Old Testament
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हबक्कूक 2:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और क्या तू उनसे लूटा न जाएगा? तूने बहुत सी जातियों को लूट लिया है, इसलिए सब बचे हुए लोग तुझे भी लूट लेंगे। इसका कारण मनुष्यों की हत्या है, और वह उपद्रव भी जो तूने इस देश और राजधानी और इसके सब रहनेवालों पर किया है।
हबक्कूक 2:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 2:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 33:1 (HINIRV) »
हाय तुझ नाश करनेवाले पर जो नाश नहीं किया गया था; हाय तुझ विश्वासघाती पर, जिसके साथ विश्वासघात नहीं किया गया! जब तू नाश कर चुके, तब तू नाश किया जाएगा; और जब तू विश्वासघात कर चुके, तब तेरे साथ विश्वासघात किया जाएगा।

हबक्कूक 2:17 (HINIRV) »
क्योंकि लबानोन में तेरा किया हुआ उपद्रव और वहाँ के जंगली पशुओं पर तेरा किया हुआ उत्पात, जिनसे वे भयभीत हो गए थे, तुझी पर आ पड़ेंगे। यह मनुष्यों की हत्या और उस उपद्रव के कारण होगा, जो इस देश और राजधानी और इसके सब रहनेवालों पर किया गया है।

यिर्मयाह 27:7 (HINIRV) »
ये सब जातियाँ उसके और उसके बाद उसके बेटे और पोते के अधीन उस समय तक रहेंगी जब तक उसके भी देश का दिन न आए; तब बहुत सी जातियाँ और बड़े-बड़े राजा उससे भी अपनी सेवा करवाएँगे।
हबक्कूक 2:8 का अर्थ और संपूर्ण संदर्भ
इस पद का सीधा अर्थ है: जो लोग अन्य देशों को लूटते रहे हैं, वे भी उनसे लूटा जाएँगे; उनका क्षेत्र और संपत्ति, जो उन्होंने उत्पीड़न से जमा की थी, अब बदले में उनकी ही लूट हो जाएगी। यह बताती है कि दुष्कर्मों की आवश्यकता-परिणामस्वरूप दंड अवश्य आता है, और परमेश्वर की न्याय-निष्ठा अन्ही नहीं रहती।
पृष्ठभूमि और स्थिति
हबक्कूक की पुस्तक में नबीनिर्देशक समय के उत्तर-आधार पर बोलते हैं—बेबीलोनियन राजा और उसके आक्रांताओं के द्वारा इस्राएल, यहूदा पर किए जा रहे आक्रमण के संदर्भ में। प्रखर भ्रष्टाचार, अत्याचार और दमन से देश भयावह स्थिति में था। इस संदर्भ में 2:8 भगवान बताता है कि जब आप ने अन्य जातियों को लूटा और अपने अत्याचारों से देश को दुखाया, तो उन्रकी बचे-खुचे आशा-रक्त भी आपको गिरा देगी। यह एक प्रकार का संबंधित-न्याय है: जो भी अन्याय के मार्ग पर चला, उसके अवांछित परिणाम उसे ही मिलते हैं।
व्याख्यात्मक दृष्टिकोण
- यहाकाल का अधिकारी कहता है कि अत्याचार और लूट से बड़ी स्थायित्व नहीं मिलती; असत्य, हिंसा और दमन अंततः पलट कर उन पर पड़ते हैं जो ऐसा करते हैं।
- संदेश यह है कि परमेश्वर की निष्पक्षता सदा सक्रिय रहती है; अन्याय पर चुप रहना भी अस्वीकार्य है क्योंकि वह भी एक प्रकार के अन्याय को बढ़ावा देता है।
- यह उद्धार के मार्ग में निष्कर्ष भी देता है कि परिवर्तन और पश्चाताप के बिना स्थाई राहत नहीं मिलती।
संक्षिप्त थीमेटिक बिंदु
संबंधित पद और संक्षिप्त व्याख्या
• यिर्मयाह 22:3-5: ईमानदार शासन और न्याय की आवश्यकता, ताकि दुष्कर्म के परिणाम पूरे समाज को न चुभें।
• अमोस 5:24: न्याय को जंगलों-सी नहीं छोड़ना, बल्कि सत्य-न्याय से प्रवाह होना चाहिए।
• दानिएल 4:17: परमेश्वर के निर्णय सभी मानवजातियों के लिए समान और स्पष्ट हैं—अधर्म के विरुद्ध परिणाम।
गम्भीर लेकिन उपयोगी निष्कर्ष
- जीवन के रोज़मर्रा में: अपने कार्यों के प्रभाव का ध्यान रखें; सत्ता या संपत्ति की कैसे भी लिप्सा हो, यदि वह दूसरों के नुकसान से प्राप्त हो, तो उसका स्थाई संतोष नहीं रहता।
- समाज के लिए शिक्षा: अन्याय के विरुद्ध खड़े होने में साहस और सहिष्णुता चाहिए; यह नगर और राष्ट्र की सुरक्षा का सार है।
महत्वपूर्ण उद्धरणों का हवाला
इस पाठ में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के विश्लेषण से बोध निकलता है कि दुष्कर्म तेजस्वी परिणामों से जुड़ते हैं और परमेश्वर की न्याय-प्रणाली कभी न रुकेगी।
यदि उद्धरण मिले हों तो उल्लेखित होंगे: “…” (नोट: उपरोक्त commentary में सटीक शब्द-उद्धरण केवल सार्वजनिक-domain मत-विश्लेषण से लिया गया है; विस्तृत टेक्स्ट उद्धरण यहाँ नहीं दिया गया है)
क्रॉस-रेफरेंस और तात्पर्य
• प्रस्थान-परिचय: अन्याय के परिणाम अक्सर उसी मार्ग से वापस आते हैं, जिस मार्ग से उसका जन्म हुआ।
• न्याय की कसौटी: सही न्याय और दया के साथ, समाज में स्थिरता बनी रहती है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जो लोग दबाव, लूट और अत्याचार से उन्नति समझते हैं, वे एक दिन अपने गलत कदमों के परिणाम भुगतते हैं। सत्य-न्याय की राह पर चलना ही व्यक्तिगत और सामाजिक सुरक्षित भविष्य की कुंजी है.