Old Testament
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सपन्याह 1:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और यहोवा के यज्ञ के दिन, “मैं हाकिमों और राजकुमारों को और जितने परदेश के वस्त्र पहना करते हैं, उनको भी दण्ड दूँगा।
सपन्याह 1:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सपन्याह 1:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 24:21 (HINIRV) »
उस समय ऐसा होगा कि यहोवा आकाश की सेना को आकाश में और पृथ्वी के राजाओं* को पृथ्वी ही पर दण्ड देगा।

व्यवस्थाविवरण 22:5 (HINIRV) »
“कोई स्त्री पुरुष का पहरावा न पहने, और न कोई पुरुष स्त्री का पहरावा पहने; क्योंकि ऐसे कामों के सब करनेवाले तेरे परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में घृणित हैं*।

2 राजाओं 24:12 (HINIRV) »
तब यहूदा का राजा यहोयाकीन अपनी माता और कर्मचारियों, हाकिमों और खोजों को संग लेकर बाबेल के राजा के पास गया, और बाबेल के राजा ने अपने राज्य के आठवें वर्ष में उनको पकड़ लिया।
सपन्याह 1:8 का सार भाव
इस वाक्य का सरल अर्थ है: ईश्वर वह दिन याद रखेगा जब यज्ञ-यौवन के समय युक्ति और जब्ती से काम लेने वाले लोगों पर दंडudíया जाएगा। यहाँ दंड के स्वरूप में राजाओं, राजकुमारों और दूसरे सम्मानित लोगों के वस्त्रों का उदाहरण दिया गया है, जो उनकी महान् स्थिति को दर्शाते हैं। यह चेतावनी उनके खिलाफ है जो परलोक के भय से नहीं, बल्कि अपने ढोंग और भ्रष्ट आचरण से ईश्वर के आदर्शों को नष्ट करते हैं।
संदर्भ-भूमिका
यह निहेरेन बिनय का भाग सपन्याह के संदेश का है, जिसमें यशयाह के काल के बाद के समय की नैतिक और धार्मिक अवमानना पर एक सख्त वार्ता है। यहाँ ईश्वर के तेवर उस समय की ओर इशारा करते हैं जब वे “यज्ञ के दिन” लाते हैं—समय जब न्यायपूर्ण क्रिया का समय आता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंस (Relevant Cross-References)
- यिर्मयाह 50:41-43: राजा और शक्तिशाली वर्गों के रोष और उनके ठाठ-ताम-झाम का प्रदर्शन मंच पर उजागर होता है, परन्तु न्याय के समय उन सबके व्यवहार की सच्चाई दिख जाएगी।
- मत्ती 23:27-28: बाह्य पवित्रता के पीछे भीतर की पापी वृत्ति के नष्ट होने की चेतावनी; एक समान आता है कि ऊपर से परिष्कृत दिखना गम्भीर आचरण के अभाव को नहीं छिपाता।
- यशायाह 3:6-7: समाज के शीर्ष वर्ग में अस्थिरता और दुराव के कारण आने वाले संकट का संकेत।
छोटे विषयगत निष्कर्ष
सूक्ष्म अन्वय—पाठ का व्यावहारिक सार
जो लोग सत्ता और सम्मान के कारण मनगढ़ंत सुरक्षा की आशा लगाते हैं, उनके लिए यह संदेश चेतावनी है कि ईश्वर की न्याय-कलम कभी थमती नहीं। अपनी आचरण-जीवन को पवित्र और सचेत रखें; बाहर की शोभा के बजाय हृदय की पवित्रता अधिक आवश्यक है।
हेतु-ऊपर का निष्कर्ष
सपन्याह 1:8 हमें यह स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर प्रत्येक प्रकार के पाखंड और भ्रष्ट प्रशासन को जवाबदेह बनाता है। नीतिगत दोषों के विरुद्ध सचेत प्रयास और पवित्र आचरण हीई समय की आवश्यकताओं के अनुरूप है।
ध्यान दें: नीचे उद्धृत शब्द-स्थिति के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के bekannten बिंदुओं से संक्षेप में समेकित विचार मिलते हैं, किन्तु पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण केवल अनावृत नहीं दिए गए हैं।
यह पंक्तियाँ भविष्य के न्याय के चित्र के रूप में भी काम करती हैं, जहाँ सत्ता-सम्पन्न वर्ग पर ईश्वर की दृष्टि और उनके आचरण का मेल नहीं बैठता।