Old Testament
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हबक्कूक 2:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हाय उस पर, जो अपने घर के लिये अन्याय के लाभ का लोभी है ताकि वह अपना घोंसला ऊँचे स्थान में बनाकर विपत्ति से बचे।
हबक्कूक 2:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 2:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 49:16 (HINIRV) »
हे चट्टान की दरारों में बसे हुए, हे पहाड़ी की चोटी पर किला बनानेवाले! तेरे भयानक रूप और मन के अभिमान ने तुझे धोखा दिया है। चाहे तू उकाब के समान अपना बसेरा ऊँचे स्थान पर बनाए, तो भी मैं वहाँ से तुझे उतार लाऊँगा, यहोवा की यही वाणी है।

उत्पत्ति 13:10 (HINIRV) »
तब लूत ने आँख उठाकर, यरदन नदी के पास वाली सारी तराई को देखा कि वह सब सिंची हुई है। जब तक यहोवा ने सदोम और गमोरा को नाश न किया था, तब तक सोअर के मार्ग तक वह तराई यहोवा की वाटिका, और मिस्र देश के समान उपजाऊ थी।

उत्पत्ति 19:26 (HINIRV) »
लूत की पत्नी ने जो उसके पीछे थी पीछे मुड़कर देखा, और वह नमक का खम्भा बन गई।
हबक्कूक 2:9 — तत्काल पृष्ठभूमि और अर्थ
पद के ठीक पहले हबक्कूक भविष्यद्वक्ता के साथ परमेश्वर के उत्तर के स्वर को सुनता है—हिब्रू समाज में अत्याचार और अन्याय का बढ़ना, विशेषकर वे जो अपने घरों के लिये मजबूत संपत्ति और सुरक्षित ठिकाने की desire रखते हैं। यहाँ शास्त्रीय चेतावनी है कि जो लोभ में अंधे होकर अनर्थकारी नीति अपनाते हैं, वे स्वयं की हानि के द्वार खोलते हैं।
पद का मुख्य विचार
“हाय उन पर, जो अपने घर के लिये अन्याय के लाभ का लोभी है ताकि वह अपना घोंसला ऊँचे स्थान में बनाकर विपत्ति से बचे” — यह निणर्य न केवल सामाजिक अपराध का तंज है, बल्कि आत्मिक ढंग से ईश्वर के न्याय से घबड़ाने की चेतावनी है। जो धन के लिये ईमान और संयम को छोड़ते हैं, वे अंततः अपने ही सुराग से गिर पड़ते हैं।
ईश्वर और Faith के बारे में पाठ से सीख
यह पाठ यह दिखाता है कि परमेश्वर हर प्रकार के अन्याय को मान्य नहीं करते। वह लोभ और असत्य से भरे नेताओं के खिलाफ निर्णय सुनाते हैं, भले वे सत्ता के ऊँचे स्थान पर क्यों न हों। विश्वास के अनुसार, परमेश्वर सत्य और न्याय की सीढ़ी पर खड़े रहते हैं; मनुष्यों के छल-छद्म उनकी दृष्टि से छिप नहीं पाते।
मुख्य शब्दों और इमेजरी की स्पष्ट व्याख्या
अन्य प्रासंगिक उद्धरण
यहां नीचे के cross-references पाठक को समग्र तस्वीर समझाने में मदद करते हैं:
आज के संदर्भ में व्यावहारिकApplication
आज भी दल/नेतनिता में लोभ और भ्रष्टाचार के आधुनिक रूप सामने आते हैं। नेताओं, व्यापारी, और नागरिक—सब के लिये यह संदेश है कि धन-लाभ के लिए अन्याय को सहारा देना अस्थायी सुरक्षा नहीं देता; यह ईश्वर के सम्मुख विश्वास और नैतिकता से समझौता है। अगर हम अपनी समृद्धि और सुरक्षा के स्रोत के रूप में केवल धन पर निर्भर रहते हैं, तो हम वास्तविक ख़तरे को भूल जाते हैं। परमेश्वर के साथ सही मार्ग अपनाने में ही जीवन की स्थायित्व है—न्याय, विवेक और दया की नीति में।
अर्थपूर्ण संदर्भ
1) न्याय के लिये ईश्वर की दृष्टि—न्याय के लिये उनका निर्णय कभी पीछे नहीं हटता।
2) समाज-न्याय और विभेद—लोक-कल्याण के लिये निष्पक्ष व्यवहार जरूरी है।
3) आस्था में सुरक्षा—धन पर निर्भरता नहीं, परमेश्वर पर भरोसा हमारा दृढ़ आधार बने।
निष्कर्ष रूप में यह पद बताता है कि कथित सुरक्षा के लिये अन्याय करना एक अस्थायी मोहर है, जबकि सत्य और निष्ठा के साथ जीना परमेश्वर के साथ स्थायी सुरक्षा देता है।
सूक्ति-उद्धरण (केवल वही जो संभव हो)
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से सीधे उद्धृत भाग चाहते हैं, तो कृपया बताएं; वर्तमान पाठ में इन विद्वानों के स्पष्ट वाक्यों के लिए अनुमति मिलने पर मैं उन्हीं से एकत्रित अंश दे दूँगा।