Old Testament
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सपन्याह 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जो लोग अपने-अपने घर की छत पर आकाश के गण को दण्डवत् करते हैं, और जो लोग दण्डवत् करते और यहोवा की शपथ खाते हैं और मिल्कोम की भी शपथ खाते हैं;
सपन्याह 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 17:33 (HINIRV) »
वे यहोवा का भय मानते तो थे, परन्तु उन जातियों की रीति पर, जिनके बीच से वे निकाले गए थे, अपने-अपने देवताओं की भी उपासना करते रहे।

1 राजाओं 11:33 (HINIRV) »
इसका कारण यह है कि उन्होंने मुझे त्याग कर सीदोनियों की देवी अश्तोरेत और मोआबियों के देवता कमोश, और अम्मोनियों के देवता मिल्कोम को दण्डवत् की, और मेरे मार्गों पर नहीं चले: और जो मेरी दृष्टि में ठीक है, वह नहीं किया, और मेरी विधियों और नियमों को नहीं माना जैसा कि उसके पिता दाऊद ने किया।

यिर्मयाह 19:13 (HINIRV) »
और यरूशलेम के घर और यहूदा के राजाओं के भवन, जिनकी छतों पर आकाश की सारी सेना के लिये धूप जलाया गया, और अन्य देवताओं के लिये तपावन दिया गया है, वे सब तोपेत के समान अशुद्ध हो जाएँगे।'” (प्रेरि. 7:42)
मुख्य व्याख्या बिंदु
सपन्याह 1:5 में भगवान के न्याय के दिन की आहट स्पष्ट है: हर वह व्यक्ति जो आकाश के गण (आकाशीय देवताओं) की पूजा या प्रतिज्ञा-ग्रहण में लिप्त रहता है, चाहे वे अपने घर की छत पर क्यों न हों, उनकी निन्दा होगी। यह वचन एक साहसिक चेतावनी है कि याकूब के परमेश्वर के सच्चे लक्ष्यों के साथ समझौता नहीं किया जा सकता; धार्मिक मिलावट और अन्य देवताओं के साथ सहभागिता उस दिन के लिए विनाशकारी परिणाम लाती है। इस पद में पाप का सार्वभौम-स्तर पर उजागर होना है—जिसमें आचरण, प्रतिज्ञा और प्रथागत देव-पूजा तीनों एक साथ मिश्रित हैं। उद्घोषणा की पुख्ता वास्तविकता यह है कि यहूदा के दिनचर्या के भीतर भी “दण्डवत् करते हैं” जैसी प्रवृत्ति को निष्कासनपूर्वक देख लिया गया है।
साहित्यिक संदर्भ (संदर्भ-परिप्रेक्ष्य)
यह पाठ यहोवा के दंड के दिन की पूर्व-सावधानी है, जो सपन्याह के समय के सामाजिक-धार्मिक अवरोधों को उजागर करता है। पुस्तक में सपन्याह गहन ऐतिहासिक-स्थानीय संदर्भ के साथ यहूदियों की धार्मिक ढुलमुली और अनुग्रह-पूर्ति की कमी को दिखाती है। छत पर देव-पूजा के उल्लेख से इशारा मिलता है कि पारंपरिक उन चरित्रों के लिए भी नहीं बचते जो दिन-प्रतिदिन धर्म निभाते हैं पर वास्तविक हृदय परिवर्तन के बिना अन्य देवताओं की शपथ लेते हैं।
आध्यात्मिक महत्त्व
इस verse का theological core यह है कि परमेश्वर को समर्पितता एकपक्षीय नहीं है; यह प्रकट करती है कि भौतिक धार्मिक गतिविधियाँ बिना आंतरिक परिवर्तन के देव-भक्ति नहीं बना सकता। प्रतिज्ञाओं में शपथ लेना और अन्य देवताओं के साथ संगति करना—दोनों एक ही पथ के विपरीत हैं। प्रभु के न्याय के दिन में, निष्ठा और सत्य की धार स्पष्ट रूप से दिखती है; असत्य और धार्मिक बहिर्मुखीपन को समाप्त किया जाएगा।
पवित्र शास्त्र के अन्य संदर्भ
आत्म-चिंतन के लिए कुछ प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
सपन्याह 1:5 हमें यह सिखाता है कि अस्थायी धार्मिक क्रियाओं के पीछे कोई गहरा हृदय परिवर्तन नहीं तो परमेश्वर की प्रतिकूल प्रतिक्रिया अवश्य आती है। केवल बाहरी शपथ या छत पर प्रार्थना से नहीं, बल्कि एक सच्चे प्रेम और समर्पण से भक्तता बनती है। परमेश्वर वही है जो दिल की गहराई तक देखता है; उसी अनुसार हमारी आस्थागत जीवन-यात्रा को सजग और एकरूप बनाना चाहिए।
कथन-उद्धरण (प्रमुख पंक्तियाँ)
यह पाठ सीधे-सीधे पुराने सार्वजनिक-डायरेक्टिव टिप्पणियों में नहीं आता; परन्तु एडम क्लार्क व मैथ्यू हेनरी के सार्वजनिक मत-वाक्यों से यह बोध मिलता है कि “कृपया ईश्वर की एकाग्रता में रहने से ही सच्ची पूजा बनती है” जैसी सोच उनके नोट्स में प्रतिध्वनित होती है। (उद्धरणों का संकलन केवल संदर्भ के लिए समाहित किया गया है; पूर्ण वाक्यों के छोटे अंश उद्धृत हैं जो पाठ-आवश्यकता के अनुसार उद्धरित हैं।)
सूक्ष्म स्रोत-उद्धरण(संकेत)
यदि उपलब्ध हों, तो मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के छोटे उद्धरणों का उल्लेख किया गया है, परन्तु इस संस्करण में पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिए गए हैं; आवश्यकता होने पर वे पाठ-चयन के भीतर संक्षेप में जोड़े जा सकते हैं।