Old Testament
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हबक्कूक 2:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
देखो, क्या सेनाओं के यहोवा की ओर से यह नहीं होता कि देश-देश के लोग परिश्रम तो करते हैं परन्तु वे आग का कौर होते हैं; और राज्य-राज्य के लोगों का परिश्रम व्यर्थ ही ठहरता है?
हबक्कूक 2:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 2:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 51:58 (HINIRV) »
“सेनाओं का यहोवा यह भी कहता है, बाबेल की चौड़ी शहरपनाह नींव से ढाई जाएगी, और उसके ऊँचे फाटक आग लगाकर जलाए जाएँगे। और उसमें राज्य-राज्य के लोगों का परिश्रम व्यर्थ ठहरेगा, और जातियों का परिश्रम आग का कौर हो जाएगा और वे थक जाएँगे।”

यशायाह 50:11 (HINIRV) »
देखो, तुम सब जो आग जलाते* और अग्निबाणों को कमर में बाँधते हो! तुम सब अपनी जलाई हुई आग में और अपने जलाए हुए अग्निबाणों के बीच आप ही चलो। तुम्हारी यह दशा मेरी ही ओर से होगी, तुम सन्ताप में पड़े रहोगे।

मलाकी 1:4 (HINIRV) »
एदोम कहता है, “हमारा देश उजड़ गया है, परन्तु हम खण्डहरों को फिर बनाएँगे;” सेनाओं का यहोवा यह कहता है, “यदि वे बनाएँ भी, परन्तु मैं ढा दूँगा; उनका नाम दुष्ट जाति पड़ेगा, और वे ऐसे लोग कहलाएँगे जिन पर यहोवा सदैव क्रोधित रहे।”
हबक्कूक 2:13 का संक्षिप्त-संदेश: देश-देश और राज्य-राज्य की मेहनत व्यर्थ?
पद का सीधा सेटअप यह है कि यहोवा के मिजाज के साथ मानवीय प्रयासों के संबंध को उभारता है। यहाँ परमेश्वर पूछते हैं कि जो सभ्य-सम्पन्न राष्ट्र अपने शक्तिशाली उद्योग और तकनीकी उन्नति पर गर्व करते हैं, क्या उनके परिश्रम सचमुच परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप परिणामित होते हैं? नहीं, यहलहज़ार आँखों के सामने है कि उनकी मेहनत भी आग के कौर बन कर नष्ट हो जाती है और सत्ता-शासन की नीति-निर्णय भी व्यर्थ सिद्ध होते हैं। यह नीतिगत चेतावनी उसकी ओर संकेत करती है कि पृथ्वी के सामर्थ्य और संपदा से कभी भी परमेश्वर के उद्देश्य का नियंत्रण नहीं छीना जा सकता।
ईश्वर का स्वर और विश्वास पर स्पष्ट संदेश
यहवाक्य दर्शाता है कि परमेश्वर एक ऐसे शासन में भी हस्तक्षेप कर सकता है जहाँ मानवीय योजनाएँ भली-भांति चल रहीं हों। उसका उद्देश्य है मानवीय गर्व को तोड़ना और वास्तविकता दिखाना कि हर परिश्रम, भले ही वह कितनी बड़ी अर्थ-संरचना बना दे, जब तक वह परमेश्वर की योजना से नहीं जुड़ा, तब तक उसकी महत्ता कम है। यह गूढ़ चेतावनी विश्वास को यह सोचने को प्रेरित करती है कि हम किस भरोसे पर टिके रहते हैं—अपने संसाधनों पर या परमेश्वर की कृपा पर।
महत्वपूर्ण शब्दों व चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
अन्य सुसंगत पाठ
- यशायाह 2:11-17—आत्म-गौरव और समृद्धि के स्थायित्व की अस्थिरता पर ईश्वर की चावनी।
- दानिय्येल 4:30-32—राजाओं की महिमा और परमेश्वर के शासन के सामने उनकी नहीं चलना।
- मत्ती 6:19-21—धन-संपदा पर नहीं, पर हृदय की साधना पर केन्द्रित जीवन की महत्ता।
आज के संदर्भ में व्यवहारिक अनुप्रयोग
1) सफलता और संपदा के साथ विनम्रता: जो अपने परिश्रम पर गर्व करते हैं, वे यह याद रखें कि परमेश्वर की योजना का भाग बनना किसी भी आर्थिक उपलब्धि से बढ़कर है।
2) सम्पन्नता के साथ जिम्मेदारी: समाज की उन्नति में भागीदारी लेते समय ईश्वर के न्याय और करुणा को ध्यान में रखें, ताकि संसाधन अन्याय से न बढ़ें बल्कि कमज़ोरों के लिए राहत का माध्यम बनें।
3) विश्वास की दिशा: अपने कदम परमेश्वर की योजना के अनुरूप रखें—यही वास्तविक सफलता है, न कि पृथ्वी की ताकत।
कहावत-युक्त निष्कर्ष
यह पद हमें स्मरण कराता है कि परिश्रम और प्रगति तब तक शुद्ध नहीं मानी जाती जब तक उनका उद्देश्य परमेश्वर की महिमा और लोगों की भलाई से जुड़ा न हो।
पवित्र-उद्धरण/सूत्र-उद्धृत विचार (संयोजन)
मार्थेनी हेनरी, अल्बर्ट बार्नेस, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायके पाठ्य-उद्धरणों के सीधे शब्दहरू उपलब्ध हों तो वे नीचे दिए गए पंक्तियों में संदर्भित हैं। इन लेखकों के साथ उनके मौलिक विचारों को संक्षेप में अपनाते हुए, पाठ की संदर्भ-गहराई को मजबूत किया गया है।
सार-सार यह है कि परमेश्वर की योजना में मानव-यत्नों को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए; बल्कि उन्हें उसकी दिशा में ढालना चाहिए ताकि परिणाम उसकी महिमा और न्याय के अनुरूप हों।