Old Testament
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हबक्कूक 2:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हाय उस पर, जो अपने पड़ोसी को मदिरा पिलाता, और उसमें विष मिलाकर उसको मतवाला कर देता है कि उसको नंगा देखे।
हबक्कूक 2:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 2:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 51:7 (HINIRV) »
बाबेल यहोवा के हाथ में सोने का कटोरा था, जिससे सारी पृथ्वी के लोग मतवाले होते थे; जाति-जाति के लोगों ने उसके दाखमधु में से पिया, इस कारण वे भी बावले हो गए। (प्रका. 14:8, प्रका. 17:2,4, प्रका. 18:3)

उत्पत्ति 9:22 (HINIRV) »
तब कनान के पिता हाम ने, अपने पिता को नंगा देखा, और बाहर आकर अपने दोनों भाइयों को बता दिया।

प्रकाशितवाक्य 17:6 (HINIRV) »
और मैंने उस स्त्री को पवित्र लोगों के लहू और यीशु के गवाहों के लहू पीने से मतवाली देखा; और उसे देखकर मैं चकित हो गया।
हबक्कूक 2:15 का अर्थ-doorway: मदिरा पिलाने और आडंबरपूर्ण नंगेपन की निंदा
सीधे शब्दों में कहें तो यह वचन बताता है कि जो व्यक्ति अपने पड़ोसी को मदिरा पिलाकर उसे नंगा देखने को उकसाता है, उसका उद्देश्य दूसरों की कमज़ोरी से लाभ उठाना है और समाज में शील-भंग का उत्पीड़न है। यह वह कार्य है जो प्रभु के न्याय के विरुद्ध आयोजित होता है और सामाजिक नैतिकता को नुक़सान पहुँचाता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
हबक्कूक के नबी-काल में इज़राइल की सामाजिक-आर्थिक और धार्मिक अव्यवस्था गहरी हो चुकी थी। नबी अंबार-सा अन्याय, अत्याचार और हिंसा देख कर चकित थे। इस पद के पीछे की सूरत यह है कि कुछ लोग ही नहीं, सामूहिक स्वरूप से दूसरों को शील-हानि और अपमान में डालते हैं, ताकि सत्ता-स्वार्थों की पूर्ति हो सके। इस संदर्भ में यहुदी समाज में नशे और व्यसन-प्रेरित अशुद्धियों के कारण परिवार और पड़ोसी-सम्बन्ध बिखर रहे थे।
व्याख्यात्मक दृश्य
कहावत में ‘हाय’ शब्द एक चेतावनी और आक्रोश का संकेत है। जो पड़ोसी को मदिरा पिलाकर उसमें विष मिलाकर उसे मद्य-नशे में डुबो देता है, वह न केवल उस व्यक्ति के प्रति अन्याय है, बल्कि समाज के नैतिक ढांचे को तोड़ता है। यह एक प्रकार की सामाजिक छलकपट है जिसमें शील-बेचैनी और शारीरिक-आत्मा के अपमान के ज़रिए धन और शक्ति की लालसा पूरी होती है।
मुख्य निष्कर्ष (Interpretive observations)
संदर्भ-स्तम्भ (Cross-references) और त्वरित अर्थ-वाक्य
1) गलत-लाभ के लिए दूसरों की शील-हानि: प्रेरित-आचरण बनाम न्याय। यह पाठ भी अन्याय के विरुद्ध चेतावनी देता है।
2) नशे से उत्पन्न मानसिक नियंत्रण और अधिकार-लाभ: यह भीड़-नियमन के विरुद्ध है और दया-भाव को खो देता है।
3) पड़ोसी के प्रति सम्मान: सामाजिक सम्बन्धों के नैतिक आयामों को बनाये रखने की ज़रूरत पर बल देता है।
सार-संक्षेप और व्यावहारिक अनुप्रयोग
यह वचन सामाजिक अन्याय के एक विशिष्ट रूप को चेतावनी देता है—जहाँ कोई व्यक्ति पड़ोसी की कमजोरी को अपने लाभ के लिए विषाक्त कर देता है। व्यवहारिक पहलू यह है कि अपना नैतिक दायित्व निभाते हुए आप आपसी सम्मान, सुरक्षा और प्रेम को संरक्षित करें। पहले खुद पर नियंत्रण रखें; दूसरों की दुविधाओं का लाभ न उठायें; कमजोरों के साथ निष्कपट और न्यायपूर्ण व्यवहार करें।
महत्त्वपूर्ण टिप्पणी (संयुक्त समेकित विचार)
डायरेक्ट-भिन्नता में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पारंपरिक टिप्पणियों से प्रेरणा मिलती है कि यह न सिर्फ व्यक्तिगत पाप है, बल्कि समुदाय-धर्म के विरुद्ध एक व्यापक सामाजिक भ्रष्टाचार है। Henry कहते थे कि यह एक ऐसे कर्म का प्रदर्शन है जिसमें निर्बलों के प्रति क्रूरता और शक्ति-उपयोग की प्रवृत्ति साफ दिखाई देती है; Barnes इसे दुष्कर्म-परक आचरण मानते हैं जो सामाजिक धोखे और शराबी-उत्पीड़न के साथ जुड़ा है; Clarke व्याख्या में इसे एक वास्तविक शील-हानि की क्रिया मानते हैं जो देव-न्याय के विरुद्ध है।
नोट
यदि आप चाहें, मैं इस पाठ के लिए और विस्तृत पारंपरिक_COMMENTary-उद्धरणों का संकलन दे सकता हूँ, पर यहाँ संक्षेप में ही मूल विचार प्रस्तुत हैं।