिए कुछ पुराने टीका-चिन्ह उद्धृत हैं:
मैथ्यू हेनरी के अनुसार, “मूर्तियों के विघटने से यह स्पष्ट होता है कि संसार की धन-संपदा और दाम्पत्य-उन्नति भी क्षणभंगुर है; परिभाषा यह है कि पाप-लाभ स्थायित्व नहीं देते।” (संक्षिप्त सार) [उद्धृत विचार-सार]
एल्बर्ट बर्न्स ने कहा, मूर्ति-पूजा के पीछे की प्रवृत्ति मानव-स्वार्थ और लालच से संचालित होती है, जिसका अन्त दंड और विनाश है।
आदम क्लार्क ने टिप्पणी जारी रखी कि छिनाले की कमाई से मूर्ति-पूजा करना परमेश्वर के न्याय के सामने खो जाना है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षिप्त व्याख्या)
यिर्मयाह 2:11–13: लोग जहां पानी की नयी जगहों पर जाते हैं, वहां न तो वे बानी हैं और न ही शांति; मूर्ति-पूजा से हटकर परमेश्वर के साथ स्थिर संबंध आवश्यक।
हबक्कूक 2:9–11: जो धन-संपदा को सुरक्षित मानकर अन्याय करता है, उसका अंत पंक्ति के भीतर है।
1 कुरिन्थियों 3:12–15: निकृष्ट पदार्थों के निर्माण से बनने वाला ढांचा सच-आस्था की कसौटी पर नहीं टिका रहता; पर परमेश्वर के न्याय के समय मूल्यांकन होता है。
सारांश: मीका 1:7 हमें यह स्मरण कराता है कि जो भी धन, मूर्ति-उत्सा, या छिनाले पर निर्भर रहता है, वह अंततः ध्वस्त हो जाता है। परमेश्वर के न्याय के समय सत्य और न्याय ही टिकेंगे।