Old Testament
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सपन्याह 1:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“मैं धरती के ऊपर से सब का अन्त कर दूँगा,” यहोवा की यही वाणी है।
सपन्याह 1:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सपन्याह 1:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 राजाओं 22:16 (HINIRV) »
'यहोवा यह कहता है, कि सुन, जिस पुस्तक को यहूदा के राजा ने पढ़ा है, उसकी सब बातों के अनुसार मैं इस स्थान और इसके निवासियों पर विपत्ति डालने पर हूँ।

उत्पत्ति 6:7 (HINIRV) »
तब यहोवा ने कहा, “मैं मनुष्य को जिसकी मैंने सृष्टि की है पृथ्वी के ऊपर से मिटा दूँगा;* क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या रेंगनेवाले जन्तु, क्या आकाश के पक्षी, सब को मिटा दूँगा, क्योंकि मैं उनके बनाने से पछताता हूँ।”

सपन्याह 1:2 — पवित्र न्याय और परमेश्वर की पूर्ण निर्णायक योजना
इस वाक्य में यहोवा कहता है कि वह धरती से सब कुछ समाप्त कर देगा। संदर्भ स्प्ष्ट करता है कि यह एक व्यापक, निर्णायक निर्देश है जिसमें राष्ट्रों, नगरों और प्रजा पर परमेश्वर की अत्यंत शक्तिशाली और न्यायपूर्ण क्रिया का संकेत है। सपन्याह को समझना इस बात पर निर्भर है कि वह परमेश्वर के दयालु प्रेम और कठोर न्याय के संतुलन को कैसे प्रस्तुत करता है। इसका आशय किसी एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे युग के बारे में परमेश्वर की आवश्यक चेतावनी और उद्धार के अवसर की चर्चा करता है।
मुख्य अर्थ
यह वचन बताता है कि परमेश्वर का निर्णय सार्वभौम है और मनुष्य की गतिविधियों का अंतिम स्रोत वही है। यह न केवल बुराइयों पर, बल्कि धरती पर रहने वाले हर एक के जीवन-क्रम पर भी प्रभुत्व रखता है—छोटों से बड़े तक, देश-देश से बाहर तक। यह स्पष्ट करता है कि यहोवा अपने दुख-भरे क्रोध के समय में भी पवित्रता और न्याय की रीति को बनाए रखता है।
मुख्य विषय
कुंजी विचार और प्रासंगिक पाठ
यह संदेश, जैसे अन्य भविष्यवाणियों में भी, अत्यंत प्रभावी है—न केवल दंड की घोषणा है बल्कि परिवर्तन की भी तुरन्त प्रेरणा है। संभवतः यहोवा समय-समय पर चेतावनियाँ देकर मनुष्यों को मोड़ता है ताकि वे उसकी इच्छा के अनुसार चलें।
क्रॉस-रेफरेंसेस
- राष्ट्र-नियोजन और न्याय: यशायाह 13:9; मत्ती 24:21-22. यहोवा की क्रोध और उद्धार के दिन वैश्विक संदेशन हैं, जहाँ भक्त-जन आशा बनाए रखते हैं।
- पाप के परिणाम और उद्धार के अवसर: चालिसी मदन 3:7-12; रोम 2:5. दंड के साथ परिवर्तन की राह भी प्रस्तुत है।
व्याख्या में ध्यान दें कि इन संदर्शों का उद्देश्य पूर्ण verses नहीं हैं, पर उनकी उल्लेखित प्रमुखता से संदेश के क्रम को समझना सरल होता है।
व्यावहारिक स्वरूप
हम कैसे प्रतिक्रिया करें? पहले, परमेश्वर के Holiness से भय और आस्था दोनों विकसित करें। फिर अपने जीवन के उन क्षेत्रों पर ईमानदारी से नजर डालें जहाँ असामाजिक, अन्यायपूर्ण या ग़लत स्थिर हो। यहोवा के न्याय के दिन के प्रति सतर्क रहकर, हम अपने जीवन को उसके मार्ग के अनुरूप ढालते हैं।
सम्मिलित सार
स्पष्ट रूप से कहा जाए तो सपन्याह 1:2 में परमेश्वर ঘোষণা कर रहे हैं कि वह धरती पर से सबका अंत करेगा—यह एक सार्वभौमिक चेतावनी नहीं, बल्कि एक चित्तीदार न्याय की पराकाष्ठा है जो धार्मिक और नैतिक सुधार के लिए प्रेरित करती है। यहोवा की सत्ता और पवित्रता की गहराई को समझना हमें आत्म-समर्पण की ओर प्रेरित करता है, ताकि जीवन उनके साथ मिलकर सही दिशा में चले।
चित्ताकर्षक उद्धरण (संदर्भित क्षेत्र): यह वाक्य Matthew Henry और Adam Clarke जैसे पुरאן-उद्धरणों के सार को देखते हुए, हमें उनके चिंतन में पवित्र न्याय के साथ दया और उद्धार की योजना का संतुलन दर्ज होता है। यदि आप चाहें तो मैं इन टिप्पणीकारों से छोटे-छोटे कथन हिंदी में भी साझा कर सकता हूँ।