Old Testament
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हबक्कूक 2:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
दाखमधु से धोखा होता है; अहंकारी पुरुष घर में नहीं रहता, और उसकी लालसा अधोलोक के समान पूरी नहीं होती, और मृत्यु के समान उसका पेट नहीं भरता। वह सब जातियों को अपने पास खींच लेता, और सब देशों के लोगों को अपने पास इकट्ठे कर रखता है।”
हबक्कूक 2:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हबक्कूक 2:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नीतिवचन 20:1 (HINIRV) »
दाखमधु ठट्ठा करनेवाला और मदिरा हल्ला मचानेवाली है; जो कोई उसके कारण चूक करता है, वह बुद्धिमान नहीं।

भजन संहिता 138:6 (HINIRV) »
यद्यपि यहोवा महान है, तो भी वह नम्र मनुष्य की ओर दृष्टि करता है; परन्तु अहंकारी को दूर ही से पहचानता है।

हबक्कूक 2:5 पर एक स्पष्ट दृष्टि
यह पद ईश्वर के प्रति असत्य के दुष्प्रभाव और अभिमान की परिणतियों को उभारकर दिखाता है। दाखमधु से धोखा, अहंकार, और अधोलोक जैसी अधूरा संतुष्टि—इन सबके पीछे एक गहरी सूझ-बूझ है। महत्त्वपूर्ण यह है कि परमेश्वर उन लोगों के आचरण को देखता है जो संसारिक विलास और शक्ति के पीछे भागते हैं, और उनकी लालसाओं के अनंतपन को चित्रित करता है।
पद का संदर्भ और उसकी संकल्पना
यह अध्याय 2 में नबी HABakkuk की दृष्टि में पाप और दुष्प्रेरणा के बारे में है। विशिष्ट रूप से 5वें वचन में हम देखते हैं कि शराबीता, अहंकार, और लालसा—ये विनाशकारी प्रवृत्तियाँ हैं जो कभी पूरी नहीं होतीं; वे व्यक्ति को अधोलोक के समान खाली नहीं करते, पर उसकी मर्यादाओं और भरोसे को तोड़ते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
1) खोखले सुख के पीछे की सच्चाई: दाखमधु से धोखा होना यह बताता है कि संसारिक मोह-प्रलोभन अन्ततः असंतोष और अस्थिरता देता है। शराबीपन के कारण व्यक्ति अपने ही घर-परिवार और समाज से दूरी बना लेता है।
2) अहंकारी का परिणाम: “घर में नहीं रहता” यह बताता है कि अभिमान से बना जीवन स्थिर नहीं रहता; उसका अस्थिर स्वभाव उसे भरोसेमंद नहीं बनाता।
3) लालसा और उसकी सीमा: “अपनी लालसा अधोलोक के समान पूरी नहीं होती” यह स्पष्ट चेतावनी है कि सांसारिक इच्छा अंततः शांति नहीं देती; अधोलोक की कल्पना भी उसकी भूख को नहीं भर पाती।
अनुसंधान और संदर्भ
- हबक्कूक 2:4 की आत्म-विश्वास बनाम विश्वास का विषय यहाँ भी उभरता है: “विश्वास में ही उद्धार है” के साथ अहंकार का विरोध स्पष्ट है।
- नीतिवचन 16:18–19 बताता है कि अभिमान गिराने वाला होता है, विनय सम्भालने वाला सम्मान पाता है।
- 1 कुरिन्थियों 6:12 के विरुद्ध, संसारिक इच्छा जिन्हें नियंत्रित करने से शक्ति मिलती है, वे आत्मिक जीवन को नहीं भरते।
कड़े साक्ष्य और पठन-समझ
यह Verse दिखाता है कि दुष्कर्म केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि एक सामूहिक प्रवृत्ति बन सकता है—जहां लोग अन्य जातियों/देशों को अपनी इच्छा के अनुसार खींचते हैं। परंतु ईश्वर की नज़र में वह धोखा देते हैं और अंततः शांति, स्थिरता और वास्तविक तृप्ति उन्हें नहीं देती।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
सार-सारांश
हबक्कूक 2:5 संसारिक मोह, अहंकार और असीम लालसा के असंतोषपूर्ण परिणाम दिखाता है। शराबीपन के धोखे से बचना, अहंकार से संयम रखना, और लालसा पर नियंत्रण एक ईमानदार और स्थिर जीवনের कुंजी है। परमेश्वर यह बताना चाहता है कि सत्य, विश्वास और विनम्रता ही वास्तविक तृप्ति और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
छोटे cross-referencing नोट
- नीतियों और अभिमान के विपरीत मूल्य: यह पाठ हबक्कूक के समग्र संदेश के अनुरूप है कि आत्म-आत्मविश्वास नहीं, परमेश्वर पर दृढ़ आस्था सबसे सुरक्षित मार्ग है।
- अन्य भाष्य तुलना: Henry/Barnes/Clarke के त्वरित संकेतों के अनुसार, इन प्रवृत्तियों के दुष्प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र में स्पष्ट होते हैं—पर वे उद्धार की राह में रोड़ा बनते हैं।