Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीसभोपदेशक 5:17 बाइबल पद की व्याख्या
सभोपदेशक 5:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
केवल इसके कि उसने जीवन भर बेचैनी से भोजन किया, और बहुत ही दुःखित और रोगी रहा और क्रोध भी करता रहा?
सभोपदेशक 5:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
सभोपदेशक 5:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

भजन संहिता 127:2 (HINIRV) »
तुम जो सवेरे उठते और देर करके विश्राम करते और कठोर परिश्रम की रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद प्रदान करता है।

उत्पत्ति 3:17 (HINIRV) »
और आदम से उसने कहा, “तूने जो अपनी पत्नी की बात सुनी, और जिस वृक्ष के फल के विषय मैंने तुझे आज्ञा दी थी कि तू उसे न खाना, उसको तूने खाया है, इसलिए भूमि तेरे कारण श्रापित है। तू उसकी उपज जीवन भर दुःख के साथ खाया करेगा; (इब्रा. 6:8)

1 राजाओं 17:12 (HINIRV) »
उसने कहा, “तेरे परमेश्वर यहोवा के जीवन की शपथ मेरे पास एक भी रोटी नहीं है केवल घड़े में मुट्ठी भर मैदा और कुप्पी में थोड़ा सा तेल है, और मैं दो एक लकड़ी बीनकर लिए जाती हूँ कि अपने और अपने बेटे के लिये उसे पकाऊँ, और हम उसे खाएँ, फिर मर जाएँ।”
सभोपदेशक 5:17 — जीवन भर बेचैनी से भोजन और दर्द-हृदय स्थिति
यह पद वह चेतावनी देता है जो किसी धन-संपत्ति या बाहरी सफलता से नहीं मिलती: बिना ईश्वर के भय और सही आंतरिक संतुष्टि के जीवन में अत्यंत बेचैनी और रोग-भरे अनुभव आ सकते हैं। यदि व्यक्ति केवल भौतिक लाभ की तलाश में जीवन व्यतीत करे, क्रोध, दुःख और अल्पसमय में हीनता की बेचैनी उभरती है। इस आयत का संदेश एक समुचित जीवन-योजना का आह्वान है—परिश्रम और भोजन की आवश्यकता पूरी करते हुए भी परमेश्वर के साथ जीवन का केंद्र बनाना।
पार्श्व संदर्भ का मूल विचार—सभोपदेशक पुस्तक एक खोजपूर्ण वक्तव्य है जिसमें लेखक जीवन के अस्थायित्व, वैभव और कामना-आध्यात्मिक संतुष्टि के बीच संतुलन खोजता है। यहां कथन qhia करता है कि चाहे कोई कितना भी भोग-संपत्ति क्यों न जमा ले, यदि दिल परमेश्वर से विचलित हो, तो जीवन अंततः असंतुष्ट और तनावपूर्ण हो सकता है।
पार्श्व संदर्भ और मूल संदेश
पवित्र ग्रंथ के साथ संबद्ध विचार
1) अन्य संदर्भों में धन की संभावना के साथ आंतरिक संतुष्टि की कमी दर्शायी गयी है, क्योंकि ExternalSuccess बिना आंतरिक शांति के सतही है।
2) क्रोध और आक्रोश की हानियों पर प्रकाश डाला गया है; यह कहना कि परमेश्वर के भय से जीवन में स्थिरता आ सकती है, जबकि उन्मत्त चिंता से दूरी बनती है।
3) विश्वसनीय आस्था और नयी दृष्टि—समस्त अनुभवों के बावजूद परमेश्वर की समिति और साहचर्य जीवन के असली धन हैं।
आवश्यक क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में) और उनके अर्थ
व्यावहारिक प्रकाशन और देवotional मार्गदर्शन
- कम खर्चीले जीवन के साथ भी आंतरिक शांति संभव है जब हम परमेश्वर की चरण-यात्रा में स्थिर रहते हैं।
- क्रोध की प्रवृत्ति पर नियंत्रण और भलाई के मार्ग में धीरे-धीरे सुधार लाने की प्रेरणा हमें व्यवहारिक नैतिकता सिखाती है।
संक्षिप्त प्रकाश-नोट
प्रमुख संदेश यही है: जीवन की वास्तविक समृद्धि ईश्वर के साथ निकटता और सही दृष्टिकोण में है, न कि भौतिक साधनों के अकेले संचय में। यदि भोजन-योजनाएं सरल हों और आत्मा की शांति बनी रहे, तो बेचैनी कम होगी और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर रहेगा।