Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 10:16 का सरल अर्थ
धर्मी का परिश्रम जीवन की दिशा बनाता है, जबकि दुष्ट का लाभ पाप के रास्ते खोल देता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन की यह पंक्ति दुःख-सुख के बीच परिणाम स्पष्ट करती है। यह किताब हमारे चरित्र-निर्भर जीवन के लिए व्यवहारिक मार्ग दिखाती है: अनुशासन, मेहनत और ईमानदारी से लाभ होता है; पाप के अवसर थोड़े समय के लिए मिलते हैं पर अंततः विनाश का कारण बनते हैं। यहाँ “धर्मी” से अभिप्राय एक ऐसी और साफ-सुथरी जीवन-शैली से है जो परमेश्वर के भय और न्याय पर टिके।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य विचार
अन्य सम्बन्धी अंश
यह विचार-विचार अन्य नीतियों में भी मिलते हैं:
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप समझ with explanations)
योजित संदर्भ एक-दूसरे के साथ गहरे जुड़ाव में दिखते हैं:
इन संदर्भों से समझ में आता है कि जीवन का वास्तविक लाभ चरित्र और विश्वास से आता है, न कि मात्र लाभ-लाभ से।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
आज के व्यवहार के लिए निर्देश: जो लोग ईमानदारी और मेहनत से काम करते हैं, वे सुरक्षित और स्थिर लाभ पाते हैं। पाप के तात्कालिक लाभ पर आँख मूंदना नुकसान देता है—धैर्यपूर्वक सत्य के मार्ग पर चलना अधिक उत्तम परिणाम देता है।
अतिरिक्त विचार: मॉडलों के रूप में पुराने पवित्र टिप्पणीकारों के नजरिए से यह विचार-धारा स्पष्ट रूप से उभरती है—धर्मी के निरंतर परिश्रम से जीवन बनता है, जबकि दुष्ट का लाभ अंततः पाप के कारण घटता है।
आवश्यक उद्धरण (सारांशित): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के संक्षिप्त संकेत नीचे दिये जाते हैं—
• Matthew Henry: "The labour of the righteous tendeth to life" (सार), जिस प्रकार की साफ़ नज़र और नियम से जीवन सुधरता है।
• Albert Barnes: यह भिन्नता बताती है कि परमेश्वर-भय और ईमानदारी के साथ किया गया परिश्रम सफलता की वास्तविक धुरी है।
• Adam Clarke: पाप के लाभ अल्पकालिक और रंगीन दिख सकते हैं, परन्तु उनका अंत विनाशक है।